Mangala Gauri Vrat 2025 : 15 जुलाई 2025 को पहला मंगला गौरी व्रत, सावन मास के पहले मंगलवार को पड़ रहा है। यह व्रत विशेष रूप से सुहागिन महिलाएं अपने पति की लंबी उम्र और संतान प्राप्ति की कामना के लिए करती हैं। इस व्रत में मां पार्वती की विशेष पूजा की जाती है। आइए पढ़ें इस व्रत की एक प्रेरणादायक और चमत्कारी कथा, जो संतान और सौभाग्य की प्राप्ति से जुड़ी है।
बहुत समय पहले की बात है, एक गांव में एक धनी साहूकार और उसकी पत्नी रहते थे। उनके पास धन-दौलत की कोई कमी नहीं थी, लेकिन वे संतान न होने के कारण अत्यंत दुखी थे। इस कारण उनका जीवन अधूरा सा लगता था।
एक दिन एक साधु उनके घर आए। साहूकार ने उन्हें आदरपूर्वक भोजन कराया और अपनी व्यथा बताई। साधु ने साहूकार की पत्नी को सावन के प्रत्येक मंगलवार को मंगला गौरी व्रत करने की सलाह दी। उन्होंने पूजा विधि भी विस्तार से बताई।
साहूकार की पत्नी ने उसी साल सावन के पहले मंगलवार से विधिपूर्वक व्रत रखना आरंभ कर दिया। उसने हर मंगलवार को भक्ति और श्रद्धा से पूजा की। कई महीनों के व्रत के बाद माता पार्वती प्रसन्न हो गईं और भगवान शिव से वरदान देने का आग्रह किया।
रात को साहूकार को स्वप्न में एक दिव्य शक्ति ने दर्शन देकर कहा कि एक आम के पेड़ के नीचे भगवान गणेश की मूर्ति है। उस पेड़ से आम तोड़कर अपनी पत्नी को खिलाओ, तुम्हें संतान की प्राप्ति होगी।
सुबह साहूकार ने पत्नी को स्वप्न के बारे में बताया और पेड़ की खोज में निकल पड़ा। अंततः उसे वह आम का पेड़ मिला। उसने आम तोड़ने के लिए पत्थर फेंका, पर एक पत्थर भगवान गणेश की मूर्ति पर जा लगा, जिससे गणेश जी नाराज़ हो गए।
भगवान गणेश ने प्रकट होकर कहा, “तुझे संतान की प्राप्ति तो होगी, पर तेरा पुत्र केवल 21 वर्ष तक जीवित रहेगा।” यह सुनकर साहूकार डर गया, लेकिन उसने फल पत्नी को खिला दिया।
कुछ समय बाद उन्हें एक सुंदर पुत्र की प्राप्ति हुई, जिससे परिवार में आनंद का वातावरण बन गया, पर साहूकार के मन में पुत्र की अल्पायु को लेकर चिंता बनी रही।
जब वह पुत्र 20 वर्ष का हुआ, एक दिन वह पिता के साथ तालाब किनारे भोजन कर रहा था। तभी दो कन्याएं — कमला और मंगला — कपड़े धोते हुए बात कर रही थीं। कमला ने मंगला से कहा कि वह मंगला गौरी व्रत रखती है जिससे माता की कृपा प्राप्त होती है और अखंड सौभाग्य मिलता है।
साहूकार ने यह संवाद सुना और विचार किया कि ऐसी पुण्यवती कन्या उसके पुत्र के लिए उत्तम पत्नी होगी। उसने कमला के पिता से विवाह का प्रस्ताव रखा और विवाह संपन्न हो गया।
विवाह के बाद भी कमला ने मंगला गौरी व्रत जारी रखा। उसकी भक्ति से माता पार्वती प्रसन्न हुईं और स्वप्न में उसे दर्शन देकर कहा कि अगले मंगलवार को एक सर्प उसके पति के प्राण लेने आएगा। उपाय बताया गया कि एक प्याले में मीठा दूध और पास में खाली मटकी रख दो। सर्प दूध पीकर मटकी में चला जाएगा, फिर मटकी को कपड़े से ढककर जंगल में रख देना।
कमला ने वैसा ही किया। सर्प दूध पीकर मटकी में चला गया और कमला ने मटकी को बंद करके जंगल में रख दिया। माता पार्वती की कृपा से साहूकार का पुत्र मृत्यु के संकट से बच गया। जब कमला ने यह चमत्कार सबको बताया, तो सभी आश्चर्य में पड़ गए।
इस घटना के बाद साहूकार और उसकी पत्नी ने पुत्र और पुत्रवधू को आशीर्वाद दिया। अब उनका पुत्र दीर्घायु हो चुका था और पूरे परिवार ने सुख और शांति से जीवन व्यतीत किया।
इस कथा से स्पष्ट होता है कि मंगला गौरी व्रत करने से संतान सुख, सौभाग्य और संकटों से रक्षा का वरदान मिलता है। मां पार्वती की कृपा से असंभव भी संभव हो सकता है। यह व्रत श्रद्धा, संयम और भक्ति से किया जाए, तो जीवन की सभी बाधाएं दूर हो सकती हैं।
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