Manikarnika Ghat FIR
Manikarnika Ghat FIR: उत्तर प्रदेश के वाराणसी में मोक्षदायिनी मणिकर्णिका घाट के पुनर्विकास और सौंदर्यीकरण कार्य को लेकर सोशल मीडिया पर एक नया विवाद खड़ा हो गया है। हाल ही में इस ऐतिहासिक घाट के कायाकल्प को लेकर आर्टिफीसियल इंटेलिजेंस (AI) की मदद से तैयार की गई कई फोटो और वीडियो सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर वायरल हुईं। इन तस्वीरों के माध्यम से कथित तौर पर सरकार के कार्यों को लेकर भ्रामक सूचनाएं फैलाने और जनता को गुमराह करने का प्रयास किया गया। प्रशासन ने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए डिजिटल दुनिया में अफवाह फैलाने वालों के खिलाफ सर्जिकल स्ट्राइक शुरू कर दी है।
वाराणसी पुलिस के अनुसार, भ्रामक सूचनाएं और फेक कंटेंट प्रसारित करने के आरोप में थाना चौक पर कुल 8 अलग-अलग प्राथमिकी (FIR) दर्ज की गई हैं। इस मामले में सबसे चौंकाने वाला नाम आम आदमी पार्टी के राज्यसभा सांसद संजय सिंह और कांग्रेस नेता पप्पू यादव का है। इन दोनों दिग्गज राजनेताओं पर आरोप है कि उन्होंने बिना तथ्यों की जांच किए मणिकर्णिका घाट से जुड़ी आपत्तिजनक और एआई जनित भ्रामक पोस्ट साझा कीं। पुलिस ने एफआईआर दर्ज करने के बाद सभी नामजद आरोपियों को आधिकारिक नोटिस जारी कर दिया है।
वाराणसी पुलिस ने स्पष्ट किया है कि आरोपियों को नोटिस भेजकर 3 दिन के भीतर अपना जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया गया है। पुलिस का कहना है कि सोशल मीडिया पर कुछ ऐसी तस्वीरें भी शेयर की गई हैं, जिनका मणिकर्णिका घाट से कोई लेना-देना ही नहीं है। इन तस्वीरों को गलत तरीके से पेश कर यह दिखाने की कोशिश की गई कि सरकार के सौंदर्यीकरण कार्य से घाट के मूल स्वरूप को नुकसान पहुँच रहा है। पुलिस ने कहा कि यदि आरोपी तय समय सीमा के भीतर संतोषजनक जवाब नहीं देते हैं, तो उनके खिलाफ आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
मामले की गहराई से जांच कर रही पुलिस टीम लगातार मणिकर्णिका घाट के स्थानीय निवासियों, तीर्थ पुरोहितों और व्यापारियों के संपर्क में है। पुलिस के मुताबिक, “जांच के दौरान यह बात सामने आई है कि स्थानीय लोग सरकार द्वारा किए जा रहे पुनर्विकास कार्य से बहुत खुश हैं। वे आधुनिक सुविधाओं और सौंदर्यीकरण के प्रयासों के लिए सरकार के प्रति आभार व्यक्त कर रहे हैं।” स्थानीय समाज का मानना है कि कुछ बाहरी तत्व और राजनीतिक दल अपनी रोटियां सेंकने के लिए शांतिपूर्ण वातावरण को खराब करने का प्रयास कर रहे हैं।
वाराणसी पुलिस और साइबर सेल की टीम सोशल मीडिया के विभिन्न हैंडल्स पर पैनी नजर रख रही है। अधिकारियों ने चेतावनी दी है कि विकास कार्यों को लेकर किसी भी प्रकार की धार्मिक या सामाजिक वैमनस्य फैलाने वाली पोस्ट बर्दाश्त नहीं की जाएगी। पुलिस ने जनता से भी अपील की है कि वे एआई द्वारा बनाई गई भ्रामक फोटो और वीडियो पर विश्वास न करें और किसी भी सूचना को साझा करने से पहले उसकी सत्यता की जांच जरूर करें। इस मामले में अन्य सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर्स और अकाउंट होल्डर्स की भूमिका की भी जांच की जा रही है।
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