Manipur Earthquake
Manipur Earthquake : पूर्वोत्तर भारत के राज्य मणिपुर में कुदरत और मानवीय संकट का दोहरा प्रहार देखने को मिल रहा है। मंगलवार की तड़के जब लोग गहरी नींद में थे, तभी धरती के शक्तिशाली कंपन ने पूरे राज्य को हिलाकर रख दिया। मणिपुर के साथ-साथ पड़ोसी राज्यों नागालैंड, असम और मेघालय में भी भूकंप के तेज झटके महसूस किए गए। एक ओर जहां लोग भूकंप के डर से सड़कों पर निकल आए, वहीं दूसरी ओर राज्य में जारी जातीय हिंसा और विरोध प्रदर्शनों ने जनजीवन को पहले से ही संकट में डाल रखा है।
नेशनल सेंटर फॉर सीस्मोलॉजी (NCS) के आंकड़ों के अनुसार, मंगलवार (21 अप्रैल 2026) की सुबह भारतीय समयानुसार 5:59:33 बजे मणिपुर में 5.2 तीव्रता का भूकंप दर्ज किया गया। भूकंप का केंद्र मणिपुर के कामजोंग जिले में जमीन से करीब 62 किलोमीटर की गहराई में स्थित था। अहले सुबह आए इस झटके के कारण लोग घबराकर अपने घरों से बाहर खुले मैदानों की ओर भागने लगे। हालांकि, राहत की बात यह रही कि इतनी तीव्रता के बावजूद फिलहाल जान-माल के किसी बड़े नुकसान की कोई तात्कालिक सूचना प्राप्त नहीं हुई है।
भूकंप की इस प्राकृतिक आपदा के बीच मणिपुर एक गंभीर मानवीय और राजनीतिक संकट से भी जूझ रहा है। राज्य में पिछले कई महीनों से जारी हिंसा और हत्याओं का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है। हाल ही में संदिग्ध उपद्रवियों द्वारा दो मासूम बच्चों और कुछ नागरिकों की हत्या के बाद राज्य का माहौल फिर से तनावपूर्ण हो गया है। अधिकारियों के अनुसार, इन हत्याओं के विरोध में विभिन्न स्थानीय संगठनों द्वारा बुलाए गए बंद के कारण सोमवार से ही कई जिलों में सामान्य गतिविधियां ठप पड़ी हुई हैं।
मणिपुर की राजधानी इम्फाल सहित घाटी के पांचों जिलों और नागा बहुल उखरुल व सेनापति जिलों में पूर्ण बंद का असर देखा जा रहा है। स्कूल, कॉलेज, कार्यालय और बाजार पूरी तरह बंद हैं। सड़कों से सार्वजनिक परिवहन नदारद है, जिससे आम जनता को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। विशेष रूप से महिलाओं के समूह ‘मीरा पैबिस’ ने 7 अप्रैल को बिष्णुपुर जिले के ट्रोंगलाओबी में हुए कायराना बम हमले के विरोध में पांच दिवसीय बंद का आह्वान किया है। इस हमले में सोते समय एक पांच वर्षीय बालक और उसकी छह माह की बहन की मौत हो गई थी।
मासूम बच्चों की मौत के बाद भड़की जनता का आक्रोश हिंसक रूप ले चुका है। विरोध प्रदर्शनों के दौरान उत्तेजित भीड़ ने पास के एक सीआरपीएफ (CRPF) शिविर पर धावा बोलने का प्रयास किया, जिसे रोकने के लिए सुरक्षा बलों को जवाबी कार्रवाई और गोलीबारी करनी पड़ी। इस हिंसक झड़प में तीन लोगों की मौत हो गई और लगभग 30 अन्य घायल हो गए। राज्य के उरीपोक और नागरम जैसे इलाकों में लगातार विरोध रैलियां निकाली जा रही हैं, जिससे सुरक्षा बलों के लिए कानून-व्यवस्था बनाए रखना एक बड़ी चुनौती बन गया है।
भूकंप के बाद स्थानीय प्रशासन और आपदा प्रबंधन टीमें अलर्ट मोड पर हैं, ताकि किसी भी संभावित ‘आफ्टरशॉक’ या मलबे से होने वाली क्षति का आकलन किया जा सके। वहीं, जातीय संघर्ष को रोकने के लिए अतिरिक्त सुरक्षा बलों की तैनाती की गई है। मणिपुर इस समय एक ऐसे दोराहे पर खड़ा है जहां एक तरफ उसे कुदरत की अनिश्चितता का सामना करना पड़ रहा है, तो दूसरी तरफ आंतरिक कलह और हिंसा राज्य की जड़ों को खोखला कर रही है। शांति बहाली के प्रयास फिलहाल विफल साबित हो रहे हैं, जिससे आम नागरिक खौफ के साये में जीने को मजबूर हैं।
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