Manipur Violence
Manipur Violence: मणिपुर के उखरुल जिले में शांति बहाली की कोशिशों को एक बार फिर बड़ा झटका लगा है। शुक्रवार की सुबह जिला दो अलग-अलग हिंसक वारदातों से दहल उठा, जिसमें तीन लोगों की जान चली गई। कुकी और नागा जनजातीय समुदायों के सशस्त्र समूहों के बीच हुई इस ताजा झड़प ने इलाके में तनाव को चरम पर पहुंचा दिया है। हिंसा के दौरान न केवल गोलियां चलीं, बल्कि उन्मादी भीड़ ने कई घरों को आग के हवाले कर दिया, जिससे ग्रामीण क्षेत्रों में दहशत का माहौल व्याप्त है।
हिंसा की पहली बड़ी घटना उखरुल जिले के मुल्लम गांव के पास घटित हुई। आधिकारिक सूत्रों के अनुसार, शुक्रवार सुबह करीब 5:30 बजे तांगखुल नागा बहुल क्षेत्र में स्थित मुल्लम गांव में सशस्त्र समूहों के बीच आमने-सामने की भारी गोलीबारी शुरू हुई। इस संघर्ष के दौरान गांव के बाहरी हिस्से में बने कई रिहायशी मकानों को फूंक दिया गया। सुरक्षाबलों ने घटनास्थल पर पहुंचकर मोर्चा संभाला और पूर्वाह्न लगभग 11:25 बजे दो शव बरामद किए। मृतकों की पहचान एल. सितल्हौ और पी. हाओलाई के रूप में हुई है। गौर करने वाली बात यह है कि दोनों ही मृतक छलावरण (कैमोफ्लाज) वर्दी में पाए गए, जो उग्रवादी संगठनों या ग्राम स्वयंसेवकों से जुड़े होने का संकेत देते हैं।
इस घटना के बाद कुकी ऑर्गेनाइजेशन फॉर ह्यूमन राइट्स ट्रस्ट ने कड़ा रुख अपनाया है। संगठन ने मुल्लम और सोंगफल गांवों में हुई दो “ग्राम स्वयंसेवकों” की हत्या और घरों को जलाए जाने की घटना की कड़ी निंदा की है। उन्होंने इसे निर्दोषों पर लक्षित हमला करार देते हुए प्रशासन से मांग की है कि इस मामले में तुरंत प्राथमिकी (FIR) दर्ज की जाए। संगठन ने केंद्र और राज्य सरकार से अपील की है कि हिंसा के दोषियों को पकड़ने के लिए एक समयबद्ध और निष्पक्ष जांच समिति का गठन किया जाए, ताकि पीड़ितों को न्याय मिल सके।
उखरुल के सिनाकेइथेई गांव के पास एक और दुखद घटना सामने आई, जहां सशस्त्र उग्रवादियों ने घात लगाकर हमला किया। इस हमले में कामजोंग जिले के चत्रिक खुल्लेन गांव के निवासी 29 वर्षीय एच. जमंग की मौके पर ही मौत हो गई। हमले के दौरान चार अन्य ग्राम स्वयंसेवक भी गंभीर रूप से घायल हो गए, जिन्हें उपचार के लिए नजदीकी अस्पताल ले जाया गया है। इस घटना ने क्षेत्र में सुरक्षा व्यवस्था पर सवालिया निशान लगा दिए हैं, क्योंकि सुरक्षाबलों की मौजूदगी के बावजूद उग्रवादी जंगल के रास्तों का फायदा उठाकर हिंसक घटनाओं को अंजाम दे रहे हैं।
एच. जमंग की हत्या पर तांगखुल नागा समुदाय की शीर्ष संस्था ‘तांगखुल नागा लॉन्ग’ ने गहरा शोक प्रकट किया है। संस्था ने अपने आधिकारिक बयान में स्पष्ट किया कि सिराराखोंग और सिनाकेइथेई क्षेत्रों में बाहरी दखल और लगातार बढ़ रही बाधाओं के कारण ही नागा ग्राम रक्षकों को गश्त पर तैनात किया गया था। तांगखुल संगठनों ने इस घातक हमले के लिए सीधे तौर पर कुकी उग्रवादियों को जिम्मेदार ठहराया है। दूसरी ओर, कुकी संगठनों ने इन आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया है और किसी भी प्रकार की संलिप्तता से इनकार किया है। दोनों समुदायों के बीच एक-दूसरे पर लगाए जा रहे आरोपों ने स्थिति को और अधिक जटिल बना दिया है।
ताजा झड़पों में केवल पुरुषों की जान ही नहीं गई, बल्कि महिलाओं सहित कम से कम पांच अन्य कुकी ग्रामीण भी घायल हुए हैं। आगजनी और गोलीबारी के कारण गांवों से पलायन की स्थिति बन रही है। प्रशासन ने पूरे उखरुल जिले में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी है और अतिरिक्त बल तैनात किए गए हैं। ड्रोन और तकनीकी उपकरणों की मदद से संवेदनशील क्षेत्रों की निगरानी की जा रही है। सुरक्षा अधिकारियों का कहना है कि उनकी प्राथमिकता स्थिति को नियंत्रण में रखना और समुदायों के बीच बातचीत के जरिए तनाव को कम करना है, ताकि हिंसा का यह दौर और अधिक न फैले।
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