Manipur Violence : मणिपुर में हिंसा का एक और मामला सामने आया है। शनिवार को सेनापति जिले के नागा बहुल कलाजन गांव में संदिग्ध उग्रवादियों ने गोलीबारी कर दो नगा नागरिकों की हत्या कर दी। इस हमले में दो अन्य लोग भी गोली लगने से घायल हुए हैं। घटना दोपहर करीब तीन बजे की बताई जा रही है। वारदात के बाद इलाके में तनाव का माहौल बन गया और सुरक्षा एजेंसियों ने घटनास्थल से जुड़ी जानकारी जुटानी शुरू कर दी।
पहले दूसरे जिले में बताई गई थी घटना
अधिकारियों ने शुरुआती जानकारी में इस घटना को कांगपोकपी जिले के कालेनजांग गांव से जुड़ा बताया था। हालांकि, विस्तृत रिपोर्ट सामने आने के बाद घटना का स्थान सेनापति जिले का कलाजन गांव बताया गया। अधिकारियों के अनुसार, हमले में रॉकी माओ और कुमार पोउमई की मौत हुई है। वहीं 33 वर्षीय अदानी मैनियो और 49 वर्षीय आशिहो सानी गोली लगने से घायल हुए हैं।
घायलों का निजी अस्पताल में चल रहा इलाज
गोलीबारी में घायल दोनों लोगों को उपचार के लिए सेनापति जिले के एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया है। उनकी चिकित्सा निगरानी जारी है। दूसरी ओर, दोनों मृतकों के शवों को पोस्टमार्टम के लिए सेनापति जिला अस्पताल भेजा गया है। पुलिस और प्रशासन घटना से जुड़े तथ्यों की जांच कर रहे हैं। फिलहाल हमले के पीछे कौन लोग थे, इसे लेकर आधिकारिक तौर पर अंतिम निष्कर्ष सामने नहीं आया है।
मुख्यमंत्री ने घटना को बताया कायराना हिंसा
मणिपुर के मुख्यमंत्री वाई खेमचंद सिंह ने दो नागरिकों की हत्या की निंदा की है। उन्होंने घटना को ‘कायराना हिंसा’ बताया और ऐसी वारदातों पर चिंता जताई। पूर्व मुख्यमंत्री एन. बीरेन सिंह ने भी हत्याओं की निंदा करते हुए राज्य की कानून-व्यवस्था को लेकर सवाल उठाए। उन्होंने सोशल मीडिया पोस्ट में दावा किया कि इस वर्ष मणिपुर में 60 से अधिक हत्याएं हो चुकी हैं।
बीरेन सिंह ने कानून-व्यवस्था पर उठाए सवाल
एन. बीरेन सिंह ने दावा किया कि रॉकी माओ और कुमार पोउमई अपने-अपने गांवों के निवासी थे और कथित तौर पर सशस्त्र हमलावर उनके घरों में घुसे थे। उन्होंने कहा कि दोनों को सोते समय गोली मारे जाने की जानकारी सामने आई है। बीरेन सिंह ने सवाल उठाया कि राज्य में लोगों की जान जाने का सिलसिला कब तक जारी रहेगा और इन घटनाओं के लिए जिम्मेदार लोगों को कब जवाबदेह बनाया जाएगा।
आर्थिक नाकेबंदी हटाने के फैसले के बीच वारदात
यह गोलीबारी उस समय हुई जब यूनाइटेड नागा काउंसिल यानी UNC ने राष्ट्रीय राजमार्गों पर करीब चार महीने से जारी आर्थिक नाकेबंदी को निलंबित करने का फैसला घोषित किया था। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, नाकेबंदी निलंबित करने की घोषणा और गोलीबारी की घटना के बीच करीब एक घंटे का अंतर था। ऐसे समय हुई हिंसा ने इलाके की सुरक्षा स्थिति को लेकर चिंता बढ़ा दी है।
24 सितंबर को भी चार लोगों की हुई थी हत्या
इससे पहले 24 सितंबर की रात कांगपोकपी जिले से सटे अंतरराष्ट्रीय सीमा क्षेत्र के पास कामजोंग जिले के पिलोंग गांव में चार तांगखुल नागा नागरिकों की गोली मारकर हत्या की गई थी। उस हमले के संबंध में भी म्यांमार से आए संदिग्ध उग्रवादियों की भूमिका का आरोप लगाया गया था। हालांकि, ऐसे आरोपों की जांच और आधिकारिक पुष्टि अलग प्रक्रिया का विषय है।
सितंबर में कई जिलों में हुई हिंसा
अधिकारियों के अनुसार, सितंबर महीने में मणिपुर के कई जिलों में अलग-अलग गोलीबारी की घटनाएं सामने आई हैं। तामेंगलोंग, कांगपोकपी, नोनी और कामजोंग जिलों में हुए अलग-अलग हमलों में कम से कम 13 लोगों की मौत होने की जानकारी दी गई है। सेनापति की ताजा घटना ने राज्य में सुरक्षा और कानून-व्यवस्था को लेकर जारी चिंताओं को फिर सामने ला दिया है। प्रशासन अब मामले की जांच और क्षेत्र में सुरक्षा व्यवस्था पर नजर बनाए हुए है।
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