ECI Row : चुनाव आयोग की 26 सितंबर 2026 को हुई अहम बैठक और उसके बाद जारी आधिकारिक बयान को लेकर भारतीय जनता पार्टी ने कांग्रेस पर निशाना साधा है। बीजेपी के राष्ट्रीय प्रवक्ता संबित पात्रा ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि आयोग की ओर से स्थिति स्पष्ट किए जाने के बाद SIR को लेकर उठाए जा रहे सवालों पर तथ्य सामने आ गए हैं। उन्होंने कांग्रेस और राहुल गांधी की ओर से चुनाव आयोग को लेकर लगाए जा रहे आरोपों पर भी सवाल उठाए।
संबित पात्रा ने कांग्रेस पर लगाए राजनीतिक आरोप
संबित पात्रा ने कहा कि कांग्रेस की ओर से चुनाव आयोग और संवैधानिक संस्थाओं पर लगातार सवाल उठाए जा रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस का उद्देश्य सत्ता हासिल करना है और इसी वजह से वह चुनावी संस्थाओं को निशाना बना रही है। हालांकि, ये संबित पात्रा और बीजेपी की राजनीतिक टिप्पणियां हैं, जिन्हें उनके बयान के संदर्भ में ही देखा जाना चाहिए।
SIR पर सर्वसम्मति को लेकर बीजेपी का दावा
बीजेपी प्रवक्ता ने कहा कि विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR को लेकर चुनाव आयोग के तीनों आयुक्तों के बीच अंतिम निर्णय पर सहमति रही है। चुनाव आयोग भी अपने आधिकारिक स्पष्टीकरण में कह चुका है कि पिछले एक साल में आयोग के फैसले पूर्ण आयोग द्वारा सर्वसम्मति से लिए गए। साथ ही आयोग ने कहा है कि विचार-विमर्श के दौरान अलग-अलग सुझाव या टिप्पणियां आना निर्णय प्रक्रिया का हिस्सा हो सकता है।
सुप्रीम कोर्ट के फैसले का भी दिया हवाला
संबित पात्रा ने अपने बयान में 27 मई 2026 के सुप्रीम कोर्ट के फैसले का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि SIR की कानूनी वैधता को लेकर सुप्रीम कोर्ट के रुख को भी ध्यान में रखा जाना चाहिए। इससे पहले बीजेपी ने SIR प्रक्रिया को कानूनी रूप से वैध बताते हुए चुनाव आयोग के निर्णयों का बचाव किया था। हालांकि, SIR को लेकर राजनीतिक और सार्वजनिक बहस अभी भी जारी है।
आयोग में कथित आपत्तियों पर भी जारी है विवाद
दरअसल, SIR विवाद की पृष्ठभूमि में इंडियन एक्सप्रेस की एक जांच रिपोर्ट सामने आई थी, जिसमें दावा किया गया कि चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने करीब 10 महीनों में कुछ फैसलों और प्रशासनिक निर्देशों को लेकर कम से कम 14 बार आपत्तियां दर्ज की थीं। रिपोर्ट में SIR से जुड़े प्रशासनिक और मतदाता सूची संबंधी मुद्दों का उल्लेख किया गया था।
चुनाव आयोग ने मतभेदों को बताया विचार-विमर्श का हिस्सा
रिपोर्ट के बाद चुनाव आयोग ने अपने रुख में कहा कि अलग-अलग विचार या सुझाव किसी बहु-सदस्यीय संवैधानिक संस्था की सामान्य कार्यप्रणाली का हिस्सा हैं। आयोग के अनुसार, अंतिम निर्णय सर्वसम्मति से लिए गए। बीजेपी ने इसी स्पष्टीकरण को आधार बनाकर विपक्ष के आरोपों पर सवाल उठाए हैं। वहीं, विपक्षी दल आयोग से कथित आपत्तियों और निर्णय प्रक्रिया को लेकर और स्पष्टीकरण मांग रहे हैं।
कांग्रेस और विपक्ष ने उठाए हैं कई सवाल
SIR को लेकर विपक्षी दलों ने चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए हैं। राहुल गांधी ने 24 सितंबर को मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग की थी। इसके बाद कांग्रेस ने कई राज्यों में विरोध प्रदर्शन भी किए। विपक्ष का कहना है कि चुनाव आयोग से जुड़े हालिया घटनाक्रम पर विस्तृत जवाब और पारदर्शिता जरूरी है।
बीजेपी के सहयोगी दलों ने भी मांगा स्पष्टीकरण
इस विवाद के बीच बीजेपी के कुछ सहयोगी दलों ने भी चुनाव आयोग से स्पष्टीकरण की मांग की है। लोक जनशक्ति पार्टी (राम विलास) के चिराग पासवान, तेलुगु देशम पार्टी और राष्ट्रीय लोक मोर्चा की ओर से कहा गया कि आयोग को उठ रहे सवालों पर स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए। इन दलों ने सार्वजनिक भ्रम दूर करने और चुनावी प्रक्रिया को लेकर विश्वास बनाए रखने की जरूरत बताई।
SIR को लेकर राजनीतिक बहस लगातार जारी
चुनाव आयोग की बैठक और उसके बाद जारी बयान से SIR को लेकर चल रही बहस को नया आधार मिला है। एक ओर आयोग अपने निर्णयों को सर्वसम्मत बता रहा है और बीजेपी इसे अपने पक्ष में महत्वपूर्ण स्पष्टीकरण मान रही है। दूसरी ओर कांग्रेस और अन्य विपक्षी दल आयोग की आंतरिक निर्णय प्रक्रिया तथा सामने आई आपत्तियों को लेकर सवाल उठा रहे हैं। ऐसे में SIR और चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर राजनीतिक चर्चा आगे भी जारी रहने के संकेत हैं।
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