PM Modi Japan visit 2025: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 30 अगस्त से 1 सितंबर 2025 तक जापान और चीन के आधिकारिक दौरे पर रहेंगे। विदेश मंत्रालय द्वारा जारी आधिकारिक बयान के अनुसार, इस यात्रा का उद्देश्य भारत के रणनीतिक साझेदारों के साथ द्विपक्षीय संबंधों को सुदृढ़ करना और बहुपक्षीय मंचों पर सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित करना है।

जापान यात्रा: निवेश और रणनीतिक साझेदारी पर चर्चा
प्रधानमंत्री मोदी अपनी यात्रा की शुरुआत 30 अगस्त को जापान से करेंगे। वे टोक्यो में जापान के प्रधानमंत्री फुमियो किशिदा से वार्षिक भारत-जापान शिखर सम्मेलन के अंतर्गत मुलाकात करेंगे। यह सम्मेलन दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय सहयोग को और गहराई देने का एक महत्वपूर्ण अवसर है।

भारत और जापान के बीच आर्थिक, तकनीकी और रक्षा सहयोग को लेकर मजबूत रिश्ते रहे हैं। इस बैठक में विशेष रूप से बुनियादी ढांचे में जापानी निवेश, रक्षा तकनीक हस्तांतरण, सेमीकंडक्टर निर्माण, ग्रीन एनर्जी और डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन जैसे विषयों पर चर्चा की जाएगी। सूत्रों के अनुसार, इस बार एक नई इकोनॉमिक पार्टनरशिप डील पर हस्ताक्षर होने की भी संभावना है।
चीन में SCO बैठक: बहुपक्षीय कूटनीति का मंच
जापान यात्रा के बाद प्रधानमंत्री मोदी 31 अगस्त को चीन के तियानजिन शहर पहुंचेंगे, जहां वे शंघाई सहयोग संगठन (SCO) की उच्चस्तरीय बैठक में भारत का प्रतिनिधित्व करेंगे। SCO एक क्षेत्रीय बहुपक्षीय संगठन है जिसमें भारत, चीन, रूस, पाकिस्तान, और मध्य एशियाई देश शामिल हैं।
इस बैठक में क्षेत्रीय सुरक्षा, आतंकवाद से मुकाबला, आर्थिक सहयोग और संपर्क साधनों को बेहतर बनाने जैसे अहम मुद्दों पर चर्चा होगी। मोदी की यह यात्रा ऐसे समय पर हो रही है जब भारत और चीन के बीच सीमा विवादों को लेकर तनाव बना हुआ है। हालांकि, इस मंच के जरिए दोनों देशों के नेताओं के बीच संवाद की संभावनाएं बनी हुई हैं।
रणनीतिक दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण यात्रा
विशेषज्ञों के अनुसार यह दौरा भारत की ‘एक्ट ईस्ट पॉलिसी’ और ‘वसुधैव कुटुम्बकम्’ की भावना को मजबूत करने की दिशा में एक अहम कदम है। जापान के साथ मजबूत होते आर्थिक रिश्ते और SCO में सक्रिय भागीदारी भारत की वैश्विक कूटनीतिक भूमिका को और मजबूत कर रहे हैं।
प्रधानमंत्री मोदी की यह एशियाई यात्रा न केवल द्विपक्षीय संबंधों को प्रगाढ़ करने का अवसर है, बल्कि वैश्विक और क्षेत्रीय चुनौतियों के समाधान के लिए भारत की सक्रिय भूमिका को भी दर्शाती है। निवेश, सुरक्षा और सहयोग के नए द्वार खुलने की उम्मीद के साथ यह दौरा अंतरराष्ट्रीय मंच पर भारत की स्थिति को और मजबूती प्रदान कर सकता है।










