अंतरराष्ट्रीय

Masood Azhar: मौत की कगार पर आतंकी मसूद अजहर? ISI ने अस्पताल के बजाय बंकर में किया शिफ्ट

Masood Azhar: भारत के सबसे बड़े दुश्मनों में से एक और जैश-ए-मोहम्मद के सरगना मसूद अजहर को लेकर एक बड़ी खबर सामने आ रही है। ताजा जानकारी के मुताबिक, इस मोस्ट वांटेड आतंकी की सेहत बेहद खराब हो चुकी है और वह अपनी जिंदगी की आखिरी घड़ियां गिन रहा है। पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी ISI ने इस खबर को पूरी दुनिया से छिपाने के लिए मसूद को एक बेहद गुप्त सुरक्षित ठिकाने पर भेज दिया है।

मरकज से मिलिट्री बंकर तक का गोपनीय सफर

पूर्व रॉ (RAW) एजेंट लकी बिष्ट ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (X) पर एक सनसनीखेज दावा किया है। उनके अनुसार, मसूद अजहर की स्थिति इतनी नाजुक है कि उसे सामान्य अस्पताल या उसके पुराने ठिकाने ‘मरकज’ में रखना संभव नहीं था। सुरक्षा और गोपनीयता को ध्यान में रखते हुए, ISI ने उसे बहावलपुर कैंट के एक सीक्रेट मिलिट्री बंकर में शिफ्ट कर दिया है। बताया जा रहा है कि इस ऑपरेशन की कमान खुद ISI के सेकंड-इन-कमांड मेजर जनरल फैसल नसीर ने संभाली थी, जो इस बात का संकेत है कि पाकिस्तान के लिए मसूद अजहर आज भी कितना महत्वपूर्ण है।

आतंकियों का मनोबल टूटने का डर और ‘पुराने वीडियो’ का सहारा

मसूद अजहर जैश-ए-मोहम्मद का चेहरा है। अगर उसकी मौत या गंभीर बीमारी की खबर सार्वजनिक होती है, तो जैश के नए रंगरूटों और कैडर्स का मनोबल पूरी तरह टूट सकता है। संगठन के भीतर मची खलबली को शांत करने के लिए एक अजीबोगरीब पैंतरा अपनाया जा रहा है। आतंकियों को मसूद के पुराने रिकॉर्डेड वीडियो दिखाए जा रहे हैं ताकि उन्हें यह अहसास कराया जा सके कि उनका आका अभी जीवित और सक्रिय है। यह पूरी कवायद जैश के भीतर संभावित विद्रोह या बिखराव को रोकने के लिए की जा रही है।

पाकिस्तानी मीडिया पर ISI का ‘सख्त पहरा’

पाकिस्तान की मीडिया में इस खबर को लेकर पूरी तरह ‘ब्लैकआउट’ है। लकी बिष्ट के मुताबिक, ISI ने सभी स्थानीय न्यूज़ रूम्स को सख्त हिदायत दी है कि जैश के नेतृत्व या मसूद अजहर की सेहत पर कोई भी खबर न चलाई जाए। इसे एक ‘रेड लाइन’ घोषित किया गया है, जिसे पार करने का मतलब सीधा मौत या सख्त सजा है। पाकिस्तान दुनिया के सामने यह जाहिर नहीं होने देना चाहता कि वह अभी भी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर घोषित आतंकवादियों को सैन्य सुरक्षा प्रदान कर रहा है।

मसूद अजहर: मदरसे के छात्र से आतंकी सरगना तक

मसूद अजहर का जन्म 1968 में बहावलपुर में हुआ था। उसके पिता एक सरकारी स्कूल के हेडमास्टर थे, लेकिन मसूद ने मुख्यधारा की शिक्षा छोड़ मदरसे की राह चुनी। 1989 में स्नातक करने के बाद वह ‘हरकत-उल-अंसार’ (HUA) से जुड़ गया। अपनी वाकपटुता के कारण वह जल्द ही आतंकियों की भर्ती करने और चंदा जुटाने का मुख्य चेहरा बन गया।

IC-814 हाईजैक और भारत की मजबूरी

1994 में भारतीय सेना ने मसूद को अनंतनाग से गिरफ्तार किया था। उसे सलाखों के पीछे रखने के लिए भारत ने कड़ा संघर्ष किया, लेकिन 1999 में आतंकियों ने इंडियन एयरलाइंस की फ्लाइट IC-814 को हाईजैक कर लिया। 178 यात्रियों की जान बचाने के बदले भारत को विवश होकर मसूद अजहर को कंधार (अफगानिस्तान) ले जाकर छोड़ना पड़ा। रिहा होने के बाद उसने जैश-ए-मोहम्मद का गठन किया और संसद हमले से लेकर पुलवामा तक भारत के खिलाफ कई खूनी साजिशें रचीं। अब उसकी नाजुक हालत ने एक बार फिर खुफिया गलियारों में हलचल पैदा कर दी है।

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