Bijapur Naxals Surrender: बस्तर के बीजापुर जिले में दशहरे के मौके पर माओवादियों को बड़ा झटका लगा है। यहां 103 नक्सलियों ने सामूहिक आत्मसमर्पण किया है, जिसमें 23 महिला नक्सली भी शामिल हैं। यह आत्मसमर्पण माओवादी संगठन के लिए एक गंभीर संकट को दर्शाता है, साथ ही सुरक्षा बलों और सरकार की पुनर्वास नीति की सफलता को भी उजागर करता है।

आत्मसमर्पण करने वालों में ऐसे 49 नक्सली शामिल हैं, जिन पर कुल मिलाकर 1 करोड़ 23 लाख रुपये का इनाम घोषित था। यह आंकड़ा माओवादी संगठन की कमर तोड़ने वाला माना जा रहा है। आत्मसमर्पण करने वालों में 1 डीवीसीएम (डिवीजनल कमांडर), 4 पीपीसीएम (पार्टी प्लाटून कमांडर), 4 एसीएम (एरिया कमेटी सदस्य), 5 मिलिशिया कमांडर/डिप्टी कमांडर, 12 सीएनएम (कम्पाउंडर/नौकरी सदस्य), 22 जनताना सरकार सदस्य, और 23 मिलिशिया प्लाटून सदस्य शामिल हैं। यह स्थिति माओवादी संगठन के अंदर बड़े पैमाने पर असंतोष और मतभेद को दर्शाती है।

सरकार की पुनर्वास नीति और क्षेत्र में तेजी से हो रहे विकास कार्यों को इस आत्मसमर्पण के पीछे मुख्य कारण माना जा रहा है। नक्सलियों ने आत्मसमर्पण के साथ ही सरकार की ओर से दी जा रही सहायता राशि 50,000 रुपये भी स्वीकार की है। यह कदम न केवल सुरक्षा बलों के लिए बड़ी सफलता है, बल्कि माओवादी गुटों के भीतर विभाजन और कमजोरी का भी संकेत है।
2024 की शुरुआत से अब तक की मुठभेड़ों का आंकड़ा भी इस दिशा में महत्वपूर्ण है। जनवरी से लेकर अब तक 924 माओवादियों को गिरफ्तार किया गया है, जबकि 599 नक्सलियों ने आत्मसमर्पण किया और 195 माओवादी मुठभेड़ों में मारे गए। इससे यह साफ दिखता है कि बस्तर क्षेत्र में नक्सलियों का प्रभाव तेजी से कम हो रहा है।
यह घटना खासतौर पर महत्वपूर्ण इसलिए भी है क्योंकि केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह बस्तर के दशहरे उत्सव में शामिल होने के लिए जल्द ही वहां आने वाले हैं। माओवादी संगठन की इस बड़ी संख्या में आत्मसमर्पण को उनकी यात्रा की सफलता माना जा रहा है। इससे बस्तर में शांति और विकास की प्रक्रिया और मजबूत होगी।










