Amit Shah on Gandhi: खादी और स्वदेशी को लेकर बोले अमित शाह, गांधी विचारों की दिलाई याद

Amit Shah on Gandhi: केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने महात्मा गांधी की जयंती पर उनके योगदान को याद करते हुए कहा कि गांधीजी ने न केवल भारत की आत्मा को पहचाना, बल्कि खादी और स्वदेशी के माध्यम से देशवासियों को जागरूक कर आजादी के आंदोलन में खड़ा किया। उन्होंने यह भी कहा कि गांधीजी की दी हुई खादी की विरासत को लंबे समय तक भुला दिया गया था, लेकिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में उसे फिर से राष्ट्रव्यापी आंदोलन का रूप दिया गया है।

Amit Shah on Gandhi: केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने महात्मा गांधी की जयंती पर उनके योगदान को याद करते हुए कहा कि गांधीजी ने न केवल भारत की आत्मा को पहचाना, बल्कि खादी और स्वदेशी के माध्यम से देशवासियों को जागरूक कर आजादी के आंदोलन में खड़ा किया। उन्होंने यह भी कहा कि गांधीजी की दी हुई खादी की विरासत को लंबे समय तक भुला दिया गया था, लेकिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में उसे फिर से राष्ट्रव्यापी आंदोलन का रूप दिया गया है।

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गांधीजी ने खादी को बनाया आंदोलन का प्रतीक

अमित शाह ने कहा, “महात्मा गांधी ने जब अंग्रेजों के खिलाफ स्वतंत्रता संग्राम की शुरुआत की, तब उन्होंने खादी और स्वदेशी को हथियार बनाया। उस समय भारत अंग्रेजी कपड़ा मिलों के उत्पादों का बड़ा बाजार था, जिससे स्वदेशी उद्योगों को नुकसान हुआ। लेकिन गांधीजी ने देश को खादी और स्वदेशी की ताकत से जोड़ा और न केवल आंदोलन को जन-जन तक पहुंचाया, बल्कि लाखों गरीबों को भी रोजगार दिया।”

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लंबे समय तक उपेक्षित रही खादी

स्वतंत्रता के बाद खादी और स्वदेशी की भावना धीरे-धीरे कमजोर होती गई। शाह ने कहा कि दशकों तक खादी केवल एक सरकारी संस्थान तक सीमित रह गई थी, जिससे लोगों का लगाव टूटता गया। लेकिन 2003 में गुजरात के मुख्यमंत्री रहते हुए नरेंद्र मोदी ने खादी को फिर से जनांदोलन बनाने का बीड़ा उठाया और राज्य में व्यापक स्तर पर अभियान शुरू किया।

2014 के बाद खादी उद्योग में ऐतिहासिक वृद्धि

अमित शाह ने बताया कि 2014 में नरेंद्र मोदी के प्रधानमंत्री बनने के बाद खादी को एक बार फिर राष्ट्रीय गौरव के प्रतीक के रूप में प्रस्तुत किया गया। इसके परिणामस्वरूप खादी का कारोबार सैकड़ों गुना बढ़ा है। उन्होंने कहा, “आज खादी का कारोबार 1.7 अरब रुपये तक पहुंच गया है। यह केवल एक आर्थिक उपलब्धि नहीं, बल्कि सांस्कृतिक पुनर्जागरण का प्रतीक है।”

खादी बन रही है युवाओं की पसंद

आज की पीढ़ी भी खादी को फैशन और पहचान के रूप में अपना रही है। खादी अब केवल एक परंपरा नहीं, बल्कि आधुनिकता और आत्मनिर्भरता का प्रतीक बन चुकी है। सरकार के ‘वोकल फॉर लोकल’ अभियान और आत्मनिर्भर भारत की अवधारणा में खादी की भूमिका केंद्रीय बनी हुई है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के बयान से स्पष्ट है कि महात्मा गांधी द्वारा शुरू की गई खादी और स्वदेशी की परंपरा को आज नरेंद्र मोदी सरकार ने नई दिशा और ऊर्जा दी है। खादी अब केवल कपड़े का नाम नहीं, बल्कि आत्मनिर्भर भारत की आत्मा बन गई है। गांधीजी की सोच और मोदी सरकार की नीतियों का संगम आज खादी को वैश्विक स्तर पर नई पहचान दिला रहा है।

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