ADF Attack Congo: पूर्वी कांगो में इस्लामिक स्टेट से जुड़े विद्रोही समूह एलाइड डेमोक्रेटिक फोर्स (ADF) ने मंगलवार रात को भयानक हमला किया, जिसमें कम से कम 60 लोगों की निर्मम हत्या कर दी गई। यह हमला उस समय हुआ जब लोग एक अंतिम संस्कार में शामिल होने के लिए इकट्ठा हुए थे।
एक प्रत्यक्षदर्शी ने घटना का दर्दनाक विवरण देते हुए बताया, “लगभग दस हमलावर थे। उनके पास माचेट (बड़े चाकू) थे। उन्होंने सभी को एक जगह इकट्ठा किया और फिर बेरहमी से काटना शुरू कर दिया। मैंने लोगों को चीखते हुए सुना और घबराहट में बेहोश हो गई।”
लुबेरो क्षेत्र के प्रशासक कर्नल एलन किवेवा ने बताया कि मृतकों की संख्या 60 के आसपास है, लेकिन अभी अंतिम आंकड़ा आना बाकी है। उन्होंने कहा, “हमने राहत व बचाव टीमें भेजी हैं जो घटनास्थल पर मौजूद हैं और पीड़ितों की पहचान और गिनती कर रही हैं।”
इसी दिन कांगो के बेनी क्षेत्र में भी ADF ने एक और हमला किया, जिसमें 18 लोगों की जान चली गई। ADF, जो कि इस्लामिक स्टेट से 2019 में जुड़ चुका है, कांगो-युगांडा सीमा क्षेत्र में लंबे समय से सक्रिय है और नागरिकों को निशाना बना रहा है।
इससे पहले जुलाई में इतुरी प्रांत में ADF ने दो बड़े हमलों को अंजाम दिया था, जिनमें क्रमशः 34 और 66 लोग मारे गए थे। यह घटनाएं इस बात की ओर इशारा करती हैं कि क्षेत्र में सुरक्षा की स्थिति बेहद गंभीर बनी हुई है।
संयुक्त राष्ट्र के मानवाधिकार आयुक्त वोल्कर तुर्क ने ADF की बढ़ती हिंसा पर चिंता जताई है। उन्होंने कहा, “क्षेत्र में सुरक्षा बलों की कमजोर मौजूदगी और निगरानी की कमी का फायदा उठाकर ADF जैसे चरमपंथी संगठन आम नागरिकों को निशाना बना रहे हैं। स्थानीय लोग डर और अनिश्चितता के माहौल में जी रहे हैं।”
ADF के अलावा, पूर्वी कांगो में रवांडा समर्थित M23 विद्रोही संगठन भी सक्रिय है, जो कांगो सरकार के साथ सीधे टकराव में है। क्षेत्र में चल रही हिंसा और विद्रोही गतिविधियों के चलते लाखों लोग विस्थापन और मानवीय संकट का सामना कर रहे हैं।
हालांकि कांगो और युगांडा की सेनाएं ADF के खिलाफ मिलकर अभियान चला रही हैं, लेकिन अब तक के प्रयास नाकाफी साबित हो रहे हैं। लगातार हो रहे हमले इस बात की गवाही देते हैं कि चरमपंथियों की पकड़ अब भी मजबूत है और आम नागरिक सबसे अधिक इसकी चपेट में हैं। पूर्वी कांगो में ADF का आतंक थमने का नाम नहीं ले रहा है। लगातार हो रहे हमलों में सैकड़ों निर्दोष लोग अपनी जान गंवा चुके हैं। यदि जल्द ही अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ठोस कार्रवाई नहीं की गई, तो यह मानवीय संकट और गहराता चला जाएगा।
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