Mayawati Reaction
Mayawati Reaction: देश में महिला आरक्षण कानून के लागू होने के साथ ही राजनीतिक सरगर्मियां तेज हो गई हैं। केंद्र सरकार द्वारा 33 प्रतिशत महिला आरक्षण की अधिसूचना जारी किए जाने के बाद बहुजन समाज पार्टी (बसपा) की राष्ट्रीय अध्यक्ष मायावती ने विपक्षी दलों और सत्ता पक्ष पर कड़ा प्रहार किया है। मायावती ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (X) के जरिए सात महत्वपूर्ण बिंदुओं में अपनी विस्तृत प्रतिक्रिया साझा की। उन्होंने कांग्रेस, समाजवादी पार्टी और भारतीय जनता पार्टी पर दोहरा चरित्र अपनाने का आरोप लगाते हुए पिछड़ों और दलितों को इन पार्टियों से सावधान रहने की नसीहत दी है।
मायावती ने अपने पहले बिंदु में कांग्रेस पार्टी को आड़े हाथों लिया। उन्होंने कहा कि आज जो कांग्रेस महिला आरक्षण के भीतर एससी, एसटी और ओबीसी (SC, ST, OBC) कोटे की वकालत कर रही है, वह वास्तव में गिरगिट की तरह रंग बदल रही है। बसपा प्रमुख के अनुसार, जब केंद्र में लंबे समय तक कांग्रेस की सरकार थी, तब उन्होंने कभी भी इन वर्गों के आरक्षण कोटे को पूरा करने की दिशा में कोई ठोस कदम नहीं उठाया। उन्होंने कांग्रेस की नीयत पर सवाल उठाते हुए कहा कि सत्ता में रहते हुए उन्होंने दलितों और पिछड़ों के अधिकारों की अनदेखी की और अब केवल राजनीतिक लाभ के लिए सहानुभूति जता रहे हैं।
बसपा चीफ ने याद दिलाया कि ओबीसी समाज के लिए मंडल कमीशन की रिपोर्ट के आधार पर 27 प्रतिशत आरक्षण लागू करने में कांग्रेस की कोई भूमिका नहीं थी। उन्होंने दावा किया कि यह बहुजन समाज पार्टी के अथक संघर्षों का ही परिणाम था कि तत्कालीन वीपी सिंह सरकार ने इसे लागू किया। मायावती ने स्पष्ट किया कि कांग्रेस और अन्य बड़े दलों ने हमेशा पिछड़ों के अधिकारों को दबाने का काम किया है, जबकि बसपा ने हमेशा इन वर्गों के संवैधानिक और कानूनी अधिकारों के लिए लड़ाई लड़ी है।
मायावती ने उत्तर प्रदेश की राजनीति का जिक्र करते हुए समाजवादी पार्टी (सपा) पर भी गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि जुलाई 1994 में पिछड़े मुस्लिमों को ओबीसी का लाभ देने की रिपोर्ट आई थी, लेकिन तत्कालीन सपा सरकार ने उसे ठंडे बस्ते में डाल दिया था। बसपा प्रमुख ने कहा कि जब 3 जून 1995 को उनकी सरकार बनी, तब उन्होंने इसे तुरंत लागू किया। उन्होंने सपा को ‘जातिवादी और तिरस्कारी’ मानसिकता वाली पार्टी बताते हुए कहा कि जब सपा सत्ता में नहीं होती है तो कुछ और कहती है, लेकिन सरकार में रहते हुए उसका रवैया हमेशा संकीर्ण रहता है।
महिला आरक्षण के क्रियान्वयन के लिए साल 2011 की जनगणना के आधार पर परिसीमन किए जाने के सवाल पर मायावती ने संतुलित रुख अपनाया। उन्होंने कहा कि यदि किन्हीं कारणों से सरकार इस कानून को जल्दी लागू करना चाहती है, तो इसी पुरानी जनगणना को आधार बनाया जाना चाहिए। उन्होंने यह भी जोड़ा कि अगर आज कांग्रेस सत्ता में होती, तो वह भी भाजपा की तरह ही कदम उठाती, क्योंकि मूल रूप से इन दोनों बड़ी पार्टियों की कार्यशैली और नीतियां एक जैसी ही हैं।
अपने अंतिम बिंदुओं में पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि देश में एससी, एसटी, ओबीसी और मुस्लिम समाज के कल्याण के प्रति कोई भी बड़ी पार्टी गंभीर नहीं रही है। उन्होंने इन वर्गों को सलाह दी कि महिला आरक्षण के रूप में उन्हें फिलहाल जो कुछ भी मिल रहा है, उसे स्वीकार कर लेना चाहिए। मायावती ने आगाह किया कि भविष्य में जब उनकी अपनी ताकत मजबूत होगी, तब इन हितों का सही से ध्यान रखा जाएगा। उन्होंने जनता से आह्वान किया कि वे किसी के बहकावे में न आएं और अपने समाज को आत्मनिर्भर व मजबूत बनाने के लिए खुद अपने पैरों पर खड़े हों।
मायावती ने स्पष्ट कर दिया है कि महिला आरक्षण लागू होने का वह स्वागत करती हैं, लेकिन इसके भीतर पिछड़े वर्गों और अल्पसंख्यकों की अनदेखी पर उनका संघर्ष जारी रहेगा। उन्होंने अपने समर्थकों को राजनीतिक रूप से जागरूक रहने का संदेश दिया है।
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