Political Controversy : मंगलवार शाम को देश की राजधानी दिल्ली स्थित भारत निर्वाचन आयोग (ECI) के मुख्यालय ‘निर्वाचन सदन’ के बाहर उस समय भारी हंगामा और अफरा-तफरी मच गई, जब मध्य प्रदेश की एक राज्यसभा सीट से कांग्रेस उम्मीदवार मीनाक्षी नटराजन का नामांकन फॉर्म खारिज कर दिया गया। समाचार एजेंसियों के मुताबिक, नामांकन पत्र के साथ दाखिल हलफनामे में कथित तौर पर कुछ कानूनी मामलों की जानकारी छिपाने की वजह से यह कार्रवाई की गई। इस फैसले से भड़की कांग्रेस का एक उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल पार्टी महासचिव केसी वेणुगोपाल के नेतृत्व में अपनी शिकायत दर्ज कराने चुनाव आयोग दफ्तर पहुंचा, लेकिन मुख्य गेट पर ही सुरक्षाकर्मियों ने उन्हें अंदर जाने से रोक दिया, जिसके बाद वहां तीखी बहस शुरू हो गई।

सुरक्षा बलों से तीखी नोकझोंक और एंट्री पर विवाद
निर्वाचन सदन के मुख्य द्वार पर तैनात सुरक्षा कर्मियों का तर्क था कि कांग्रेस नेताओं की इस बैठक के संबंध में उन्हें अंदर से कोई आधिकारिक आदेश या सूचना नहीं मिली है। वहीं दूसरी तरफ, कांग्रेस के दिग्गज नेता अंदर जाकर मुख्य चुनाव आयुक्त के समक्ष अपना कानूनी पक्ष और ज्ञापन सौंपना चाहते थे। गेट पर रोके जाने से नाराज कांग्रेस नेताओं और सुरक्षा जवानों के बीच काफी देर तक धक्का-मुक्की और तीखी बहस का दौर चलता रहा। कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने इस पूरी स्थिति पर गहरी नाराजगी जताते हुए आरोप लगाया कि देश की मुख्य विपक्षी पार्टी के नेताओं को जानबूझकर लोकतांत्रिक प्रक्रिया के तहत अपनी बात रखने से रोका जा रहा है, जो बेहद निंदनीय है।

केसी वेणुगोपाल ने कहा “लोकतंत्र की हत्या”
इस पूरे घटनाक्रम को लेकर कांग्रेस संगठन महासचिव केसी वेणुगोपाल ने केंद्र सरकार और चुनाव आयोग पर तीखा हमला बोला। उन्होंने निर्वाचन सदन के बाहर मीडिया से बात करते हुए इस स्थिति को “लोकतंत्र की हत्या” करार दिया। वेणुगोपाल ने कहा कि जब विपक्ष के शीर्ष नेताओं को अपनी जायज शिकायत दर्ज कराने और शांतिपूर्ण ढंग से ज्ञापन सौंपने की अनुमति नहीं दी जा रही है, तो यह देश के लोकतांत्रिक ढांचे के लिए एक गंभीर खतरे की घंटी है। इस प्रतिनिधिमंडल में केसी वेणुगोपाल और जयराम रमेश के साथ छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल और राजस्थान के पूर्व उपमुख्यमंत्री सचिन पायलट समेत कई अन्य वरिष्ठ नेता भी शामिल थे।
जयराम रमेश का फूटा गुस्सा
सुरक्षा घेरे के बाहर इंतजार करने पर मजबूर कांग्रेस संचार प्रभारी जयराम रमेश का गुस्सा फूट पड़ा। उन्होंने सोशल मीडिया और मीडिया कैमरों के सामने कहा, “हम यहां कोई विरोध प्रदर्शन करने नहीं, बल्कि एक वैध याचिका सौंपने आए हैं। हमारे उम्मीदवार को गलत तरीके से अयोग्य ठहराया गया है। हम सिर्फ इतना चाहते हैं कि चुनाव आयोग हमारी बात सुने, लेकिन हमें वेटिंग रूम तक में बैठने की इजाजत नहीं दी जा रही है।” रमेश ने आगे कहा कि वे पिछले 35 वर्षों से सार्वजनिक जीवन और संसद का हिस्सा रहे हैं, लेकिन उन्होंने अपने पूरे राजनीतिक करियर में विपक्ष के साथ ऐसा तानाशाही रवैया पहले कभी नहीं देखा।
मुख्यमंत्री मोहन यादव का पलटवार
इस पूरे सियासी घमासान के बीच मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने चुनाव आयोग के इस फैसले का पुरजोर समर्थन किया है। उन्होंने कांग्रेस के आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि नियमों और कानूनों का पालन हर नागरिक और दल को करना पड़ता है। मुख्यमंत्री ने कांग्रेस नेतृत्व को नसीहत दी कि वे अपनी प्रशासनिक और कानूनी गलतियों पर पर्दा डालने के लिए संवैधानिक संस्थाओं पर राजनीति करने के बजाय खुद के भीतर झांकें और आत्मनिरीक्षण करें। मोहन यादव के इस बयान के बाद इस पूरे मामले ने एक बड़े राजनीतिक युद्ध का रूप ले लिया है।
बुधवार को कांग्रेस करेगी भूख हड़ताल
इस घटनाक्रम के बाद मध्य प्रदेश कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी ने मामले को देशव्यापी स्तर पर उठाने का एलान किया है। उन्होंने घोषणा की कि बुधवार को कांग्रेस के सभी विधायक, पदाधिकारी और कार्यकर्ता इस अन्याय के खिलाफ चुनाव आयोग के सामने एक दिवसीय भूख हड़ताल पर बैठेंगे। सूत्रों के हवाले से खबर है कि कांग्रेस के ज्ञापन को चुनाव आयुक्त तक पहुंचा दिया गया है, जिसमें एक आपातकालीन बैठक की मांग की गई है। मंगलवार देर रात इस बैठक की संभावना बेहद कम होने के कारण अब माना जा रहा है कि बुधवार को चुनाव आयोग कांग्रेस के इस प्रतिनिधिमंडल को सुनवाई का समय दे सकता है।
Read More: Orchid Mantis : फूल समझकर पास आए तो मौत पक्की, बेहद खूबसूरत शिकारी ‘ऑर्किड मैंटिस’











