Middle East Great War
Middle East Great War : मिडिल ईस्ट में लंबे समय से जारी खूनी संघर्ष के अब खत्म होने की उम्मीदें काफी बढ़ गई हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के हालिया सोशल मीडिया पोस्ट ने इजरायल और लेबनान के बीच जमी बर्फ पिघलने के संकेत दिए हैं। ट्रंप ने अपने प्लेटफॉर्म ‘ट्रुथ सोशल’ पर लिखा कि इजरायल और लेबनान के बीच तनाव कम करने और बातचीत के लिए जगह बनाने की कोशिश की जा रही है। उन्होंने चुटीले अंदाज में कहा कि दोनों नेताओं को बात किए हुए दशकों बीत गए हैं और अब शांति का समय आ गया है। इस बयान के बाद अंतरराष्ट्रीय समुदाय को उम्मीद है कि हॉर्मुज जलडमरूमध्य जैसे महत्वपूर्ण व्यापारिक मार्ग जल्द ही फिर से खुल सकेंगे और वैश्विक अर्थव्यवस्था को राहत मिलेगी।
शांति की दिशा में दूसरा बड़ा संकेत इजरायल की ओर से आया है। बुधवार को इजरायली कैबिनेट ने लेबनान के साथ संभावित सीजफायर (युद्धविराम) के प्रस्ताव पर विस्तार से चर्चा की। यह चर्चा ऐसे समय में हो रही है जब पिछले छह हफ्तों से इजरायल और ईरान समर्थित हिज्बुल्लाह के बीच भीषण जंग जारी है। फाइनेंशियल टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, लेबनान के अधिकारियों ने भी संकेत दिए हैं कि युद्धविराम का औपचारिक ऐलान किसी भी वक्त हो सकता है। लेबनान में लड़ाई का रुकना शांति वार्ताओं का सबसे जटिल मुद्दा रहा है, जिसके सुलझने से अब ईरान के साथ बातचीत का रास्ता और साफ होता दिख रहा है।
अमेरिका और ईरान के बीच मध्यस्थ की भूमिका निभा रहा पाकिस्तान इस समय कूटनीति के केंद्र में है। पाकिस्तान के सेना प्रमुख फील्ड मार्शल आसिम मुनीर एक उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल के साथ तेहरान पहुंच चुके हैं। उनका उद्देश्य अमेरिका और ईरान के बीच मौजूद मतभेदों को कम करना और यह सुनिश्चित करना है कि सीजफायर की अवधि खत्म होने के बाद जंग दोबारा शुरू न हो। व्हाइट हाउस की प्रेस सचिव कैरोलिन लेविट ने भी पाकिस्तान की भूमिका को “फायदेमंद” बताया है। कयास लगाए जा रहे हैं कि आने वाले वीकेंड में इस्लामाबाद में दोनों देशों के बीच दूसरे दौर की सीधी वार्ता हो सकती है, जिससे किसी ठोस समझौते की उम्मीद जगी है।
ईरान ने भी सकारात्मक संकेत देने शुरू कर दिए हैं। ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने सोशल मीडिया पर पाकिस्तानी सेना प्रमुख का स्वागत करते हुए कहा कि तेहरान क्षेत्र में स्थिरता और शांति बहाली के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। हालांकि पिछले सप्ताह की बातचीत बेनतीजा रही थी, लेकिन आसिम मुनीर की सक्रियता से दोनों पक्षों के बीच अविश्वास की खाई को पाटने की कोशिश की जा रही है। रूस द्वारा दिए गए परमाणु ईंधन संबंधी प्रस्तावों और अमेरिका की कड़ी शर्तों के बीच ईरान अब एक ऐसा रास्ता तलाश रहा है जिससे उसकी संप्रभुता भी बची रहे और आर्थिक प्रतिबंधों से भी राहत मिल सके।
शांति की इन खबरों का असर दुनिया भर के वित्तीय बाजारों पर भी स्पष्ट रूप से दिख रहा है। वॉल स्ट्रीट के सूचकांक रिकॉर्ड ऊंचाई पर पहुंच गए हैं और भारतीय शेयर बाजार में भी तेजी का रुख बना हुआ है। निवेशकों को भरोसा है कि यदि युद्ध रुकता है, तो कच्चे तेल की आपूर्ति सामान्य हो जाएगी और महंगाई पर लगाम लगेगी। कच्चे तेल की कीमतों में स्थिरता आना इस बात का प्रमाण है कि बाजार को अब बड़े युद्ध की आशंका कम सता रही है। ये तमाम संकेत सामूहिक रूप से दर्शाते हैं कि मिडिल ईस्ट की अशांत धरती पर जल्द ही अमन की वापसी हो सकती है।
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