Morena Crime News: मध्य प्रदेश के मुरैना जिले से एक दिल दहला देने वाली घटना सामने आई है। यहां एक पिता ने अपनी 17 वर्षीय नाबालिग बेटी दिव्या की गोली मारकर हत्या कर दी। हत्या की वजह बेटी का दूसरी जाति के लड़के से प्यार करना और उससे शादी करने की इच्छा थी। आरोपी पिता भरत उर्फ बंटू सिकरवार ने पुलिस को बताया कि जब दिव्या शादी के लिए अड़ी रही तो गुस्से में उसने यह कृत्य किया। पुलिस ने रविवार को नदी से दिव्या का शव बरामद कर लिया है। आरोपी पिता को गिरफ्तार कर न्यायिक हिरासत में भेजा गया है।


पड़ोसी की शिकायत से खुला राज़
पुलिस के अनुसार, शिवनगर थाना क्षेत्र के इस मामले में एक पड़ोसी ने पुलिस को सूचना दी कि दिव्या दो दिन से घर से लापता है। साथ ही पड़ोसी ने गुरुवार की रात गोली चलने और चीखने की आवाज सुनी थी। सूचना पर पुलिस ने आरोपी पिता से कड़ी पूछताछ की। शुरू में वह सवालों के जवाब टालता रहा, लेकिन पड़ोसी के दावे और पुलिस की सख्ती के बाद आरोपी ने जुर्म कबूल कर लिया।
प्रेम विवाह को लेकर हुई थी बेटी और पिता की कहासुनी
पुलिस ने बताया कि दिव्या दूसरी जाति के युवक से प्यार करती थी और उससे शादी करना चाहती थी। पिता भरत इस रिश्ते के खिलाफ था और बेटी को समझाने की कई बार कोशिश की। 23 सितंबर की रात करीब 9 बजे दोनों के बीच तीखी बहस हुई। गुस्से में भरत ने दिव्या को गोली मार दी। छोटी बेटी भी घटना के समय मौजूद थी, जिससे घटना की चीख सुनाई दी।
शव को नदी में फेंकने का सनसनीखेज खुलासा
हत्या के बाद भरत ने दिव्या के शव को एक बोरे में रखा और तिरपाल से बांधकर अपने पैतृक गांव भगवान सिंह का पुरा ले जाकर क्वारी नदी में फेंक दिया। पुलिस ने एसडीईआरएफ की मदद से खोजबीन की, जो अंधेरा होने के कारण रोकी गई। रविवार सुबह फिर से तलाशी शुरू की गई और दिव्या का शव नदी से बरामद हुआ।
पुलिस की कार्रवाई और आगे की जांच
भरत को गिरफ्तार कर न्यायालय में पेश किया गया जहां उसे न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया। पुलिस पूरे मामले की गहनता से जांच कर रही है। परिवार में पिता, मां, दो बेटियां और एक बेटा हैं। छोटी बेटी की गवाही से मामले में नई जानकारियां मिल रही हैं।
सामाजिक दृष्टिकोण और जागरूकता की आवश्यकता
यह घटना केवल एक परिवार की त्रासदी नहीं, बल्कि समाज में जाति और प्रेम विवाह को लेकर व्याप्त कुप्रथाओं और असहिष्णुता का द्योतक भी है। विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे मामलों को रोकने के लिए सामाजिक जागरूकता बढ़ाने के साथ-साथ परिवारों में संवाद और समझदारी को बढ़ावा देना जरूरी है।











