Mr. Mint scam : क्या है “मिस्टर मिंट” घोटाला? रायपुर में छापेमारी, दो गिरफ्तार

Mr. Mint scam: देशभर के एक करोड़ निवेशकों को अरबों रुपये की ठगी का शिकार बनाने वाला “मिस्टर मिंट क्रिप्टो” घोटाला अब एक गंभीर अपराध बन चुका है, जिसने भारतीय अर्थव्यवस्था को हिलाकर रख दिया है। इस मामले में रायपुर पुलिस और मुंबई पुलिस की संयुक्त कार्रवाई के तहत मिस्टर मिंट कंपनी के दो डायरेक्टर्स प्रमोद साहू और राहुल भदोरिया को रायपुर के बेबीलोन होटल से गिरफ्तार किया गया है। यह गिरफ्तारी तब हुई जब कंपनी एक भव्य सेमिनार आयोजित कर रही थी, जिसमें लगभग 2000 एजेंट शामिल थे और कंपनी अपनी नई क्रिप्टो ब्लॉकचेन का उद्घाटन कर रही थी।

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क्या है “मिस्टर मिंट” घोटाला?

“मिस्टर मिंट” एक फर्जी क्रिप्टो करेंसी प्लेटफार्म था, जिसने भारतीय निवेशकों से भारी रकम जुटाई। यह कंपनी अपने निवेशकों को ब्लॉकचेन टेक्नोलॉजी और क्रिप्टो करेंसी के जरिए मुनाफा देने का लालच देती थी। कंपनी ने निवेशकों को आकर्षित करने के लिए सेबी (SEBI) और भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) जैसे नियामक संस्थानों के नाम का दुरुपयोग किया और जाली दस्तावेजों के जरिए खुद को वैध घोषित किया।

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सूत्रों के अनुसार, इस कंपनी ने 1 करोड़ निवेशकों से अरबों रुपये की ठगी की, जिसे बेनामी खातों के माध्यम से विदेश भेजा गया और फिर उसे क्रिप्टो करेंसी में कन्वर्ट कर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर हस्तांतरित किया गया। यह कार्रवाई मनी लॉन्ड्रिंग और संभवतः आतंकी फंडिंग के दायरे में आ सकती है। इस मामले में मुंबई पुलिस की साइबर क्राइम विंग ने डिजिटल फॉरेंसिक और ब्लॉकचेन विश्लेषण का उपयोग करके इस जटिल नेटवर्क का पर्दाफाश किया।

घोटाले में सेलिब्रिटी प्रचारकों का दुरुपयोग

मिस्टर मिंट ने अपने ठगी के काम को और विश्वसनीय बनाने के लिए मशहूर हस्तियों का भी दुरुपयोग किया। कंपनी ने क्रिकेटर हरभजन सिंह और बैडमिंटन स्टार साइना नेहवाल को अपने प्रचार में शामिल किया। इन हस्तियों को बिना जानकारी के कंपनी के प्रचार में इस्तेमाल किया गया, जिससे निवेशकों का भरोसा जीता गया। कंपनी ने आनंद फाइनल में विडमेट इन्फोटेक प्राइवेट लिमिटेड नाम से फर्जी कंपनी रजिस्टर कर दावा किया कि उसे सेबी और आरबीआई से लाइसेंस प्राप्त है।

जांच में पाया गया कि न तो इस कंपनी और न ही इसके क्रिप्टो टोकन को किसी भारतीय एजेंसी से कोई मान्यता प्राप्त थी। मुंबई पुलिस ने इन जाली दस्तावेजों को बरामद किया और इस घोटाले के कई राज खोले।

रायपुर के बेबीलोन होटल में छापेमारी

मिस्टर मिंट ने रायपुर के बेबीलोन होटल में एक भव्य सेमिनार का आयोजन किया था, जिसमें कंपनी ने अपनी नई ब्लॉकचेन प्रणाली का उद्घाटन करने का दावा किया। इस सेमिनार में देशभर से करीब 2000 एजेंट शामिल थे, जिन्हें मोटा कमीशन देकर ठगी के इस धंधे को बढ़ावा देने के लिए प्रेरित किया गया था। मुंबई पुलिस और रायपुर पुलिस की संयुक्त टीम ने इस सेमिनार में छापेमारी कर प्रमोद साहू और राहुल भदोरिया को गिरफ्तार किया।

मुंबई पुलिस के प्रवक्ता ने बताया कि यह कार्रवाई गुप्त सूचना के आधार पर की गई थी। इसके अलावा, राहुल भदोरिया ने खुद को नरेंद्र मोदी विचार मंच का पदाधिकारी बताकर एजेंटों और निवेशकों पर रौब जमाया, जिससे इस घोटाले का स्तर और भी गंभीर हो गया।

पुलिस की कार्रवाई और जांच का दायरा

मुंबई पुलिस ने दोनों आरोपियों को ट्रांसिट रिमांड पर मुंबई ले जाया है, जहां उनकी गिरफ्तारी से संबंधित शिकायतें दर्ज की गई हैं। पुलिस अब इस मामले में अन्य दो डायरेक्टर्स, बलजिंदर छाबड़ा और संदीप गुप्ता, की तलाश में जुटी हुई है। मुंबई पुलिस ने ठगी से अर्जित संपत्तियों को जब्त करने के लिए विशेष टीमों का गठन किया है और जांच जारी रखी है।

इसके अलावा, पुलिस यह भी जांच रही है कि ठगी से अर्जित धन का उपयोग किस किस विदेशी गतिविधियों में किया गया। विशेष रूप से यह जांच की जा रही है कि क्या इस पैसे का इस्तेमाल आतंकी फंडिंग के लिए तो नहीं हुआ था।

मनी लॉन्ड्रिंग और देशद्रोह के गंभीर आरोप

“मिस्टर मिंट” ने सेबी के नियमों का उल्लंघन करते हुए बिना लाइसेंस के निवेशकों से रुपये लेकर उन्हें डॉलर में कन्वर्ट किया और विदेश भेजा। इससे भारतीय अर्थव्यवस्था को भारी नुकसान हुआ और रुपये की कीमत में गिरावट आई। जांच के दौरान पता चला कि यह कंपनी पिरामिड स्कीम और मनी सर्कुलेशन जैसे अपराधों में भी लिप्त थी, जिसके जरिए निवेशकों को ठगा गया।

निवेशकों से ठगी करने के बाद, मिस्टर मिंट ने फर्जी वेबसाइट्स और टोकन बनाकर अपने निवेशकों को लुभाया और उनके पैसों को अवैध तरीके से विदेश भेजा।

निवेशकों को कैसे ठगा गया?

मिस्टर मिंट का नेटवर्क पूरे भारत में फैला हुआ था। इसके एजेंट देशभर में घूमकर निवेशकों को मोटे कमीशन का लालच देते थे और फर्जी दस्तावेजों के माध्यम से उन्हें यह विश्वास दिलाने की कोशिश करते थे कि कंपनी पूरी तरह से वैध है। सवाल उठाने वाले निवेशकों को चुप करवा दिया जाता था। मुंबई पुलिस ने इस नेटवर्क के कई एजेंटों की पहचान की है और उनकी गिरफ्तारी के लिए छापेमारी तेज कर दी है।

यह घोटाला न केवल भारतीय निवेशकों के लिए एक बड़ा झटका है, बल्कि यह देश की अर्थव्यवस्था के लिए भी गंभीर खतरा उत्पन्न करता है। पुलिस की जांच अब इस नेटवर्क के अन्य पहलुओं को उजागर करने के लिए लगातार चल रही है। इस मामले की गंभीरता को देखते हुए, यह कहा जा सकता है कि “मिस्टर मिंट” घोटाले ने एक बड़ी चेतावनी दी है कि हमें वित्तीय धोखाधड़ी और मनी लॉन्ड्रिंग के मामलों में सतर्कता बरतने की आवश्यकता है।

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