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Modi Govt Master Plan: मनरेगा के बाद अब शिक्षा और खाद्य सुरक्षा कानून बदलेगी मोदी सरकार, जानें पूरा मास्टर प्लान

Modi Govt Master Plan: केंद्र सरकार अब मनरेगा की तर्ज पर संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (UPA) सरकार के दौर में बने दो अत्यंत महत्वपूर्ण कानूनों—शिक्षा का अधिकार (RTE) और खाद्य सुरक्षा कानून (NFSA)—में बड़े बदलाव की तैयारी कर रही है। सरकार का प्राथमिक उद्देश्य इन योजनाओं का लाभ हर पात्र व्यक्ति तक शत-प्रतिशत पहुंचाना और लाभार्थियों का पारदर्शी पंजीकरण सुनिश्चित करना है। सरकारी सूत्रों के अनुसार, पहले प्रशासनिक नियमों और आदेशों के माध्यम से सुधार की कोशिश की जाएगी, लेकिन यदि आवश्यक हुआ तो संसद में नए संशोधन विधेयक (बिल) भी पेश किए जा सकते हैं।

प्रधानमंत्री मोदी का ‘100% सैचुरेशन’ विजन और नई रणनीतियां

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि सभी कल्याणकारी योजनाओं का 100% पंजीकरण सुनिश्चित किया जाए। सरकार का मानना है कि केवल कानून बना देना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि उसका धरातल पर क्रियान्वयन अधिक महत्वपूर्ण है। इस दिशा में सरकार तीन मुख्य स्तंभों पर काम कर रही है:

  1. योजनाओं की पूर्ण कवरेज के लिए एक निश्चित समय-सीमा तय करना।

  2. डिजिटल प्लेटफॉर्म के जरिए रियल-टाइम मॉनिटरिंग और पारदर्शी अमल।

  3. लाभार्थियों की सटीक पहचान के लिए राष्ट्रव्यापी पंजीकरण अभियान चलाना।

मौजूदा कानूनों की कमियां और सुधार की आवश्यकता

परामर्श प्रक्रिया से जुड़े अधिकारियों का तर्क है कि मनमोहन सिंह सरकार के समय बनाए गए अधिकार-आधारित कानूनों में तीन बड़ी खामियां थीं। इन कमियों के कारण न तो हर बच्चे को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा मिल सकी और न ही खाद्य सुरक्षा हर जरूरतमंद परिवार तक पहुंची। क्रियान्वयन में इसी गैप के कारण सरकार की विश्वसनीयता पर सवाल उठ रहे थे। अब सरकार शिक्षा, खाद्य सुरक्षा, रोजगार, स्वास्थ्य और आवास—इन पांच क्षेत्रों को प्राथमिकता देते हुए ‘आवास के अधिकार’ को भी कानूनी जामा पहनाने पर विचार कर रही है।

खाद्य सुरक्षा और मानक कानून, 2006: एक परिचय

भारत में सुरक्षित और स्वच्छ भोजन सुनिश्चित करने के लिए ‘खाद्य सुरक्षा और मानक कानून’ प्रमुख आधार है। इसी के तहत FSSAI की स्थापना की गई थी। यह कानून न केवल निर्माताओं और होटलों पर, बल्कि ऑनलाइन फूड डिलीवरी और स्ट्रीट फूड वेंडर्स पर भी लागू होता है। नियमों के उल्लंघन पर 10 लाख रुपये तक का जुर्माना और लाइसेंस रद्दीकरण जैसे कड़े प्रावधान हैं। सरकार अब इसमें पंजीकरण प्रक्रिया को और अधिक सुगम और व्यापक बनाने की योजना बना रही है।

शिक्षा का अधिकार (RTE) और मनरेगा का नया स्वरूप

शिक्षा का अधिकार कानून 2009, जो 6 से 14 वर्ष के बच्चों के लिए अनिवार्य शिक्षा की गारंटी देता है, अब सरकार के रडार पर है ताकि इसकी पहुंच और गुणवत्ता को सुधारा जा सके। वहीं, मनरेगा की जगह लाया गया VB-G Ram G (विकसित भारत गारंटी फॉर रोजगार एंड आजीविका मिशन – ग्रामीण) बिल हाल ही में संसद से पारित होकर कानून बन चुका है। दिसंबर 2025 में राष्ट्रपति की मंजूरी के बाद लागू हुए इस कानून ने रोजगार गारंटी के ढांचे को डिजिटल और आधुनिक बनाने का लक्ष्य रखा है, हालांकि महात्मा गांधी का नाम हटाने पर विपक्ष ने कड़ा विरोध जताया था।

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