Independence Day speech : लाल किले से सबसे लंबे भाषण देने वाले प्रधानमंत्री बने मोदी, पीछे छूटे नेहरू और इंदिरा

Independence Day speech : 15 अगस्त 2025 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लाल किले से अपना 12वां स्वतंत्रता दिवस भाषण दिया। यह भाषण कुल 105 मिनट लंबा रहा—और इसने एक बार फिर यह साबित कर दिया कि भाषण की अवधि के मामले में मोदी अब तक के सभी प्रधानमंत्रियों से काफी आगे हैं।

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भाषण की लंबाई बनी चर्चा का विषय

‘ऑपरेशन सिंदूर’ जैसी सफल सैन्य कार्रवाई के बाद यह पहला स्वतंत्रता दिवस था। दुनिया आर्थिक और कूटनीतिक चुनौतियों से गुजर रही है। अमेरिका जैसी महाशक्ति की टैरिफ नीतियाँ, वैश्विक मंदी की आशंका और बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव के बीच देश को नई दिशा देने की जरूरत थी। ऐसे में मोदी का विस्तृत और मुद्दों से भरपूर भाषण अपेक्षित भी था।

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लेकिन सबसे दिलचस्प आंकड़ा यह है कि प्रधानमंत्री मोदी ने अब तक के 12 भाषणों में कुल 1,030 मिनट तक लाल किले से राष्ट्र को संबोधित किया है। यह किसी भी भारतीय प्रधानमंत्री द्वारा दिए गए भाषणों की कुल अवधि में सबसे अधिक है, भले ही मोदी भाषणों की संख्या में अभी नेहरू (17 भाषण) और इंदिरा गांधी (16 भाषण) से पीछे हैं।

नेहरू, इंदिरा और मोदी: तुलना में कौन कहाँ?

जवाहरलाल नेहरू, जिन्होंने आज़ादी के बाद पहला ऐतिहासिक भाषण दिया था, उन्होंने कुल 17 बार लाल किले से देश को संबोधित किया, लेकिन उनकी कुल भाषण अवधि केवल 400 मिनट रही।

इंदिरा गांधी ने 16 भाषणों में 504 मिनट बोले।

डॉ. मनमोहन सिंह ने 10 भाषणों में 417 मिनट तक राष्ट्र को संबोधित किया।

इनकी तुलना में मोदी ने 12 भाषणों में ही 1,030 मिनट तक बोलकर एक नया रिकॉर्ड कायम कर दिया है।

औसत भाषण अवधि में भी सबसे आगे

औसतन, नरेंद्र मोदी हर भाषण में 86 मिनट तक बोलते हैं। वहीं:

इंदिरा गांधी का औसत भाषण: 32 मिनट

नेहरू का औसत: 24 मिनट

मनमोहन सिंह: 42 मिनट

राजीव गांधी: 47 मिनट

इतनी स्पष्ट बढ़त दिखाती है कि मोदी न केवल मुद्दों पर विस्तार से बोलते हैं, बल्कि हर भाषण को नीति घोषणाओं और बड़ी योजनाओं के मंच के रूप में इस्तेमाल करते हैं।

ऐतिहासिक भाषणों की झलक

नेहरू ने 1954 में सिर्फ 14 मिनट, 1959 में 18 मिनट, और 1962 में 16 मिनट के भाषण दिए थे। इंदिरा गांधी ने भी 1966 में केवल 14 मिनट भाषण दिया था, जबकि 1971 और 1973 में उनके भाषण 25 मिनट के थे।

मोदी के भाषणों में 2016 (96 मिनट), 2019 (93 मिनट), और 2020 (86 मिनट) जैसे कई मौके रहे हैं, जहाँ वे घंटों तक देश की नीतियों, उपलब्धियों और योजनाओं का लेखा-जोखा पेश करते हैं।

भाजपा का तर्क: भाषण की लंबाई में गहराई भी

भाजपा का कहना है कि भाषण की लंबाई केवल समय नहीं, बल्कि विषय-वस्तु की विविधता और गहराई को दर्शाती है। प्रधानमंत्री मोदी हर बार आर्थिक विकास, महिला सशक्तिकरण, तकनीकी नवाचार, सामाजिक समावेश, और राष्ट्रीय सुरक्षा जैसे विषयों पर गहराई से बोलते हैं।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लाल किले से भाषण देने की परंपरा को केवल निभाया नहीं है, बल्कि उसे एक विस्तृत संवाद का माध्यम बना दिया है। भाषण की लंबाई उनके दृष्टिकोण की व्यापकता और नीतिगत स्पष्टता की परिचायक बन चुकी है। आने वाले समय में यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या वे भाषणों की संख्या में भी नेहरू और इंदिरा को पीछे छोड़ेंगे।

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