US Supreme Court : US सुप्रीम कोर्ट का ट्रंप को बड़ा झटका, जन्मसिद्ध नागरिकता खत्म करने पर रोक

US Supreme Court : अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में एक अत्यंत महत्वपूर्ण और ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए ‘बर्थराइट सिटीजनशिप’ (जन्म के आधार पर नागरिकता) के अधिकार को पूरी तरह से बरकरार रखा है। यह निर्णय उस समय आया है जब अमेरिका में आव्रजन (इमिग्रेशन) नीतियों को लेकर गहन बहस चल रही है। कोर्ट ने स्पष्ट कर दिया है कि अमेरिकी धरती पर पैदा होने वाले हर बच्चे को नागरिकता का जन्मजात अधिकार है, चाहे उनके माता-पिता की कानूनी स्थिति कुछ भी क्यों न हो। यह फैसला देश में पिछले 150 वर्षों से चली आ रही कानूनी परंपरा को सुरक्षा प्रदान करता है और संविधान की सर्वोच्चता को पुनर्स्थापित करता है।

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राष्ट्रपति के एग्जीक्यूटिव ऑर्डर को सुप्रीम कोर्ट ने किया खारिज

यह कानूनी जंग राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा अपने दूसरे कार्यकाल के शुरुआती दौर में जारी किए गए एक विवादास्पद एग्जीक्यूटिव ऑर्डर से शुरू हुई थी। ट्रंप प्रशासन ने अपने आदेश के माध्यम से उन बच्चों को स्वचालित नागरिकता देने की प्रक्रिया पर रोक लगाने का प्रयास किया था, जिनके माता-पिता अमेरिका में अवैध रूप से रह रहे थे या अस्थायी वीजा पर थे। हालांकि, मानवाधिकार संगठनों और प्रवासियों के समर्थन में खड़ी संस्थाओं ने इस आदेश को संविधान के 14वें संशोधन के विरुद्ध बताया था। निचली अदालतों ने शुरुआत से ही इस पर रोक लगा दी थी और अब सुप्रीम कोर्ट ने 6-3 के बहुमत से इस आदेश को पूरी तरह खारिज कर इसे असंवैधानिक करार दिया है।

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14वें संशोधन और ऐतिहासिक precedents का दिया गया हवाला

अपने फैसले में सुप्रीम कोर्ट के जजों ने अमेरिकी संविधान के 14वें संशोधन का विशेष उल्लेख किया, जो स्पष्ट रूप से कहता है कि अमेरिका में जन्मे या वहां की नागरिकता प्राप्त करने वाले सभी व्यक्ति अमेरिकी नागरिक हैं। अदालत ने वर्ष 1898 के ऐतिहासिक ‘यूनाइटेड स्टेट्स बनाम वोंग किम आर्क’ (United States v. Wong Kim Ark) मामले का भी संदर्भ दिया। इस कानूनी मिसाल ने यह स्थापित किया था कि अमेरिका में जन्म लेना नागरिकता के लिए पर्याप्त आधार है। अदालत ने अपने निष्कर्ष में कहा कि केवल अत्यंत दुर्लभ और सीमित अपवादों को छोड़कर, अमेरिकी भूमि पर जन्म लेने वाला हर शिशु नागरिकता का पूर्ण हकदार है।

प्रवासी परिवारों के लिए एक बड़ी राहत का संदेश

सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले को प्रवासी समुदाय के लिए एक बड़ी राहत और ट्रंप की इमिग्रेशन नीति के लिए एक बड़ा झटका माना जा रहा है। अमेरिका में हर साल बड़ी संख्या में प्रवासी परिवारों के बच्चे जन्म लेते हैं। इस फैसले के बाद, इन परिवारों में व्याप्त अनिश्चितता का माहौल समाप्त हो गया है। अब उन लाखों बच्चों के भविष्य पर मंडरा रहा खतरा टल गया है, जो अपने माता-पिता की आव्रजन स्थिति के कारण नागरिकता से वंचित होने के डर में जी रहे थे। यह निर्णय यह सुनिश्चित करता है कि अमेरिकी कानून का लाभ उन सभी बच्चों को समान रूप से मिले जिनका जन्म अमेरिकी मिट्टी पर हुआ है।

देश की इमिग्रेशन नीति पर दीर्घकालिक असर

राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि यह निर्णय आने वाले समय में अमेरिका की आव्रजन नीतियों और राजनीतिक चर्चाओं को एक नई दिशा देगा। हालांकि ट्रंप प्रशासन इस व्यवस्था में बदलाव की कोशिश कर रहा था, लेकिन न्यायपालिका ने यह स्पष्ट कर दिया है कि संविधान के मूल ढांचे में बदलाव इतना आसान नहीं है। यह फैसला न केवल वर्तमान प्रवासी परिवारों के लिए एक सुरक्षा कवच है, बल्कि यह भविष्य के लिए भी एक बड़ा कानूनी मानदंड (precedent) बन गया है। इस निर्णय के साथ ही अमेरिका ने अपनी उस उदारवादी नागरिकता परंपरा को कायम रखा है, जो सदियों से देश की सांस्कृतिक विविधता और विकास का आधार रही है।

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Chandan Das

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