Mohan Bhagwat : आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत का बयान, पाकिस्तान से बातचीत के दरवाजे खुले जरूरी

Mohan Bhagwat : राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के सरसंघचालक मोहन भागवत ने संगठन के सरकार्यवाह (महासचिव) दत्तात्रेय होसबोले के उस बयान का पुरजोर समर्थन किया है, जिसमें उन्होंने पाकिस्तान के साथ संवाद का एक रास्ता खुला रखने की वकालत की थी। शनिवार को आरएसएस के शताब्दी समारोह के अंतर्गत आयोजित एक विशेष संवाद सत्र में भागवत ने साफ किया कि होसबोले की टिप्पणी पाकिस्तान की सत्ता के लिए नहीं, बल्कि वहां के आम नागरिकों के संदर्भ में थी। उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा कि पाकिस्तान को लेकर संघ पूरी तरह से केंद्र सरकार की आधिकारिक और रणनीतिक विदेश नीति का ही पालन करेगा।

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दो-राष्ट्र सिद्धांत का विरोध

आरएसएस प्रमुख ने संवाद सत्र के दौरान एक महत्वपूर्ण पहलू पर प्रकाश डालते हुए कहा कि आज भी पाकिस्तान के भीतर एक बहुत बड़ा वर्ग ऐसा है जो भारत के विभाजन को इतिहास की एक बड़ी भूल मानता है। मोहन भागवत के अनुसार, पड़ोसी देश में कई निष्पक्ष पत्रकार और बुद्धिजीवी हैं जो संघ के लोकहितैषी कार्यों की खुलकर सराहना करते हैं। उन्होंने आगे कहा कि वहां ऐसे लोगों की संख्या बहुत अधिक है जो दो-राष्ट्र सिद्धांत (Two-Nation Theory) के पूरी तरह विरोधी हैं और यह मानते हैं कि दोनों देशों का एक साथ मिलकर रहना ही हर लिहाज से बेहतर और प्रगतिशील कदम था।

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रणनीतिक जीत के लिए जरूरी

मोहन भागवत ने भारत की दीर्घकालिक रणनीतिक जीत और अखंडता पर बात करते हुए कहा कि यदि भविष्य में भारत को पाकिस्तान को पूरी तरह और निर्णायक रूप से परास्त करना है, तो इसके लिए दूरगामी कदम उठाने होंगे। उन्होंने तर्क दिया कि इसके लिए या तो वहां के नागरिकों को स्वेच्छा से भारत में शामिल करना होगा या फिर उन्हें अपने ही मुल्क में शांतिपूर्वक जीने के अनुकूल बनाना होगा। इन दोनों ही स्थितियों को धरातल पर उतारने के लिए बातचीत का रास्ता हमेशा खुला रखना बेहद जरूरी है, ताकि कूटनीतिक संवाद कभी पूरी तरह ठप न हो।

संघ की विचारधारा पर स्पष्टीकरण

अपने संबोधन को आगे बढ़ाते हुए आरएसएस प्रमुख ने संगठन के मूल स्वभाव और मानवीय मूल्यों को रेखांकित किया। उन्होंने दृढ़ता से कहा, “हम हिटलर या किसी क्रूर तानाशाह जैसे नहीं हैं। यह न तो हमारा स्वभाव है और न ही काम करने की संस्कृति।” उन्होंने स्पष्ट किया कि संघ और भारत का दृष्टिकोण हमेशा से अन्याय, आतंक और अत्याचार को जड़ से खत्म करने का रहा है, लेकिन इसका अर्थ यह कतई नहीं है कि अच्छाई का अंत कर दिया जाए। हमें समाज और मानवता में जो कुछ भी अच्छा है, उसे हर हाल में बचाकर रखना होगा।

क्या था दत्तात्रेय होसबोले का मुख्य बयान

उल्लेखनीय है कि इस पूरे विवाद की शुरुआत आरएसएस महासचिव दत्तात्रेय होसबाले द्वारा पीटीआई (PTI) को दिए गए एक इंटरव्यू से हुई थी। होसबाले ने कहा था कि भारत को अपने पड़ोसी देश पाकिस्तान के साथ संवाद के रास्ते कभी भी पूरी तरह से बंद नहीं करने चाहिए और बातचीत के लिए हमेशा एक विकल्प तैयार रखना चाहिए। इसी वजह से दोनों देशों के बीच राजनयिक संबंध टिके हुए हैं, व्यापारिक गतिविधियां चलती हैं और नागरिकों को वीजा जारी किए जाते हैं। हालांकि, उन्होंने यह भी पूरी मुस्तैदी से साफ किया था कि सीमाओं पर आतंकवाद के खिलाफ भारत के कड़े रुख और सैन्य कार्रवाई में किसी भी प्रकार की नरमी नहीं बरती जानी चाहिए।

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Chandan Das

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