महाराष्ट्र

Mohan Bhagwat: “संतों की विरासत से अमर है भारत”, संघ प्रमुख ने बताया राष्ट्र निर्माण का आध्यात्मिक मार्ग!

Mohan Bhagwat: नागपुर में आयोजित एक भव्य आध्यात्मिक समारोह के दौरान राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के सरसंघचालक मोहन भागवत ने भारतीय संस्कृति और समाज की मजबूती पर अपने विचार साझा किए। उन्होंने जोर देकर कहा कि भारत की अमरता और यहां के समाज की स्थिरता का सबसे बड़ा स्तंभ हमारे संत-महात्माओं द्वारा दिया गया आध्यात्मिक ज्ञान है। भागवत के अनुसार, यही वह ज्ञान है जो संकट के समय पूरी दुनिया को सही रास्ता दिखाता है।

तुलसी नगर में आचार्य समय सागर से भेंट और आशीर्वाद

नागपुर के तुलसी नगर क्षेत्र में आयोजित ‘श्री मज्जिनेंद्र पंचकल्यानेश्वर प्रतिष्ठा महोत्सव’ के अंतर्गत सात दिवसीय अनुष्ठान का आयोजन किया जा रहा है। इस धार्मिक महोत्सव के दौरान मोहन भागवत ने जैन आचार्य समय सागर जी महाराज से विशेष मुलाकात की। उन्होंने आचार्य का आशीर्वाद लिया और उनके साथ विभिन्न आध्यात्मिक एवं सामाजिक विषयों पर गहन चर्चा की। इस अवसर पर भारी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित थे, जिन्हें भागवत ने संबोधित किया।

‘हस्ती मिटती नहीं हमारी’: भारतीय संस्कृति की शाश्वत शक्ति

अपने संबोधन में प्रसिद्ध पंक्तियों का उल्लेख करते हुए मोहन भागवत ने कहा, “यूनान, मिस्र और रोम जैसी महान सभ्यताएं समय के साथ मिट गईं, लेकिन कुछ बात है कि हमारी हस्ती कभी नहीं मिटती।” उन्होंने स्पष्ट किया कि वह ‘हस्ती’ और कुछ नहीं बल्कि वह आध्यात्मिक ज्ञान है जो हमारे पूर्वजों ने आत्मसात किया और जिसे संत-महात्मा निरंतर हमें दे रहे हैं। भागवत ने कहा कि जब भी दुनिया लड़खड़ाती है या संकट में फंसती है, तब भारत ही वह देश होता है जो अपने इसी ज्ञान के बल पर विश्व का मार्गदर्शन करता है।

आधुनिक भौतिकता और उपभोक्तावाद की चुनौतियों पर प्रहार

संघ प्रमुख ने आज के दौर की सबसे बड़ी चुनौतियों—आधुनिक भौतिकता, उपभोक्तावाद और जड़वाद—का जिक्र करते हुए कहा कि ये ‘आंधियां’ कई समाजों को नष्ट कर देती हैं। लेकिन भारत इन प्रभावों से बचा रहता है। उन्होंने कहा कि पश्चिमी देशों में जब ऐसी लहर आती है तो समाज कमजोर पड़ जाते हैं, परंतु भारत में यह लहर ऊपर से गुजर जाती है और हम स्थिर रहते हैं। इसका श्रेय उन्होंने संतों के मार्गदर्शन को दिया, जो समाज को मानसिक और आध्यात्मिक रूप से मजबूत तैयार करते हैं।

संतों का उपकार और सुखी जीवन की गारंटी

मोहन भागवत ने श्रद्धालुओं से अपील की कि संतों के प्रति केवल श्रद्धा रखना ही काफी नहीं है, बल्कि उनके उपदेशों को जीवन में उतारना भी अनिवार्य है। उन्होंने कहा, “हमारे देश की अमरता और हमारे सुखी जीवन की गारंटी ये संत-महात्मा ही हैं।” उनके अनुसार, यदि हम संतों के दिखाए मार्ग पर चलेंगे, तो सामान्य समाज में भी सकारात्मक बदलाव आएगा। उन्होंने रेखांकित किया कि सदा से ऐसा होता आया है और आज के दौर में इसकी प्रासंगिकता और भी बढ़ गई है।

गृहस्थ जीवन के लिए संतों की सलाह और भारत का भविष्य

भागवत ने कहा कि केवल वैरागी ही नहीं, बल्कि गृहस्थ जीवन जीने वाले लोगों को भी संतों से सटीक सलाह मिलती है कि उन्हें अपना जीवन कैसे व्यतीत करना चाहिए। उन्होंने कहा कि संतों के संग मात्र से ही मनुष्य का कल्याण हो जाता है। अंत में उन्होंने विश्वास जताया कि जब तक भारत अपने आध्यात्मिक मूल्यों के साथ जीवित है, तब तक दुनिया में सब ठीक रहेगा। उन्होंने प्रार्थना की कि संतों का मार्गदर्शन सदैव बना रहे, क्योंकि उनकी शक्ति ही भारत को ‘भारत’ बनाए रखती है।

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