Monsoon Fever Recovery : हर साल मानसून के दौरान डेंगू, चिकनगुनिया, टाइफाइड और वायरल फीवर जैसी बीमारियों के मामले बढ़ जाते हैं। हालांकि अधिकांश मरीज उचित इलाज और देखभाल के बाद कुछ दिनों में बुखार से उबर जाते हैं, लेकिन बीमारी खत्म होने के बाद भी शरीर में कमजोरी, थकान और सुस्ती बनी रह सकती है। कई लोगों को सामान्य कामकाज करने में भी पहले की तुलना में अधिक मेहनत महसूस होती है। ऐसे में यह समझना जरूरी है कि बुखार उतरने के बाद शरीर को पूरी तरह सामान्य होने में समय क्यों लगता है।
बुखार के बाद कमजोरी को कहते हैं पोस्ट-इंफेक्शियस फैटीग
फोर्टिस अस्पताल, शालीमार बाग की संक्रामक रोग विशेषज्ञ डॉ. जे. कीर्तना के अनुसार, संक्रमण से ठीक होने के बाद लंबे समय तक रहने वाली थकान को पोस्ट-इंफेक्शियस फैटीग (PIF) कहा जाता है। मानसून में होने वाली कई संक्रामक बीमारियों के बाद ऐसी स्थिति देखी जा सकती है। कुछ मरीजों में कई सप्ताह तक कमजोरी, थकान, मांसपेशियों में दर्द और एकाग्रता से जुड़ी परेशानियां रह सकती हैं।
संक्रमण के बाद इम्यून सिस्टम को सामान्य होने में लगता है समय
बुखार कम हो जाने का मतलब यह नहीं है कि शरीर पूरी तरह संक्रमण से उबर चुका है। बीमारी के दौरान प्रतिरक्षा प्रणाली संक्रमण से लड़ने के लिए लगातार सक्रिय रहती है। बुखार खत्म होने के बाद भी शरीर संक्रमण के प्रभाव को नियंत्रित करने और क्षतिग्रस्त ऊतकों की मरम्मत में लगा रहता है। इस प्रक्रिया के कारण कुछ समय तक थकान और कमजोरी महसूस हो सकती है।
बीमारी के दौरान कम खाना भी बनता है कमजोरी की वजह
संक्रमण और तेज बुखार के दौरान अक्सर भूख कम हो जाती है। इसके चलते शरीर को पर्याप्त कैलोरी, प्रोटीन, विटामिन और दूसरे पोषक तत्व नहीं मिल पाते। बीमारी के दौरान शरीर की ऊर्जा जरूरत भी बढ़ जाती है, जिससे ऊर्जा भंडार कम हो सकता है। बीमारी खत्म होने के बाद इन पोषक तत्वों और ऊर्जा की भरपाई में समय लगता है। यही कारण है कि सामान्य रिपोर्ट आने के बावजूद व्यक्ति खुद को कमजोर महसूस कर सकता है।
आनुवंशिक कारण भी डाल सकते हैं असर
हर व्यक्ति का शरीर संक्रमण के प्रति एक जैसी प्रतिक्रिया नहीं देता। विशेषज्ञों के मुताबिक कुछ लोगों में लंबे समय तक थकान रहने की संभावना अधिक हो सकती है। इसके पीछे शरीर की प्रतिरक्षा प्रतिक्रिया, आनुवंशिक प्रभाव और पहले से मौजूद स्वास्थ्य स्थितियां जैसे कई कारण हो सकते हैं। इसलिए किसी दूसरे व्यक्ति की तुलना में अपनी रिकवरी धीमी होना हमेशा असामान्य नहीं माना जाना चाहिए।
रिकवरी के लिए पर्याप्त पानी पीना जरूरी
बीमारी के बाद शरीर को पर्याप्त हाइड्रेशन देना बेहद जरूरी है। पानी के अलावा जरूरत के अनुसार तरल पदार्थों का सेवन किया जा सकता है। इससे शरीर में पानी की कमी दूर करने में मदद मिलती है। खासकर बुखार, उल्टी या दस्त के दौरान शरीर से काफी मात्रा में तरल पदार्थ निकल सकता है। ऐसे में डॉक्टर की सलाह के अनुसार पानी और आवश्यक इलेक्ट्रोलाइट्स की पूर्ति करना रिकवरी का महत्वपूर्ण हिस्सा है।
प्रोटीन और पौष्टिक भोजन को दें प्राथमिकता
रिकवरी के दौरान केवल पेट भरना पर्याप्त नहीं है, बल्कि भोजन में पोषक तत्वों का संतुलन भी जरूरी है। डाइट में दाल, दूध या अन्य उपयुक्त प्रोटीन स्रोत, ताजे फल और सब्जियां शामिल की जा सकती हैं। विशेषज्ञ के अनुसार सामान्य परिस्थितियों में संतुलित और पौष्टिक भोजन शरीर को दोबारा ऊर्जा हासिल करने में मदद करता है। बिना जरूरत सप्लीमेंट लेने के बजाय पहले भोजन के जरिए पोषण पूरा करने पर ध्यान देना बेहतर है।
शरीर पर तुरंत ज्यादा दबाव न डालें
बुखार उतरने के तुरंत बाद पहले जैसी शारीरिक गतिविधि शुरू करना हर व्यक्ति के लिए उचित नहीं हो सकता। शरीर को पर्याप्त आराम और धीरे-धीरे सामान्य दिनचर्या में लौटने का समय देना चाहिए। शुरुआत हल्की गतिविधियों से की जा सकती है और थकान महसूस होने पर आराम करना जरूरी है। पर्याप्त नींद भी रिकवरी के दौरान महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।
कमजोरी दो से चार सप्ताह तक रह सकती है
पोस्ट-इंफेक्शियस थकान हर व्यक्ति में अलग अवधि तक रह सकती है। कई लोगों में कमजोरी करीब दो से चार सप्ताह में धीरे-धीरे कम हो जाती है, जबकि कुछ मामलों में इससे अधिक समय भी लग सकता है। बुजुर्गों या पहले से स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं वाले लोगों को सामान्य स्थिति में लौटने में ज्यादा समय लग सकता है। इसलिए रिकवरी के दौरान धैर्य रखना जरूरी है।
लगातार परेशानी होने पर डॉक्टर से लें सलाह
यदि बुखार ठीक होने के बाद भी कमजोरी लगातार बनी रहती है, बढ़ती जाती है या नए लक्षण दिखाई देते हैं, तो चिकित्सकीय सलाह लेना जरूरी है। पर्याप्त आराम, पानी, पौष्टिक भोजन और धीरे-धीरे सामान्य गतिविधियों की ओर लौटना रिकवरी में मदद कर सकता है। हालांकि लंबे समय तक रहने वाली थकान को केवल सामान्य कमजोरी मानकर नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।
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