Newborn Baby Water: घर में नवजात शिशु का जन्म माता-पिता के लिए बेहद खुशी और भावनाओं से भरा पल होता है। इस खुशी के साथ बच्चे की सेहत और सुरक्षा की जिम्मेदारी भी बढ़ जाती है। नवजात शिशु का शरीर काफी संवेदनशील होता है, इसलिए उसके खानपान को लेकर माता-पिता के मन में कई सवाल उठना स्वाभाविक है। खासतौर पर पहली बार माता-पिता बनने वालों को यह जानना जरूरी है कि जन्म के शुरुआती महीनों में बच्चे को क्या और कब देना चाहिए।
छह महीने तक मां का दूध माना जाता है मुख्य आहार
विशेषज्ञों के अनुसार, जन्म से छह महीने की उम्र तक शिशु के लिए मां का दूध ही पर्याप्त आहार माना जाता है। इसमें बच्चे के विकास के लिए जरूरी पोषक तत्वों के साथ प्रतिरक्षा को सहयोग देने वाले घटक भी मौजूद होते हैं। मां का दूध बच्चे की पोषण संबंधी जरूरतों को पूरा करने के साथ संक्रमण से बचाव में भी मदद करता है। इसी वजह से शुरुआती छह महीनों में स्तनपान को विशेष महत्व दिया जाता है।
क्या छह महीने से पहले बच्चे को पानी देना चाहिए?
पीडियाट्रिशियन डॉ. रवि मलिक ने अपने सोशल मीडिया वीडियो में शिशु को पानी देने से संबंधित जानकारी साझा की है। उनके मुताबिक, सामान्य परिस्थितियों में छह महीने से कम उम्र के बच्चे को अलग से पानी देने की जरूरत नहीं होती। इस अवधि में बच्चे को मुख्य रूप से मां का दूध दिया जाना चाहिए। यदि बच्चा फॉर्मूला मिल्क लेता है, तो उसे भी चिकित्सकीय निर्देशों के अनुसार सही मात्रा में पानी मिलाकर तैयार किया जाता है।
मां के दूध में ही पर्याप्त मात्रा में पानी मौजूद
मां का दूध केवल पोषण ही नहीं देता, बल्कि शिशु के शरीर में तरल पदार्थ की जरूरत भी पूरी करता है। इसमें पानी की मात्रा काफी अधिक होती है, इसलिए सामान्य परिस्थितियों में छह महीने तक अलग से पानी देने की आवश्यकता नहीं होती। गर्म मौसम में भी माता-पिता को बिना चिकित्सकीय सलाह के छोटे बच्चे को पानी देने से बचना चाहिए। बच्चे को पर्याप्त स्तनपान कराना उसकी हाइड्रेशन जरूरतों को पूरा करने में मदद करता है।
बाहर का पानी बढ़ा सकता है संक्रमण का खतरा
छह महीने से छोटे शिशु की प्रतिरक्षा प्रणाली अभी विकास की अवस्था में होती है। ऐसे में स्वच्छता को लेकर थोड़ी सी लापरवाही भी संक्रमण का कारण बन सकती है। यदि पानी सुरक्षित या दूषित हो, तो उसमें मौजूद सूक्ष्मजीव बच्चे के स्वास्थ्य को प्रभावित कर सकते हैं। इससे दस्त और पेट संबंधी संक्रमण जैसी समस्याओं का जोखिम बढ़ सकता है। इसलिए इस उम्र में बिना डॉक्टर की सलाह के पानी या अन्य तरल पदार्थ देना उचित नहीं माना जाता।
ज्यादा पानी से हो सकता है वाटर इंटॉक्सिकेशन
छोटे बच्चों को जरूरत से ज्यादा पानी देने से एक गंभीर समस्या का खतरा हो सकता है, जिसे वाटर इंटॉक्सिकेशन कहा जाता है। शिशु की किडनी अभी पूरी तरह विकसित नहीं होती, इसलिए शरीर में अतिरिक्त पानी को संभालने की क्षमता सीमित हो सकती है। बहुत ज्यादा पानी शरीर में सोडियम का स्तर कम कर सकता है। गंभीर स्थिति में इससे स्वास्थ्य संबंधी जटिलताएं पैदा हो सकती हैं।
फॉर्मूला दूध में पानी की मात्रा खुद से न बदलें
जो बच्चे फॉर्मूला मिल्क लेते हैं, उनके माता-पिता को दूध तैयार करते समय पैकेट पर दिए निर्देशों या डॉक्टर की सलाह का पालन करना चाहिए। फॉर्मूला को ज्यादा पानी डालकर पतला करना या बच्चे को दूध के अतिरिक्त पानी देना उचित नहीं है। गलत अनुपात बच्चे को पर्याप्त पोषण न मिलने या तरल पदार्थों के संतुलन पर असर डालने जैसी समस्याएं पैदा कर सकता है।
छह महीने बाद धीरे-धीरे पानी की शुरुआत
छह महीने की उम्र के आसपास जब बच्चे के आहार में ठोस या पूरक खाद्य पदार्थ शामिल किए जाने लगते हैं, तब पानी की जरूरत भी बदलती है। इस चरण में माता-पिता बच्चे को पानी देना शुरू कर सकते हैं, लेकिन मात्रा और आहार से जुड़ी सलाह बच्चे की जरूरत के अनुसार डॉक्टर से लेना बेहतर रहता है। हर बच्चे का विकास और स्वास्थ्य अलग होता है।
बच्चे की जरूरत समझना सबसे जरूरी
नवजात को पानी कब देना है, इसे लेकर इंटरनेट या आसपास के लोगों की सलाह पर तुरंत अमल करने के बजाय बाल रोग विशेषज्ञ से सलाह लेना अधिक सुरक्षित है। खासकर यदि बच्चा बीमार हो, दस्त या उल्टी हो रही हो या पर्याप्त दूध नहीं पी रहा हो, तो चिकित्सकीय मार्गदर्शन जरूरी है। शुरुआती छह महीनों में बिना जरूरत पानी देने से बचना और पर्याप्त स्तनपान कराना शिशु की देखभाल का महत्वपूर्ण हिस्सा है।
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