Moon Rocket Crash : चांद की सतह पर 5 अगस्त को SpaceX के फाल्कन 9 रॉकेट के ऊपरी हिस्से के टकराने से बने गड्ढे की बेहद स्पष्ट तस्वीरें सामने आई हैं। अमेरिका की अंतरिक्ष एजेंसी NASA के लूनर रिकॉनिसेंस ऑर्बिटर (LRO) ने इस क्रेटर को अलग-अलग कोणों से कैमरे में कैद किया है। हाई-डेफिनिशन तस्वीरों में टक्कर के बाद चांद की सतह पर बने निशान और आसपास फैली हल्की व गहरी धारियां स्पष्ट नजर आ रही हैं।
11 और 12 अगस्त को ली गईं नई तस्वीरें
NASA के अनुसार, LRO ने इस क्षेत्र की नई तस्वीरें 11 और 12 अगस्त को ली थीं। इन तस्वीरों में 5 अगस्त को चांद की सतह से टकराए फाल्कन 9 रॉकेट के ऊपरी हिस्से से बना गड्ढा साफ दिखाई देता है। अलग-अलग एंगल से ली गई तस्वीरों ने वैज्ञानिकों को टक्कर के प्रभाव और चांद की सतह पर हुए बदलावों का अध्ययन करने का बेहतर अवसर दिया है।
करीब 60 फीट चौड़ा है टक्कर से बना गड्ढा
NASA के वैज्ञानिकों ने शुरुआती अध्ययन के आधार पर बताया कि रॉकेट की टक्कर से बना गड्ढा लगभग 60 फीट यानी करीब 18 मीटर चौड़ा है। इसकी गहराई 10 फीट से कम होने का अनुमान लगाया गया है। वैज्ञानिकों ने गड्ढे की गहराई का आकलन उसकी परछाई की लंबाई के आधार पर किया है। आने वाले अध्ययन से इसके आकार और संरचना को लेकर और जानकारी मिल सकती है।
जनवरी 2025 में लॉन्च हुआ था फाल्कन 9
जिस फाल्कन 9 रॉकेट के ऊपरी हिस्से के चांद से टकराने की बात सामने आई है, उसे जनवरी 2025 में लॉन्च किया गया था। यह रॉकेट Firefly Aerospace के Blue Ghost-1 लूनर लैंडर को लेकर गया था। यह एक निजी अंतरिक्ष मिशन था, जिसने बाद में चांद की सतह पर सफलतापूर्वक सॉफ्ट लैंडिंग की थी। मिशन के बाद रॉकेट का ऊपरी हिस्सा चांद की दिशा में चला गया।
दक्षिण कोरिया ने भी पहले जारी की थी तस्वीरें
यह इस घटना के बाद गड्ढे की पहली तस्वीरें नहीं हैं। दक्षिण कोरिया की अंतरिक्ष एजेंसी ने 6 अगस्त को इस क्षेत्र की कुछ तस्वीरें जारी की थीं। ये तस्वीरें उसके कोरिया पाथफाइंडर लूनर ऑर्बिटर यानी KPLO द्वारा 5 अगस्त को ली गई थीं। हालांकि, दक्षिण कोरिया की तस्वीरों की तुलना में NASA के LRO से प्राप्त नई तस्वीरें ज्यादा स्पष्ट और विस्तृत दिखाई दे रही हैं।
NASA को तस्वीरें लेने में छह दिन क्यों लगे?
NASA का लूनर रिकॉनिसेंस ऑर्बिटर वर्ष 2009 से चांद का अध्ययन कर रहा है। यह अंतरिक्ष यान लगभग हर दो घंटे में चांद के एक ध्रुव से दूसरे ध्रुव तक चक्कर लगाता है। इसके बावजूद किसी खास स्थान की तस्वीर तुरंत लेना संभव नहीं होता। अंतरिक्ष यान को उस समय का इंतजार करना पड़ता है जब संबंधित जगह उसके कैमरे की सही स्थिति में आए। इस मामले में वैज्ञानिकों को लगभग छह दिन इंतजार करना पड़ा।
सही एंगल और समय चुनना था बेहद जरूरी
गड्ढे की स्पष्ट तस्वीर लेने के लिए LRO को बिल्कुल सही कोण पर झुकाना पड़ा। अंतरिक्ष यान जब चांद की सतह से करीब 60 मील ऊपर से गुजर रहा था, तब उसके कैमरे को ठीक उसी स्थान की दिशा में रखना जरूरी था। NASA के अनुसार, समय का सही होना भी बेहद महत्वपूर्ण था। अगर कैमरा महज 10 सेकंड पहले या बाद में तस्वीर लेता, तो तस्वीर में गड्ढे की वास्तविक जगह से लगभग 10 मील दूर का हिस्सा दिखाई देता।
टक्कर से सतह की धूल और चट्टानें बाहर निकलीं
नई तस्वीरों में गड्ढे के आसपास हल्की और गहरी धारियां भी दिखाई दे रही हैं। NASA के मुताबिक, ये धारियां चांद की सतह पर मौजूद धूल और चट्टानों से बनी हैं। ये पदार्थ लंबे समय से सौर हवा, अंतरिक्ष से आने वाली कॉस्मिक किरणों और छोटे उल्कापिंडों की टक्कर से प्रभावित होते रहे हैं। रॉकेट के टकराने के दौरान सतह के करीब 1.5 फीट नीचे मौजूद सामग्री भी बाहर निकलकर आसपास फैल गई।
वैज्ञानिकों के लिए महत्वपूर्ण अध्ययन का मौका
SpaceX रॉकेट की यह टक्कर वैज्ञानिकों के लिए चांद की सतह और वहां मौजूद पदार्थों के व्यवहार को समझने का एक महत्वपूर्ण अवसर बन गई है। अलग-अलग कोणों से मिली हाई-क्वालिटी तस्वीरों के जरिए वैज्ञानिक क्रेटर के आकार, आसपास फैली सामग्री और टक्कर के प्रभाव का विश्लेषण कर सकते हैं। इससे भविष्य के चंद्र मिशनों के लिए सतह से जुड़ी जानकारी जुटाने में भी मदद मिल सकती है।
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