Arthritis Symptoms : क्या सुबह सोकर उठने के बाद आपके हाथ-पैरों में अकड़न महसूस होती है? क्या उंगलियों को मोड़ने, मुट्ठी बनाने या सामान्य रूप से चलने-फिरने में परेशानी होती है? अगर ऐसा बार-बार हो रहा है तो इसे केवल उम्र बढ़ने या थकान का असर समझना सही नहीं है। ये समस्याएं आर्थराइटिस यानी गठिया के शुरुआती संकेत भी हो सकती हैं। जोड़ों में लगातार दर्द, सूजन और अकड़न होने पर समय रहते ध्यान देना जरूरी है। दिल्ली स्थित श्री बालाजी एक्शन मेडिकल इंस्टीट्यूट के निदेशक एवं प्रमुख, ऑर्थोपेडिक्स डॉ. एच.एस. छाबड़ा के अनुसार, कुछ लक्षण ऐसे हैं जिन्हें नजरअंदाज करना आगे चलकर परेशानी बढ़ा सकता है।
आर्थराइटिस क्या है और इसके कितने प्रकार होते हैं?
आर्थराइटिस जोड़ों से जुड़ी बीमारी है, जिसमें दर्द, सूजन और अकड़न जैसी समस्याएं हो सकती हैं। इसके कई प्रकार होते हैं, लेकिन रूमेटाइड आर्थराइटिस और ऑस्टियोआर्थराइटिस सबसे प्रमुख हैं। दोनों बीमारियों के कारण और शरीर पर पड़ने वाले प्रभाव अलग-अलग होते हैं। इसलिए इनके लक्षणों को समझना और सही समय पर चिकित्सकीय सलाह लेना महत्वपूर्ण है।

रूमेटाइड आर्थराइटिस में इम्यून सिस्टम करता है जोड़ों पर हमला
डॉ. एच.एस. छाबड़ा के मुताबिक, रूमेटाइड आर्थराइटिस एक ऑटोइम्यून बीमारी है। इसमें शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता गलती से अपने ही जोड़ों के ऊतकों पर हमला करने लगती है। इसके कारण जोड़ों में सूजन, दर्द और अकड़न होने लगती है। इस बीमारी का एक प्रमुख संकेत सुबह उठने के बाद लंबे समय तक रहने वाली अकड़न है। कई मरीजों में यह परेशानी 30 मिनट से अधिक समय तक बनी रह सकती है। आमतौर पर हाथों और पैरों के छोटे जोड़ों पर इसका असर दिखाई दे सकता है।

ऑस्टियोआर्थराइटिस में धीरे-धीरे घिसने लगता है कार्टिलेज
ऑस्टियोआर्थराइटिस में जोड़ों के बीच मौजूद कार्टिलेज यानी उपास्थि धीरे-धीरे घिसने लगता है। इससे हड्डियों के बीच सुरक्षा और चिकनाई कम होने लगती है। परिणामस्वरूप चलने, सीढ़ियां चढ़ने, बैठने या कोई भारी सामान उठाने के दौरान दर्द महसूस हो सकता है। घुटनों, कूल्हों और हाथों के जोड़ों में इसकी परेशानी अधिक देखी जाती है। इसके अलावा जोड़ों में सूजन, गर्माहट और उंगलियों की पकड़ कमजोर होना भी संभावित लक्षण हैं।
आर्थराइटिस के इन संकेतों को बिल्कुल न करें नजरअंदाज
अगर सुबह उठने के बाद हाथ-पैरों में लंबे समय तक अकड़न रहती है, जोड़ों में सूजन या लालिमा दिखाई देती है अथवा चलने-फिरने में कठिनाई होती है, तो डॉक्टर से सलाह लें। लगातार दर्द और जोड़ों की कार्यक्षमता में कमी को सामान्य परेशानी समझकर टालना उचित नहीं है। समय पर जांच से बीमारी की पहचान और उपचार में मदद मिल सकती है।

सही जीवनशैली से जोड़ों की परेशानी को करें नियंत्रित
विशेषज्ञों के अनुसार, नियमित हल्का व्यायाम, संतुलित खानपान और शरीर का वजन नियंत्रित रखना जोड़ों के स्वास्थ्य के लिए फायदेमंद हो सकता है। जरूरत से ज्यादा शारीरिक दबाव डालने से बचें और अपनी क्षमता के अनुसार गतिविधियां करें। यदि दर्द, सूजन या अकड़न लगातार बनी रहे अथवा बढ़ती जाए तो विशेषज्ञ से परामर्श लेकर जरूरी जांच कराएं। स्वयं दवा लेने के बजाय डॉक्टर की सलाह से उपचार शुरू करना बेहतर है।

