Pappu Yadav threat: बिहार की राजनीति एक बार फिर उबाल पर है। पूर्णिया से सांसद पप्पू यादव ने गुरुवार को चौंकाने वाला बयान देते हुए दावा किया कि उनकी हत्या की साजिश रची जा रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि बिहार के दो बड़े नेता और दो वरिष्ठ अधिकारी मिलकर उनकी जान लेने की साजिश रच रहे हैं।

पप्पू यादव का कहना है कि उन्हें एक महीने पहले Y+ श्रेणी की सुरक्षा दी गई थी, लेकिन बिना किसी कारण के यह सुरक्षा अचानक हटा ली गई। उन्होंने इस कदम पर नाराजगी जताते हुए कहा कि उन्हें जान से मारने की साजिश हो रही है और यदि उनके साथ कुछ होता है, तो इसके लिए वही चार लोग जिम्मेदार होंगे।

संजय झा पर गंभीर आरोप
जनता दल (यूनाइटेड) के कार्यकारी अध्यक्ष संजय झा पर सीधे निशाना साधते हुए पप्पू यादव ने कहा कि वह इस साजिश के केंद्र में हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि,“संजय झा ने सम्राट चौधरी को मुख्यमंत्री बनाने के लिए पार्टी को बेच दिया है और नीतीश कुमार के बेटे निशांत कुमार की राजनीतिक संभावनाओं का सौदा कर रहे हैं।”पप्पू यादव ने यह भी कहा कि वह किसी भी हालत में भाजपा नेता को बिहार का मुख्यमंत्री नहीं बनने देंगे, और इसी कारण से उनकी जान के पीछे लोग पड़े हुए हैं।
सोशल मीडिया पर लिखा भावुक पोस्ट
पप्पू यादव ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ (पूर्व में ट्विटर) पर लिखा:“मैं सीमांचल, कोसी और मिथिला में भाजपा के खिलाफ अकेला संघर्ष कर रहा हूं। संजय झा को यह मंजूर नहीं है कि मैं भाजपा नेता को मुख्यमंत्री बनने से रोकूं, इसलिए मेरी जान का सौदा हो रहा है।”उन्होंने कहा कि वह पहले भी जनहित के मुद्दों पर कई बार सिस्टम और सत्ता से टकरा चुके हैं और अब एक बार फिर उनके खिलाफ षड्यंत्र रचा जा रहा है।
सुरक्षा बहाली की मांग
सांसद ने केंद्र और राज्य सरकार से Y+ सुरक्षा बहाल करने की अपील की है। उन्होंने कहा कि जब उन्हें पहले खतरा था, तभी सुरक्षा दी गई थी, फिर अब अचानक क्यों हटाई गई? उन्होंने मांग की कि सुरक्षा एजेंसियां पूरे मामले की जांच करें और साजिशकर्ताओं के नाम उजागर किए जाएं।
बिहार की राजनीति में नया मोड़
बिहार में आगामी विधानसभा चुनावों की सुगबुगाहट के बीच पप्पू यादव का यह बयान राजनीतिक भूचाल ला सकता है। जहां एक ओर उन्होंने भाजपा और जदयू नेताओं पर सीधा हमला बोला है, वहीं दूसरी ओर अपनी सुरक्षा को लेकर सवाल खड़े किए हैं।पप्पू यादव का यह बयान सिर्फ एक राजनीतिक आरोप नहीं बल्कि सुरक्षा व्यवस्था और लोकतांत्रिक अधिकारों पर भी सवाल उठाता है। अब देखना होगा कि सरकार और सुरक्षा एजेंसियां इस पर क्या कदम उठाती हैं और क्या वाकई बिहार की सियासत में कोई गहरी चाल चली जा रही है?










