MUDA land allocation: कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धारमैया और उनके परिवार को मैसूर शहरी विकास प्राधिकरण (MUDA) भूमि आवंटन विवाद में बड़ी राहत मिली है। रिटायर्ड जज पीएन देसाई की अध्यक्षता में गठित जांच आयोग ने अपनी रिपोर्ट में स्पष्ट किया है कि मुख्यमंत्री और उनके परिजनों के खिलाफ लगे आरोप निराधार हैं।

कर्नाटक मंत्रिमंडल ने इस रिपोर्ट को औपचारिक रूप से स्वीकार कर लिया है। इसके साथ ही आयोग ने कुछ अधिकारियों को अनियमितताओं के लिए जिम्मेदार ठहराते हुए उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की सिफारिश की है।

क्या था मामला?
यह विवाद वर्ष 2020 से 2024 के बीच मैसूर के विजयनगर लेआउट में हुए एक कथित भूमि आवंटन घोटाले से जुड़ा है। आरोप लगाए गए थे कि मुख्यमंत्री सिद्धारमैया की पत्नी पार्वती बीएम को मैसूरु तालुका के केसारे गांव (सर्वे नंबर 464) में उनकी 3.16 एकड़ जमीन के बदले MUDA द्वारा 14 विकसित प्लॉट आवंटित किए गए, जिनकी बाजार कीमत उनकी मूल जमीन से कहीं अधिक थी। सवाल यह उठाया गया था कि पार्वती का इस जमीन पर कोई वैध स्वामित्व नहीं था और उन्हें राजनीतिक प्रभाव के चलते अवैध लाभ मिला।
देसाई आयोग की जांच के निष्कर्ष
देसाई आयोग की रिपोर्ट में कहा गया है कि –भूमि आवंटन मुआवजे के रूप में किया गया था, जो कि नियमों के अंतर्गत वैध है।2017 में इस प्रस्ताव को पारित किया गया था, लेकिन इसे बाद में 2022 में लागू किया गया, जिसमें MUDA की मानक 50-50 अनुपात योजना के अनुसार विकसित भूमि दी गई। सिद्धारमैया या उनकी पत्नी द्वारा कोई फर्जीवाड़ा नहीं किया गया, और भूमि आवंटन प्रक्रिया में कोई अवैधता नहीं पाई गई।
मंत्रिमंडल की प्रतिक्रिया
कानून और संसदीय कार्य मंत्री एचके पाटिल ने प्रेस को संबोधित करते हुए कहा,“देसाई आयोग की रिपोर्ट दो खंडों में पेश की गई है, जिसमें स्पष्ट किया गया है कि मुख्यमंत्री या उनके परिवार के खिलाफ लगाए गए आरोपों में कोई सच्चाई नहीं है। कैबिनेट ने रिपोर्ट को स्वीकार कर लिया है और आयोग की सिफारिशों को लागू करने का निर्णय लिया गया है।”
अधिकारियों पर होगी कार्रवाई
रिपोर्ट में उन अधिकारियों की पहचान की गई है जिन्होंने प्रक्रिया के दौरान लापरवाही या अनियमितता बरती। आयोग ने उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की सिफारिश की है, जिस पर राज्य सरकार ने सहमति जताई है।
इससे पहले लोकायुक्त पुलिस भी दे चुकी है क्लीन चिट
इससे पहले लोकायुक्त पुलिस ने भी इस मामले में सबूतों के अभाव में मुख्यमंत्री सिद्धारमैया और उनके परिवार को क्लीन चिट दी थी। देसाई आयोग की रिपोर्ट से अब इस मामले पर पूर्ण विराम लगने की संभावना है।
MUDA भूमि आवंटन विवाद में मुख्यमंत्री सिद्धारमैया और उनके परिवार को बड़ी राहत मिल चुकी है। आयोग की रिपोर्ट और मंत्रिमंडल की स्वीकृति के बाद यह स्पष्ट हो गया है कि राजनीतिक स्तर पर लगाए गए आरोपों में कोई कानूनी दम नहीं था। अब निगाहें इस बात पर होंगी कि अनियमितता करने वाले अधिकारियों पर क्या कार्रवाई होती है।
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