Operation Jack Sparrow
Operation Jack Sparrow: मुंबई का छत्रपति शिवाजी महाराज अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा उस समय रणक्षेत्र में तब्दील हो गया, जब मलेशिया के तीन खूंखार आरोपियों ने वहां जमकर उत्पात मचाया। मैनचेस्टर (UK) से डिपोर्ट होकर मुंबई पहुंचे इन अपराधियों को जैसे ही अपनी गिरफ्तारी और प्रत्यर्पण का आभास हुआ, उन्होंने अपना आपा खो दिया। एयरपोर्ट सूत्रों के अनुसार, इन आरोपियों का व्यवहार बेहद आक्रामक था और उन्होंने वहां मौजूद सीआईएसएफ (CISF) के जवानों के साथ न केवल दुर्व्यवहार किया, बल्कि मारपीट पर भी उतारू हो गए। इस हंगामे के बाद एयरपोर्ट पर सुरक्षा बढ़ा दी गई और अथॉरिटीज को हाई अलर्ट पर रखा गया है।
यह पूरा मामला मलेशियाई पुलिस के एक बड़े मिशन ‘ऑपरेशन जैक स्पैरो’ से जुड़ा है। साल 2025 के अंत में पुलिस महानिदेशक दातुक सेरी मोह्द खालिद इस्माइल के नेतृत्व में इस ऑपरेशन की शुरुआत संगठित अपराध सिंडिकेट को जड़ से उखाड़ने के लिए की गई थी। इसी ऑपरेशन के तहत प्रतीफकुमार सेल्वराज, श्रीधरन सुब्रमणियन और नवींद्रेन राज कुमारसन की तलाश की जा रही थी। ये तीनों आरोपी मलेशिया से भागकर मुंबई आए और यहाँ से मैनचेस्टर की उड़ान भरी थी, लेकिन अंतरराष्ट्रीय प्रोटोकॉल और रेड कॉर्नर नोटिस के चलते यूके अथॉरिटीज ने उन्हें पकड़कर वापस भारत भेज दिया।
इंडिगो की फ्लाइट (6E-32) से मुंबई लाए जाने के बाद, तीनों आरोपियों को एयरपोर्ट के विशेष “रिफ्यूज़ल रूम” में कड़ी सुरक्षा के बीच रखा गया है। मलेशियाई एलीट पुलिस की एक विशेष टीम अगले 48 घंटों में मुंबई पहुंचने वाली है, जो आधिकारिक तौर पर इन तीनों की कस्टडी लेगी। प्रत्यर्पण की इस प्रक्रिया को पूरा करने के लिए मुंबई इमीग्रेशन विभाग और मलेशियाई पुलिस लगातार एक-दूसरे के संपर्क में हैं। इन अपराधियों का आखिरी ट्रांजिट पॉइंट मुंबई था, इसलिए कानूनी रूप से उन्हें यहीं से मलेशिया भेजा जाना अनिवार्य है।
इस पूरी घटना ने भारतीय सुरक्षा और इमीग्रेशन व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। जांच एजेंसियां इस गुत्थी को सुलझाने में जुटी हैं कि मलेशिया में इतने गंभीर अपराध दर्ज होने के बावजूद, ये तीनों आरोपी मुंबई एयरपोर्ट से अंतरराष्ट्रीय उड़ान भरने में कैसे सफल रहे। क्या इन्होंने फर्जी पासपोर्ट और दस्तावेजों का सहारा लिया? या फिर अंतरराष्ट्रीय रेड कॉर्नर नोटिस डेटाबेस को चेक करने में कोई तकनीकी चूक हुई? इन सवालों के जवाब तलाशने के लिए एयरपोर्ट अथॉरिटीज गहन जांच कर रही हैं।
पकड़े गए इन तीनों आरोपियों का आपराधिक रिकॉर्ड रोंगटे खड़े कर देने वाला है। इन पर मलेशिया के विभिन्न हिस्सों में सामूहिक रूप से 80 से अधिक आपराधिक मामले और 34 ड्रग्स से जुड़े केस दर्ज हैं। इनके गुनाहों की सूची में शामिल हैं:
निर्मम हत्या: क्लांग के तमन सेंटोसा में हुई एक सनसनीखेज हत्या का मामला।
फायरिंग और हिंसा: ब्रिकफील्ड्स और चेरास जैसे इलाकों में वर्चस्व कायम करने के लिए सरेआम गोलीबारी।
अवैध सिंडिकेट: जबरन वसूली, आगजनी और हथियारों की तस्करी के जरिए ‘अवैध मुनाफा’ कमाना।
मुंबई एयरपोर्ट पर हुआ यह घटनाक्रम अंतरराष्ट्रीय पुलिस सहयोग की महत्ता को दर्शाता है। मैनचेस्टर से मुंबई और फिर मुंबई से मलेशिया तक की यह कड़ी साबित करती है कि अपराधियों के लिए अब सरहदें पार करना सुरक्षित नहीं रह गया है। फिलहाल, मुंबई पुलिस और इमीग्रेशन विभाग पूरी सावधानी बरत रहे हैं ताकि जब तक मलेशियाई टीम यहाँ न पहुंचे, ये अपराधी दोबारा कोई हंगामा न कर सकें।
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