Mundkatiya Temple: गणेश चतुर्थी का पर्व आते ही देशभर में गणपति बप्पा के जयकारे गूंजने लगते हैं। इस वर्ष गणेश उत्सव की शुरुआत 27 अगस्त से हो रही है, और भक्त एक बार फिर मंदिरों में दर्शन के लिए उमड़ेंगे। भारत में भगवान गणेश के कई प्रसिद्ध मंदिर हैं, लेकिन उत्तराखंड के रुद्रप्रयाग जिले में स्थित मुंडकटिया मंदिर अपनी अनोखी मान्यता और रहस्यमयी इतिहास के कारण सबसे अलग है। क्या है मुंडकटिया मंदिर की खासियत? यह मंदिर भगवान गणेश को समर्पित है, लेकिन यहां की सबसे अनोखी बात यह है कि गणेश जी की मूर्ति बिना सिर की है। ‘मुंडकटिया’ नाम ही अपने आप में इसका संकेत देता है — ‘मुंड’ यानी सिर और ‘कटिया’ यानी कटा हुआ। इस मंदिर में श्रद्धालु बिना सिर वाले गणेश जी के दर्शन करते हैं, और मानते हैं कि यही वह स्थान है जहां भगवान शिव ने अपने पुत्र गणेश का सिर काटा था। कहां स्थित है यह मंदिर? मुंडकटिया मंदिर उत्तराखंड की पवित्र केदारनाथ घाटी में स्थित है। यह गौरीकुंड से लगभग 3 किलोमीटर दूर और त्रियुगी नारायण मंदिर के समीप है। कठिन पहाड़ी मार्ग होने के बावजूद, श्रद्धालुओं की आस्था उन्हें यहां तक खींच लाती है। हर साल हजारों भक्त यहां दर्शन के लिए आते हैं, खासकर गणेश चतुर्थी के अवसर पर। पौराणिक कथा से जुड़ा है मंदिर का इतिहास पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, एक बार जब माता पार्वती स्नान कर रही थीं, तो उन्होंने अपने उबटन से एक बालक बनाया और उसे द्वारपाल बनाकर बाहर खड़ा कर दिया। माता ने आदेश दिया कि कोई भी अंदर न आए। तभी भगवान शिव वहां पहुंचे, लेकिन बालक गणेश ने उन्हें अंदर जाने से रोक दिया। यह देखकर शिव क्रोधित हो उठे और क्रोध में आकर गणेश का सिर काट दिया। जब पार्वती ने यह देखा तो वह अत्यंत दुखी हुईं। फिर भगवान शिव ने अपने क्रूर कृत्य पर पश्चाताप करते हुए गणेश को पुनर्जीवित किया और हाथी का सिर लगाकर उन्हें ‘विघ्नहर्ता’ का आशीर्वाद दिया। स्थानीय लोगों की मान्यता है कि यह पूरा घटनाक्रम मुंडकटिया मंदिर स्थल पर ही घटित हुआ था। आज भी जिंदा है आस्था इस मंदिर में भले ही गणेश जी की प्रतिमा के सिर का अभाव हो, लेकिन श्रद्धालुओं की भक्ति में कोई कमी नहीं है। यहां भक्त बिना सिर वाली मूर्ति को ही पूर्ण गणेश मानकर पूजा करते हैं। गणेश चतुर्थी के दौरान यहां विशेष पूजा, भजन-कीर्तन और धार्मिक आयोजनों का आयोजन किया जाता है। मुंडकटिया मंदिर न केवल एक धार्मिक स्थल है, बल्कि यह हमारी पौराणिक संस्कृति और लोक मान्यताओं का प्रतीक भी है। यहां की अनोखी परंपरा इसे भारत के सबसे रहस्यमयी गणेश मंदिरों में शामिल करती है। अगर आप आध्यात्मिकता और रहस्य से जुड़ी यात्रा पर जाना चाहते हैं, तो इस गणेश चतुर्थी पर मुंडकटिया मंदिर जरूर जाएं। Read More : Patna Indrapuri Violence: पटना के इंद्रपुरी में दो मासूमों की मौत के बाद बवाल, भाजपा नेता के काफिले पर हमला, कई गाड़ियां फूंकीं
















