Iran US Muscat Talks
Iran US Muscat Talks: ईरान और अमेरिका के बीच लंबे समय से चली आ रही अनिश्चितता के बादल अब छंटने लगे हैं। ईरान के विदेश मंत्री सैय्यद अब्बास अराघची ने आधिकारिक रूप से पुष्टि की है कि दोनों देशों के बीच परमाणु वार्ता का समय और स्थान तय हो गया है। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ (X) पर जानकारी साझा करते हुए अराघची ने बताया कि ओमान की राजधानी मस्कट में शुक्रवार सुबह लगभग 10 बजे यह बातचीत शुरू होगी। अराघची ने ओमान सरकार का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि उनके द्वारा की गई व्यवस्थाएं सराहनीय हैं। इस घोषणा ने उन सभी अटकलों पर विराम लगा दिया है जिनमें वार्ता के रद्द होने की आशंका जताई जा रही थी।
इस बैठक का आयोजन इतना सरल नहीं था। पिछले कई दिनों से दोनों देशों के बीच वार्ता के प्रारूप, स्थान और एजेंडे को लेकर गहरा गतिरोध बना हुआ था। शुरुआत में यह चर्चा तुर्की के इस्तांबुल में प्रस्तावित थी, लेकिन ईरान ने इसे ओमान में स्थानांतरित करने की शर्त रखी। ईरान का तर्क था कि वह केवल द्विपक्षीय प्रारूप में परमाणु मुद्दों और अमेरिकी प्रतिबंधों को हटाने पर ही चर्चा करना चाहता है। दूसरी ओर, अमेरिका ने इस बदलाव पर पहले आपत्ति जताई थी, लेकिन अंततः कूटनीतिक दबाव और मध्य पूर्वी देशों की लॉबिंग के बाद वाशिंगटन ने मस्कट के लिए अपनी सहमति दे दी।
अमेरिका और ईरान के बीच सबसे बड़ा मतभेद वार्ता के एजेंडे को लेकर है। जो बाइडन प्रशासन के विपरीत, वर्तमान ट्रंप प्रशासन का रुख काफी सख्त है। अमेरिका चाहता था कि इस वार्ता में ईरान के बैलिस्टिक मिसाइल कार्यक्रम और मध्य पूर्व में उसके क्षेत्रीय प्रॉक्सी संगठनों की गतिविधियों को भी शामिल किया जाए। हालांकि, ईरान ने अपने रुख को स्पष्ट करते हुए कहा है कि वह परमाणु कार्यक्रम और आर्थिक प्रतिबंधों के अलावा किसी अन्य विषय पर बात नहीं करेगा। अमेरिकी अधिकारियों ने मस्कट जाने की पुष्टि तो की है, लेकिन साथ ही यह भी कहा है कि दोनों पक्षों के बीच अविश्वास की खाई अभी भी बहुत गहरी है।
परमाणु वार्ता की घोषणा के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्लाह अली खामेनेई को सीधे शब्दों में चेतावनी दी है। ट्रंप ने कहा है कि ईरान को अपनी वर्तमान स्थिति और परमाणु महत्वाकांक्षाओं को लेकर “बहुत चिंतित” होना चाहिए। यह कड़ा संदेश जून 2025 की उस पृष्ठभूमि के बाद आया है, जब इजरायल और ईरान के बीच 12 दिनों तक भीषण युद्ध चला था। उस दौरान अमेरिकी हमलों ने ईरान की कई महत्वपूर्ण परमाणु सुविधाओं को भारी क्षति पहुँचाई थी। ट्रंप प्रशासन का यह सख्त लहजा संकेत देता है कि अमेरिका किसी भी कीमत पर ईरान को परमाणु हथियार हासिल करने नहीं देगा।
ओमान ऐतिहासिक रूप से अमेरिका और ईरान के बीच एक विश्वसनीय सेतु का काम करता रहा है। ‘पश्चिम का स्विट्जरलैंड’ कहे जाने वाले इस देश ने पहले भी कई बार दोनों कट्टर दुश्मनों को मेज पर बिठाया है। पिछले साल भी मस्कट में गुप्त वार्ताएं हुई थीं। हालांकि, इस बार चुनौतियां कहीं अधिक जटिल हैं। इजरायल के साथ युद्ध के बाद ईरान के परमाणु कार्यक्रम को जो नुकसान हुआ है, उससे ईरान रक्षात्मक मुद्रा में है, जबकि अमेरिका ‘अधिकतम दबाव’ की नीति अपना रहा है। क्षेत्रीय स्थिरता के लिए यह वार्ता अत्यंत महत्वपूर्ण है, लेकिन दोनों पक्षों के विपरीत हितों को देखते हुए इसके परिणामों को लेकर संशय बरकरार है।
मस्कट की यह बैठक मध्य पूर्व के भविष्य के लिए निर्णायक साबित हो सकती है। यदि दोनों देश किसी न्यूनतम सहमति पर पहुँचते हैं, तो इससे वैश्विक तेल बाजारों और सुरक्षा परिदृश्य को बड़ी राहत मिलेगी। लेकिन यदि वार्ता बिना किसी परिणाम के समाप्त होती है, तो क्षेत्र में एक बार फिर सैन्य तनाव बढ़ने की आशंका है। पूरी दुनिया की नजरें अब शुक्रवार सुबह ओमान की ओर टिकी हैं, जहाँ दशकों पुराने इस विवाद का नया अध्याय लिखा जाना है।
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