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Myanmar Elections 2025 : म्यांमार में 28 दिसंबर से आम चुनाव की घोषणा, निष्पक्षता पर उठे सवाल

Myanmar Elections 2025 : म्यांमार की सैन्य सरकार ने आखिरकार बहुप्रतीक्षित आम चुनाव की तारीख का ऐलान कर दिया है। संघीय चुनाव आयोग ने सोमवार को घोषणा की कि 28 दिसंबर 2025 से चुनाव का पहला चरण शुरू होगा। हालांकि, इस चुनाव की स्वतंत्रता और निष्पक्षता को लेकर देश और विदेश में गहरी शंकाएं व्यक्त की जा रही हैं।

चुनाव आयोग का ऐलान और पंजीकरण

सरकारी मीडिया के अनुसार, लगभग 55 राजनीतिक दलों ने चुनाव के लिए पंजीकरण कराया है, जिनमें से 9 दल देशभर में चुनाव लड़ने की तैयारी में हैं। आयोग ने यह भी स्पष्ट किया कि चुनाव कई चरणों में कराए जाएंगे और प्रत्येक चरण की तारीख अलग-अलग घोषित की जाएगी।

लोकतंत्र समर्थक दलों का बहिष्कार

सैन्य तख्तापलट के बाद देश में राजनीतिक माहौल पूरी तरह से बदल गया है। प्रमुख लोकतांत्रिक दल नेशनल लीग फॉर डेमोक्रेसी (NLD) और अन्य विपक्षी ताकतों ने चुनाव में भाग लेने से इनकार कर दिया है। उनका आरोप है कि यह चुनाव सिर्फ सेना प्रमुख मिन आंग ह्लाइंग की सत्ता को वैधता देने की कवायद है। एनएलडी के प्रवक्ताओं का कहना है कि जब तक देश में लोकतंत्र बहाल नहीं होता, तब तक किसी भी चुनाव की कोई वैधता नहीं मानी जा सकती।

2021 का सैन्य तख्तापलट और मौजूदा हालात

गौरतलब है कि फरवरी 2021 में म्यांमार की सेना ने तख्तापलट करते हुए आंग सान सू की की निर्वाचित सरकार को हटा दिया था। सेना ने चुनाव में धोखाधड़ी का आरोप लगाया, जबकि अंतरराष्ट्रीय संगठनों जैसे एशियन नेटवर्क फॉर फ्री इलेक्शन्स और कार्टर सेंटर ने इन आरोपों को खारिज कर दिया था। उन्होंने कहा था कि 2020 का चुनाव जनता की इच्छा का प्रतिबिंब था।

तख्तापलट के बाद से म्यांमार में गृहयुद्ध जैसे हालात हैं। पीपुल्स डिफेंस फोर्स (PDF), अराकान आर्मी, और ताआंग नेशनल लिबरेशन आर्मी जैसे विद्रोही समूह देश के कई हिस्सों पर नियंत्रण बनाए हुए हैं। कई क्षेत्रों में सेना को भारी प्रतिरोध का सामना करना पड़ रहा है।

आपातकाल में ढील और चुनाव की तैयारी

हाल ही में सेना प्रमुख मिन आंग ह्लाइंग के प्रशासन ने देश के कुछ क्षेत्रों से आपातकाल हटाने की घोषणा की थी। इसके साथ ही दिसंबर और जनवरी में चुनाव की तैयारियां शुरू करने की बात कही गई थी। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह कदम अंतरराष्ट्रीय दबाव को कम करने और सत्ता पर अपनी पकड़ बनाए रखने की रणनीति का हिस्सा है।

अंतरराष्ट्रीय समुदाय की नजर

अंतरराष्ट्रीय समुदाय, खासकर संयुक्त राष्ट्र, अमेरिका और यूरोपीय संघ, म्यांमार की स्थिति पर करीबी नजर बनाए हुए हैं। ये संस्थाएं लगातार लोकतंत्र की बहाली और मानवाधिकारों की रक्षा की मांग कर रही हैं। संभावना है कि चुनाव में अंतरराष्ट्रीय पर्यवेक्षकों को सीमित या बिल्कुल भी अनुमति नहीं दी जाएगी, जिससे निष्पक्षता को लेकर संदेह और गहराएगा।

क्या यह चुनाव म्यांमार के लिए बदलाव लाएगा?

हालांकि चुनाव की तारीख घोषित कर दी गई है, लेकिन जनता और लोकतंत्र समर्थक समूहों में विश्वास की भारी कमी है। बिना विपक्ष, पारदर्शिता और स्वतंत्रता के यह चुनाव केवल सैन्य शासन की वैधता के प्रतीक बनकर रह जाएंगे। अभी तक के संकेत यही दिखाते हैं कि यह चुनाव जनता की आकांक्षाओं का नहीं, बल्कि एक राजनीतिक गणना का परिणाम होगा।

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