Myanmar Training Case: छह यूक्रेनी नागरिकों को डिफॉल्ट बेल, इमिग्रेशन एक्ट के आरोपों से भी डिस्चार्ज

म्यांमार ट्रेनिंग केस में दिल्ली कोर्ट का बड़ा फैसला, छह यूक्रेनी नागरिकों को मिली डिफॉल्ट बेल, इमिग्रेशन एक्ट के आरोपों से भी किया गया डिस्चार्ज, अदालत के आदेश के बाद मामले ने लिया नया मोड़, आखिर इन विदेशी नागरिकों पर क्या आरोप लगाए गए थे, कोर्ट ने किन आधारों पर उन्हें राहत दी और अब केस की आगे की कानूनी दिशा क्या होगी?

Myanmar Training Case : दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट स्थित विशेष एनआईए अदालत ने म्यांमार जाकर जातीय सशस्त्र समूहों को कथित तौर पर प्रशिक्षण देने के आरोप में गिरफ्तार छह यूक्रेनी नागरिकों को डिफॉल्ट बेल दे दी है। विशेष न्यायाधीश प्रशांत शर्मा ने 23 सितंबर 2026 को आदेश पारित करते हुए कहा कि मामले में यूएपीए के तहत जांच अभी पूरी नहीं हुई है और 180 दिनों की वैधानिक अवधि समाप्त हो चुकी है।

ads

छह यूक्रेनी नागरिकों को मिली जमानत

जिन आरोपियों को अदालत से राहत मिली है, उनमें हुरबा पेट्रो, स्लिवियाक तारास, इवान सुखमानोव्स्की, स्टेफानकिव मारियान, होंचारुक मैक्सिम और कामिन्स्की विक्टर शामिल हैं। अदालत के सामने मुख्य सवाल यह था कि क्या जांच एजेंसी की ओर से निर्धारित समयसीमा के भीतर यूएपीए से संबंधित पूरी चार्जशीट दाखिल की गई थी।

Adst

180 दिन की अवधि समाप्त होने का मामला

अदालत ने अपने आदेश में कहा कि एनआईए ने इमिग्रेशन एंड फॉरेनर्स एक्ट, 2025 की धारा 21 और 23 से संबंधित चार्जशीट दाखिल की है, लेकिन यूएपीए के तहत आगे की जांच जारी है। अदालत के मुताबिक, इस कानून के तहत जांच के लिए निर्धारित 180 दिनों की अवधि समाप्त हो चुकी है। इसी आधार पर आरोपियों के डिफॉल्ट बेल के अधिकार पर विचार किया गया।

दिल्ली हाईकोर्ट के पुराने फैसले का हवाला

विशेष अदालत ने डिफॉल्ट बेल देते समय दिल्ली हाईकोर्ट के 2022 के ‘चित्रा रामकृष्णा बनाम सीबीआई’ फैसले का भी संदर्भ लिया। अदालत ने संबंधित कानूनी सिद्धांतों को ध्यान में रखते हुए सभी छह आरोपियों को डिफॉल्ट बेल देने का आदेश दिया। हालांकि, यह राहत जांच के समाप्त होने या आरोपों के खत्म होने के समान नहीं है।

प्रत्येक आरोपी को जमा करनी होगी रकम

कोर्ट ने विदेशी नागरिकों के लिए श्योरिटी बॉन्ड की शर्त हटाते हुए अलग व्यवस्था तय की। आदेश के अनुसार प्रत्येक आरोपी को एक लाख रुपये का पर्सनल बॉन्ड और एक लाख रुपये की नकद राशि जमा करनी होगी। अदालत ने BNSS की धारा 490 का उल्लेख करते हुए कहा कि न्यायालय को बेल बॉन्ड के बदले रकम या सरकारी प्रॉमिसरी नोट स्वीकार करने का अधिकार है।

Adst

दिल्ली से बाहर जाने पर लगी पाबंदी

जमानत के दौरान सभी छह आरोपियों को राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली में रहने का निर्देश दिया गया है। अदालत की पूर्व अनुमति के बिना वे दिल्ली से बाहर नहीं जा सकेंगे। इसके अलावा उन्हें किसी गवाह को प्रभावित करने या सबूतों के साथ छेड़छाड़ नहीं करने का निर्देश दिया गया है। उन्हें अपने पते पर उपलब्ध रहना होगा और पता बदलने की स्थिति में जांच अधिकारी को पहले सूचना देनी होगी।

जांच अधिकारी को मोबाइल नंबर देना जरूरी

अदालत ने आरोपियों को अपना मोबाइल नंबर जांच अधिकारी को उपलब्ध कराने और उसे हमेशा सक्रिय रखने का भी निर्देश दिया है। जांच अधिकारी द्वारा बुलाए जाने पर उन्हें जांच में शामिल होना होगा। इस तरह डिफॉल्ट बेल मिलने के बावजूद आरोपियों पर जांच प्रक्रिया में सहयोग करने से जुड़ी कई शर्तें लागू रहेंगी।

इमिग्रेशन एक्ट की धाराओं से भी मिली राहत

अदालत ने छह आरोपियों को Immigration and Foreigners Act, 2025 की धारा 21 और 23 के तहत चल रही कार्यवाही से भी डिस्चार्ज कर दिया। कोर्ट ने 18 सितंबर 2026 के कंपाउंडिंग आदेश का उल्लेख किया। इसके तहत संबंधित प्राधिकरण ने धारा 25(5) के तहत इन अपराधों को कंपाउंड करने की अनुमति दी थी।

5.50 लाख रुपये भुगतान का भी जिक्र

कोर्ट के आदेश में दर्ज है कि संबंधित आरोपियों ने कंपाउंडिंग प्रक्रिया के तहत प्रत्येक ने 5.50 लाख रुपये का भुगतान किया। अदालत ने इस तथ्य को भी ध्यान में रखा और धारा 21 तथा 23 के तहत चल रही कार्यवाही से आरोपियों को डिस्चार्ज कर दिया।

अमेरिकी नागरिक मैथ्यू वैनडाइक को भी राहत

इसी आदेश में अमेरिकी नागरिक मैथ्यू वैनडाइक से जुड़ी राहत का भी उल्लेख किया गया है। अदालत ने उन्हें एक लाख रुपये की श्योरिटी बॉन्ड राशि के स्थान पर एक लाख रुपये नकद जमा करने की अनुमति दी। पासपोर्ट वापस करने और विदेश यात्रा से जुड़ी अन्य मांगों पर तत्काल अंतिम राहत नहीं दी गई, लेकिन भविष्य में इन मांगों को अदालत के सामने उठाने की स्वतंत्रता रखी गई।

यूएपीए की जांच अभी भी जारी

अदालत के आदेश का महत्वपूर्ण पहलू यह है कि डिफॉल्ट बेल को यूएपीए के आरोपों से पूरी तरह मुक्ति नहीं माना गया है। आदेश में स्पष्ट किया गया है कि यूएपीए के तहत आगे की जांच जारी है। जमानत 180 दिनों की निर्धारित अवधि में जांच पूरी नहीं होने के आधार पर मिली है। जेल अधीक्षक को भी निर्देश दिया गया कि आरोपियों के वकीलों को आवश्यक दस्तावेजों पर हस्ताक्षर कराने की अनुमति दी जाए, ताकि वे अगले दिन पर्सनल बॉन्ड जमा कर सकें।

Read More  :  Crow in Dream : सपने में काला कौवा दिखे तो न करें नजरअंदाज, जानें क्या संकेत मिलते हैं

Chandan Das

Chandan Das

Writer & Blogger

All Posts
पिछले पोस्ट
अगला पोस्ट

ताज़ा खबरे

  • All Posts
  • FIFA World Cup 2026
  • Thetarget365
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अन्य
  • अपराध
  • कारोबार
  • कृषि
  • खेल
  • छत्तीसगढ़
  • टेक
  • ट्रेंड
  • ताज़ा खबर
  • धर्म
  • पशु-पक्षी
  • मनोरंजन
  • मौसम
  • राजनीति
  • राष्ट्रीय
  • विचार/लेख
  • शिक्षा और नौकरी
  • साहित्य/मीडिया
  • सेहत-फिटनेस
    •   Back
    • मध्य प्रदेश
    • पश्चिम बंगाल
    • उत्तर प्रदेश
    • बिहार
    • महाराष्ट्र
    • झारखंड
    • राजस्थान
    • ओडिशा

© 2026 | All Rights Reserved | Thetarget365.com | Made By Top News Portal Development Company. 

Contacts

Call Us At – +91-:9406130006
WhatsApp – +91 62665 68872
Mail Us At – thetargetweb@gmail.com
Meet Us At – Shitla Ward, Ambikapur Dist. Surguja Chhattisgarh.497001.

Adst