Nag Panchami 2026 : श्रावण मास के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को नाग पंचमी का पर्व श्रद्धा और धार्मिक आस्था के साथ मनाया जाता है। इस दिन भगवान शिव के साथ नाग देवता की पूजा करने की परंपरा प्राचीन काल से चली आ रही है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, नाग पंचमी पर नाग देवताओं का विधिपूर्वक पूजन करने से जीवन में सुख-शांति आती है और कालसर्प दोष के नकारात्मक प्रभाव कम हो सकते हैं।

नाग देवता को अर्पित किए जाते हैं ये पदार्थ
नाग पंचमी के अवसर पर श्रद्धालु नाग देवता और भगवान भोलेनाथ को जल, दूध, फूल, अक्षत तथा अन्य पूजन सामग्री अर्पित करते हैं। इस दिन विशेष रूप से आठ प्रमुख नागों की पूजा का उल्लेख धार्मिक परंपराओं में मिलता है। मान्यता है कि इन आठ नागों का स्मरण और पूजन करने से व्यक्ति को आध्यात्मिक शांति तथा सकारात्मक ऊर्जा प्राप्त होती है।

शेषनाग यानी आदिशेष का धार्मिक महत्व
आठ प्रमुख नागों में शेषनाग का स्थान अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है। उन्हें अनंत और आदिशेष नामों से भी जाना जाता है। धार्मिक ग्रंथों में शेषनाग को नागों का राजा बताया गया है। मान्यता है कि भगवान विष्णु क्षीरसागर में शेषनाग की शैया पर विराजमान रहते हैं। इसी वजह से शेषनाग को संरक्षण, स्थिरता और अनंत शक्ति का प्रतीक माना जाता है।
वासुकी नाग का भगवान शिव से संबंध
वासुकी को भगवान शिव का परम भक्त माना जाता है। पौराणिक मान्यता के अनुसार भगवान शिव ने वासुकी नाग को अपने गले में धारण किया हुआ है। समुद्र मंथन की प्रसिद्ध कथा में भी वासुकी की महत्वपूर्ण भूमिका बताई गई है। देवताओं और असुरों ने मंदार पर्वत को मथने के लिए वासुकी नाग को रस्सी के रूप में इस्तेमाल किया था।
पद्म और महापद्म नाग की मान्यता
पद्म नाग को धार्मिक परंपरा में शांति, समृद्धि और शुभता से जोड़कर देखा जाता है। मान्यता है कि गोमती नदी के आसपास स्थित नेमिषारण्य क्षेत्र में पद्म नागों का प्रभाव रहा था। वहीं महापद्म नाग का भी विभिन्न धार्मिक ग्रंथों में उल्लेख मिलता है। इन दोनों नागों को नाग वंश की महत्वपूर्ण कड़ी माना जाता है।

तक्षक नाग का महाभारत से संबंध
तक्षक नाग का उल्लेख महाभारत की कथाओं में प्रमुखता से मिलता है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार तक्षक नाग कश्यप और कद्रू की संतान माने जाते हैं। सर्प वंश से जुड़ी कथाओं में तक्षक का विशेष स्थान है। नाग पंचमी पर उनका स्मरण करने की परंपरा भी कई स्थानों पर देखने को मिलती है।
कुलिक नाग का धार्मिक महत्व
कुलिक नाग को भी आठ प्रमुख नागों में शामिल किया जाता है। धार्मिक मान्यताओं में उनका संबंध ब्राह्मण वंश से बताया गया है। पौराणिक कथाओं में कुलिक नाग का संबंध सृष्टिकर्ता भगवान ब्रह्मा से भी जोड़ा जाता है। नाग पंचमी के अवसर पर कुलिक नाग का स्मरण धार्मिक दृष्टि से शुभ माना जाता है।
कर्कोटक नाग को माना जाता है बुद्धिमान
कर्कोटक नाग का उल्लेख विभिन्न पौराणिक कथाओं में मिलता है। धार्मिक मान्यताओं में उन्हें अत्यंत बुद्धिमान और समझदार नाग माना गया है। उनका संबंध भगवान शिव से भी जोड़ा जाता है। नाग पंचमी के दिन कर्कोटक नाग का पूजन करने की परंपरा कुछ क्षेत्रों में विशेष रूप से प्रचलित है।
शंखपाल नाग से जुड़ी समृद्धि की मान्यता
शंखपाल को आठ प्रमुख नागों में एक महत्वपूर्ण नाग माना जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार उनका स्वरूप सफेद और शंख के समान पवित्र बताया गया है। कहा जाता है कि शंखपाल नाग की श्रद्धापूर्वक पूजा करने से घर में सुख, शांति और समृद्धि का वातावरण बनता है।
शिव पुराण में नागों की महिमा
धार्मिक ग्रंथों में नागों की उत्पत्ति और उनके महत्व का विस्तृत वर्णन मिलता है। शिव पुराण में भी सर्पों से जुड़ी विभिन्न मान्यताओं का उल्लेख किया गया है। नाग पंचमी पर नाग देवता की पूजा और भगवान शिव को जल अर्पित करने की परंपरा इसी धार्मिक आस्था से जुड़ी मानी जाती है।
कालसर्प दोष को लेकर क्या है मान्यता
ज्योतिषीय मान्यताओं में कालसर्प दोष को जीवन में आने वाली विभिन्न बाधाओं से जोड़ा जाता है। कहा जाता है कि इसके कारण व्यक्ति को मानसिक अशांति, परेशानियों और रुकावटों का सामना करना पड़ सकता है। धार्मिक विश्वास के अनुसार, नाग पंचमी पर आठ प्रमुख नागों की श्रद्धापूर्वक पूजा और भगवान शिव का अभिषेक करने से कालसर्प दोष के कथित नकारात्मक प्रभाव कम हो सकते हैं और मन को शांति मिलती है।
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