National Bird Killing
National Bird Killing: हमारे देश के राष्ट्रीय पक्षी मोर की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाती है, क्योंकि यह न केवल हमारी प्राकृतिक विरासत का प्रतीक है, बल्कि इसे वन्यजीव संरक्षण अधिनियम के तहत विशेष सुरक्षा भी प्राप्त है। ऐसे में, तमिलनाडु के करूर जिले से सामने आई 18 मोरों की निर्मम हत्या की खबर ने पूरे देश को हैरान और स्तब्ध कर दिया है। एक साथ इतनी बड़ी संख्या में मोरों को मारना न केवल जघन्य अपराध है, बल्कि पर्यावरण और वन्यजीव सुरक्षा के प्रति गंभीर उदासीनता को भी दर्शाता है। यह घटना स्पष्ट करती है कि स्थानीय स्तर पर मानव-वन्यजीव संघर्ष कितना विकराल रूप ले चुका है।
करूर जिले के अथीपालायम गांव के पास यह दर्दनाक और चौंकाने वाली घटना सामने आई है। 45 वर्षीय किसान सुब्रमणि ने अपने मूंगफली के खेत को लगातार नुकसान पहुंचा रहे मोरों से छुटकारा पाने के लिए एक अमानवीय और अवैध रास्ता अपनाया। किसान ने अपने खेतों को बचाने की सनक में कानून की परवाह न करते हुए जहर का सहारा लिया। इस जहरीले जाल के कारण 18 मोरों की मौत हो गई, जिसने गांव वालों और वन विभाग दोनों को गहरे सदमे में डाल दिया है। यह दुर्भाग्यपूर्ण घटना उस असंतुलन को उजागर करती है जो खेती और वन्यजीवों के बीच पैदा हो रहा है।
वन विभाग को बुधवार के दिन अपने विश्वसनीय खबरी (मुखबिर) से क्षेत्र में कुछ मोरों के मृत पाए जाने की सूचना मिली। इस टिप के आधार पर, जिला वन अधिकारी (DFO) अपनी टीम के साथ तत्काल घटनास्थल पर पहुंचे। मौके पर पहुंचने पर, टीम ने पाया कि आरोपी किसान सुब्रमणि के खेत में कई मृत मोर पड़े थे। प्रारंभिक जांच में यह सामने आया कि सुब्रमणि ने जहर को अनाज में मिलाकर खेत में जानबूझकर रखा था।
इस जहरीले अनाज को खाने से 10 नर मोर और 8 मादा मोरों की दर्दनाक मौत हो गई। वन विभाग ने तुरंत स्थानीय पुलिस को सूचना दी और संयुक्त जांच शुरू की गई।जांच के दौरान, पशु चिकित्सकों की टीम ने मृत मोरों का पोस्टमॉर्टम किया और वैज्ञानिक रूप से यह पुष्टि की कि सभी मोरों की मौत जहर के सेवन से हुई है। इस पुष्टि के बाद, पुलिस और वन विभाग ने तत्काल कार्रवाई करते हुए आरोपी किसान सुब्रमणि को गिरफ्तार कर लिया।
मोरों को मारना वन्यजीव संरक्षण अधिनियम (Wildlife Protection Act), 1972 के तहत एक गैर-जमानती और सख्त अपराध है। इस अधिनियम के तहत, राष्ट्रीय पक्षी होने के नाते, मोर को विशेष सुरक्षा प्रदान की गई है और किसी भी कारण से उन्हें नुकसान पहुंचाना या उनका शिकार करना सख्त मना है। सुब्रमणि पर अब इस अधिनियम की सख्त धाराओं के तहत मुकदमा चलाया जाएगा, जिसमें भारी जुर्माना और लंबी कैद का प्रावधान है। यह घटना एक कड़ा संदेश देती है कि वन्यजीवों को नुकसान पहुंचाने वालों को कानून की पूरी ताकत का सामना करना पड़ेगा। इस दुर्भाग्यपूर्ण घटना ने स्थानीय समुदायों को वन्यजीव संरक्षण के महत्व को फिर से समझाने की आवश्यकता पर बल दिया है।
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