NATO Article 5 : नाटो (NATO) के अनुच्छेद 5 को लेकर अंतरराष्ट्रीय राजनीति में एक बार फिर चर्चा तेज हो गई है। नॉर्थ अटलांटिक ट्रीटी का यह अनुच्छेद, जिसे वाशिंगटन संधि भी कहा जाता है, नाटो के सामूहिक रक्षा सिद्धांत का आधार है। इसके तहत अगर यूरोप या उत्तरी अमेरिका में नाटो के 32 सदस्य देशों में से किसी एक पर सशस्त्र हमला होता है, तो इसे सभी सदस्य देशों पर हमला माना जाएगा।
रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन अब तक यूक्रेन को नाटो जैसी सुरक्षा गारंटी दिए जाने के खिलाफ रहे हैं। लेकिन हाल की बातचीत में इस दिशा में संभावित बदलाव की संभावना जताई जा रही है। यदि वार्ता आगे बढ़ती है तो यह पुतिन की रणनीति में बड़ा मोड़ होगा।
पुतिन और पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बीच हुई मुलाकात में अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो भी मौजूद रहे। उन्होंने बातचीत के बाद कहा कि अभी विस्तृत चर्चा की जरूरत है। रुबियो ने स्पष्ट किया कि वार्ता का मकसद संतुलित शांति समझौता होना चाहिए, न कि किसी पक्ष का आत्मसमर्पण।
उन्होंने कहा—“अगर एक पक्ष को सब कुछ मिल जाए, तो वह शांति नहीं बल्कि आत्मसमर्पण होगा। मुझे नहीं लगता कि यह युद्ध जल्द ही आत्मसमर्पण के आधार पर खत्म होगा।” रुबियो ने यह भी कहा कि अगर वार्ता विफल हो जाती है, तो रूस पर लगे अमेरिकी प्रतिबंध न केवल जारी रहेंगे बल्कि आगे और कड़े किए जा सकते हैं।
आज वॉशिंगटन में होने वाली हाई-लेवल मीटिंग में यूरोपीय नेताओं की मौजूदगी भी खास मायने रखती है। अमेरिकी अधिकारियों का कहना है कि यह केवल यूक्रेनी राष्ट्रपति वोलोदिमीर जेलेंस्की को समर्थन देने के लिए नहीं है, बल्कि यूरोप और अमेरिका के बीच सुरक्षा नीतियों पर तालमेल बैठाने के लिए है।
इस बैठक में यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन, जर्मन चांसलर फ्रेडरिक मर्ज, फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों, नाटो महासचिव मार्क रूटे, इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी और ब्रिटेन के प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर भी शामिल होंगे।
गौरतलब है कि फरवरी में जब जेलेंस्की ने व्हाइट हाउस का दौरा किया था, तब उनकी और ट्रंप के बीच तीखी नोकझोंक हुई थी। ऐसे में माना जा रहा है कि मौजूदा बैठक जेलेंस्की के लिए भी महत्वपूर्ण है, क्योंकि यह वार्ता उनके देश को मिलने वाली सुरक्षा गारंटी और आर्थिक मदद को प्रभावित कर सकती है।
नाटो का अनुच्छेद 5 केवल सैन्य गठबंधन का प्रावधान नहीं, बल्कि पश्चिमी देशों की सुरक्षा रणनीति की रीढ़ है। पुतिन और ट्रंप की हालिया वार्ता ने इस मुद्दे को फिर से अंतरराष्ट्रीय बहस के केंद्र में ला दिया है। अब सवाल यह है कि क्या रूस इस सिद्धांत को आंशिक रूप से स्वीकार करेगा या फिर बातचीत मौजूदा गतिरोध में ही अटक जाएगी।
Read more : Delhi Schools Bomb Threat : दिल्ली में फिर स्कूलों को बम धमकी, DPS द्वारका और मॉडर्न कान्वेंट को मिला ई-मेल
BJP Bengal Victory : "मैं श्यामा प्रसाद का बंगाल बनाऊंगा।" पिछले साल अगस्त में जब…
Ambikapur News : रसोई गैस की कीमतों में लगातार वृद्धि और बढ़ती महंगाई के विरोध…
Amit Shah Sonar Bangla : पश्चिम बंगाल के चुनावी नतीजों में भारतीय जनता पार्टी के…
BJP HQ Celebration : सोमवार की शाम नई दिल्ली स्थित भारतीय जनता पार्टी का मुख्यालय…
PM Modi on Bengal Victory : पश्चिम बंगाल और असम के विधानसभा चुनाव परिणामों ने…
Nandigram Election Result 2026 : पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 के नतीजों ने पूरे देश…
This website uses cookies.