Natural Farming Scheme : प्राकृतिक खेती मिशन में किसानों को मिलेंगे 8,000 रुपये, जानें पात्रता, फायदे और आवेदन प्रक्रिया

खेती की बढ़ती लागत से परेशान किसानों के लिए राष्ट्रीय प्राकृतिक खेती मिशन मददगार हो सकता है। योजना के तहत पात्र किसानों को एक एकड़ पर दो वर्षों में 8,000 रुपये तक सहायता मिलने का प्रावधान है। लेकिन इसके लिए कौन पात्र है, आवेदन कहां होगा और क्या शर्तें लागू हैं? जानिए पूरी जानकारी।

Natural Farming Scheme : खेती में रासायनिक खाद, कीटनाशक और दूसरे कृषि उत्पादों पर बढ़ता खर्च किसानों के लिए बड़ी चुनौती बन गया है। ऐसे में प्राकृतिक खेती किसानों को लागत कम करने और मिट्टी की गुणवत्ता सुधारने का एक विकल्प दे सकती है। इसी उद्देश्य से केंद्र सरकार राष्ट्रीय प्राकृतिक खेती मिशन के माध्यम से इस पद्धति को बढ़ावा दे रही है। मिशन के तहत निर्धारित शर्तें पूरी करने वाले किसानों को आर्थिक प्रोत्साहन और प्रशिक्षण उपलब्ध कराने का प्रावधान है।

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एक एकड़ जमीन पर मिल सकती है 8,000 रुपये की सहायता

राष्ट्रीय प्राकृतिक खेती मिशन के तहत पात्र किसानों को एक एकड़ जमीन के लिए हर साल 4,000 रुपये की प्रोत्साहन राशि देने का प्रावधान बताया गया है। यह सहायता लगातार दो वर्षों तक मिल सकती है। इस तरह एक एकड़ के लिए कुल सहायता 8,000 रुपये तक हो सकती है। हालांकि, राशि प्राप्त करने के लिए किसानों को योजना के दिशा-निर्देशों और पात्रता संबंधी शर्तों का पालन करना होगा। वास्तविक लाभ और भुगतान की प्रक्रिया की पुष्टि स्थानीय कृषि विभाग से करना जरूरी है।

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सहायता राशि का इस्तेमाल कहां कर सकते हैं किसान?

इस आर्थिक मदद का उद्देश्य किसानों को प्राकृतिक खेती अपनाने के शुरुआती चरण में सहयोग देना है। किसान इसका इस्तेमाल प्रशिक्षण, प्राकृतिक खेती की तैयारी और उससे जुड़ी गतिविधियों में कर सकते हैं। पशुपालन और खेत में उपयोग होने वाले प्राकृतिक इनपुट तैयार करने जैसे काम भी इस पद्धति का हिस्सा हो सकते हैं। उपलब्ध विवरण के अनुसार, सहायता की राशि किस्तों में आधार से जुड़े बैंक खाते में भेजी जाती है। भुगतान की पात्रता, समय और शर्तों के बारे में संबंधित विभाग से जानकारी लेना उचित रहेगा।

नवंबर 2024 में मिशन को मिली थी मंजूरी

केंद्र सरकार ने नवंबर 2024 में राष्ट्रीय प्राकृतिक खेती मिशन को मंजूरी दी थी। इसके लिए 2,481 करोड़ रुपये का कुल प्रावधान बताया गया है। मिशन का मुख्य उद्देश्य रासायनिक खाद और कीटनाशकों पर निर्भरता घटाना, खेती की लागत कम करने में मदद करना और मिट्टी की सेहत को बेहतर बनाना है। प्राकृतिक खेती में स्थानीय स्तर पर उपलब्ध संसाधनों और प्राकृतिक तरीकों के इस्तेमाल को प्राथमिकता दी जाती है। हालांकि, इससे होने वाली बचत और पैदावार पर असर फसल, मौसम, मिट्टी तथा अपनाई गई तकनीक के अनुसार अलग-अलग हो सकता है।

जीवामृत, बीजामृत और नीमास्त्र बनाने का प्रशिक्षण

प्राकृतिक खेती मिशन में किसानों को सिर्फ आर्थिक सहायता ही नहीं, बल्कि प्रशिक्षण देने पर भी जोर है। कृषि विज्ञान केंद्रों और कृषि विश्वविद्यालयों के माध्यम से किसान प्राकृतिक खेती की तकनीक सीख सकते हैं। प्रशिक्षण में जीवामृत, बीजामृत और नीमास्त्र जैसे प्राकृतिक घोल तैयार करने की जानकारी शामिल हो सकती है। इसके अतिरिक्त, गांवों में प्राकृतिक खेती से जुड़े संसाधन उपलब्ध कराने वाले केंद्र विकसित किए जा सकते हैं। प्रशिक्षित कृषि सखियां भी किसानों को मार्गदर्शन देने में भूमिका निभा सकती हैं।

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आवेदन करने से पहले कहां करें संपर्क?

जो किसान प्राकृतिक खेती शुरू करना चाहते हैं, वे अपने जिले के कृषि विभाग या नजदीकी कृषि विज्ञान केंद्र से संपर्क कर सकते हैं। वहां मिशन के तहत उपलब्ध प्रशिक्षण, किसान समूहों और आवेदन प्रक्रिया की जानकारी मिल सकती है। योजना में सामूहिक रूप से प्राकृतिक खेती अपनाने और प्रशिक्षण लेने को भी प्रोत्साहित किया जाता है। आवेदन के दौरान आधार कार्ड, बैंक खाते और जमीन से जुड़े दस्तावेज मांगे जा सकते हैं, लेकिन आवश्यक कागजात की अंतिम सूची स्थानीय विभाग से ही प्राप्त करें।

किसानों के लिए जरूरी सलाह

योजना का लाभ लेने से पहले किसान यह सुनिश्चित करें कि उनका क्षेत्र, खेती का तरीका और आवेदन संबंधित दिशा-निर्देशों के अनुरूप हैं। सहायता राशि को निश्चित लाभ मानने से पहले मौजूदा नियमों और स्थानीय स्तर पर योजना के क्रियान्वयन की पुष्टि करें। प्राकृतिक खेती अपनाते समय फसल की जरूरत, मिट्टी की स्थिति और उपलब्ध संसाधनों के अनुसार कृषि विशेषज्ञ की सलाह लेना भी उपयोगी रहेगा।

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Chandan Das

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