Navneet Rana Remark
Navneet Rana Remark: भारतीय जनता पार्टी की नेता और पूर्व सांसद नवनीत राणा अपने एक नए बयान को लेकर विवादों के केंद्र में आ गई हैं। महाराष्ट्र की राजनीति में अपनी बेबाक और अक्सर तीखी बयानबाजी के लिए जानी जाने वाली राणा ने इस बार जनसंख्या और देश की सुरक्षा को लेकर एक ऐसी टिप्पणी की है, जिससे राजनीतिक गलियारों में उबाल आ गया है। उन्होंने हिंदुओं से अधिक बच्चे पैदा करने का आह्वान करते हुए एक विशेष समुदाय पर तीखा प्रहार किया है। इस बयान के बाद विपक्ष ने बीजेपी को घेरना शुरू कर दिया है, वहीं सोशल मीडिया पर भी इस मुद्दे को लेकर तीखी बहस छिड़ गई है।
नवनीत राणा ने एक जनसभा को संबोधित करते हुए दावा किया कि देश के जनसांख्यिकीय ढांचे को बदलने की कोशिश की जा रही है। उन्होंने कहा कि हिंदुओं को अब अपनी सोच बदलनी होगी और परिवार नियोजन के सीमित दायरे से बाहर निकलना होगा। राणा के अनुसार, “देश की अस्मिता और पहचान को बचाने के लिए हर हिंदू परिवार को कम से कम 3 से 4 बच्चे पैदा करने चाहिए।” उन्होंने तर्क दिया कि यदि हिंदू समाज एक या दो बच्चों तक सीमित रहा, तो भविष्य में देश के सामने गंभीर संकट खड़ा हो सकता है। उनके इस बयान को धार्मिक ध्रुवीकरण की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है।
अपने संबोधन के दौरान नवनीत राणा ने एक विशेष समुदाय पर सीधा निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ लोग जानबूझकर जनसंख्या बढ़ा रहे हैं ताकि भारत को ‘पाकिस्तान’ बनाया जा सके। राणा ने कहा, “उनकी साजिशों का सामना करने के लिए हिंदुओं का संख्यात्मक रूप से मजबूत होना अनिवार्य है। जो लोग यह सोचते हैं कि वे अपनी आबादी के दम पर इस देश पर कब्जा कर लेंगे, उन्हें जवाब देना जरूरी है।” बीजेपी नेता ने दावा किया कि उनके इस बयान के पीछे का आधार एक मौलाना का वीडियो है, जिसमें वह अपनी बड़ी आबादी पर गर्व कर रहा था।
अपने बयान का बचाव करते हुए नवनीत राणा ने एक कथित उदाहरण पेश किया। उन्होंने कहा, “मैंने एक मौलाना को सुना जो कहता है कि उसकी चार पत्नियां और 19 बच्चे हैं। हैरानी की बात तो यह है कि वह 19 बच्चों के बाद भी खुश नहीं है; उसे 35 बच्चे चाहिए थे और वह इसे खुलेआम स्वीकार करता है।” राणा ने हिंदुओं से सवाल पूछते हुए कहा कि जब दूसरे समुदाय के लोग इतनी बड़ी संख्या में परिवार बढ़ा रहे हैं, तो हम केवल एक बच्चे की नीति पर क्यों खुश हैं? उन्होंने जोर देकर कहा कि हिंदुओं को भी अपनी आबादी के प्रति सतर्क होना होगा।
जनसंख्या के मुद्दे के साथ-साथ नवनीत राणा ने महाराष्ट्र की राजनीति पर भी तीखी टिप्पणी की। उन्होंने शिवसेना (UBT) प्रमुख उद्धव ठाकरे को आड़े हाथों लेते हुए उन्हें ‘बेबसी का पर्याय’ बताया। राज ठाकरे और उद्धव ठाकरे के गठबंधन की चर्चाओं पर तंज कसते हुए उन्होंने कहा कि उद्धव अब अपने कार्यकर्ताओं को चुनावी मैदान में उतारने का साहस भी खो चुके हैं। राणा ने दावा किया कि स्थानीय निकाय चुनावों में उद्धव गुट का प्रदर्शन बेहद खराब रहेगा और उनके साथ जुड़ने वाली किसी भी शक्ति का हश्र भी बुरा ही होगा।
नवनीत राणा के इन बयानों की चौतरफा निंदा हो रही है। विपक्षी दलों ने इसे भड़काऊ भाषण करार देते हुए चुनाव आयोग से कार्रवाई की मांग की है। कांग्रेस और एनसीपी के नेताओं का कहना है कि बीजेपी विकास के मुद्दों से ध्यान भटकाने के लिए ऐसे सांप्रदायिक कार्ड खेल रही है। वहीं, आम जनता के एक बड़े वर्ग का मानना है कि आधुनिक समय में जहाँ शिक्षा और संसाधनों पर ध्यान दिया जाना चाहिए, वहाँ ऐसे बयान समाज में दूरियां बढ़ाने का काम करते हैं।
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