Delimitation Controversy
Delimitation Controversy : महिला आरक्षण बिल के लोकसभा में गिरने के बाद देश का राजनीतिक पारा सातवें आसमान पर है। सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच आरोपों-प्रत्यारोपों का दौर शुरू हो गया है। जहाँ भाजपा इसे विपक्ष की ‘महिला विरोधी’ मानसिकता का प्रमाण बता रही है, वहीं कांग्रेस इसे सरकार की एक सोची-समझी साजिश करार दे रही है। शनिवार को कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा ने केंद्र सरकार के रवैये पर कड़ा प्रहार करते हुए कहा कि कल जो कुछ भी संसद में हुआ, वह लोकतंत्र और संविधान की वास्तविक जीत है। उन्होंने सरकार को चेतावनी देते हुए कहा कि महिलाओं को गुमराह करने की कोशिश न की जाए।
प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान प्रियंका गांधी ने आरोप लगाया कि मोदी सरकार ने केवल सत्ता में बने रहने के लिए इस बिल का इस्तेमाल एक हथियार के रूप में किया। उन्होंने दावा किया कि सरकार को पहले से पता था कि यह बिल पास नहीं होगा, फिर भी इसे एक विशेष रणनीति के तहत लाया गया। प्रियंका के अनुसार, सरकार की योजना यह थी कि यदि बिल पास हो जाता, तो वे महिलाओं का ‘मसीहा’ बन जाते, और यदि गिर जाता, तो वे विपक्ष को महिलाओं का दुश्मन बताकर राजनीतिक लाभ उठाते। उन्होंने इसे महिलाओं की भावनाओं के साथ खिलवाड़ बताया।
प्रियंका गांधी ने शनिवार (18 अप्रैल) को कहा कि कल का दिन भारतीय लोकतंत्र के लिए एक बड़ी जीत का प्रतीक है। उन्होंने आरोप लगाया कि मोदी सरकार ने लोकतंत्र को कमजोर करने और देश के संघीय ढांचे में बदलाव करने की साजिश रची थी, जिसे विपक्ष ने मिलकर नाकाम कर दिया। उन्होंने जोर देकर कहा कि यह केवल विपक्ष की नहीं, बल्कि देश के संविधान की जीत है, और इसकी हताशा सत्ता पक्ष के नेताओं के चेहरों पर स्पष्ट रूप से देखी जा सकती है।
प्रियंका गांधी ने टीवी 9 भारतवर्ष के एक सवाल का जवाब देते हुए मुद्दे की गहराई को स्पष्ट किया। उन्होंने कहा कि यह लड़ाई केवल महिला आरक्षण की नहीं, बल्कि परिसीमन की थी। उनके अनुसार, सरकार सीटों की संख्या बढ़ाकर छोटे और दक्षिण भारतीय राज्यों की लोकतांत्रिक ताकत को कम करना चाहती है। उन्होंने इंदिरा गांधी और अटल बिहारी वाजपेयी का उदाहरण देते हुए कहा कि उन्होंने एकता बनाए रखने के लिए सीटों को फ्रीज रखा था। कांग्रेस की मांग है कि मौजूदा सीटों में ही 33 प्रतिशत आरक्षण दिया जाए, न कि परिसीमन के नाम पर राजनीतिक मनमानी की जाए।
सरकार पर हमला जारी रखते हुए प्रियंका गांधी ने भाजपा के इतिहास पर सवाल उठाए। उन्होंने उन्नाव, हाथरस, महिला खिलाड़ियों के प्रदर्शन और मणिपुर की घटनाओं का जिक्र करते हुए कहा कि जब इन महिलाओं को जरूरत थी, तब सरकार ने सुध नहीं ली। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि आज सदन में ‘महिलाओं का मसीहा’ बनने का नाटक करने वाली सरकार का असली चेहरा देश देख चुका है। उन्होंने स्पष्ट किया कि विपक्ष कभी भी ऐसी व्यवस्था का समर्थन नहीं करेगा जहाँ जातिगत जनगणना के आंकड़ों को दरकिनार कर मनमाना परिसीमन किया जाए।
प्रेस कॉन्फ्रेंस के अंत में प्रियंका गांधी ने केंद्र को आगाह किया कि देश अब 12 साल पहले वाली स्थिति में नहीं है। जनता बदल चुकी है और वह सरकार की ‘मीडिया पीआर बाजी’ को समझती है। उन्होंने कहा कि महिलाएं बेवकूफ नहीं हैं और वे जानती हैं कि कौन उनके अधिकारों के लिए लड़ रहा है और कौन उनका इस्तेमाल कर रहा है। उन्होंने भाजपा को चुनौती दी कि वे अपना अभियान चलाएं, लेकिन देश की महिलाएं अब उनकी साजिशों को सफल नहीं होने देंगी।
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