Sonia Gandhi News
Sonia Gandhi News: कांग्रेस की वरिष्ठ नेता सोनिया गांधी के खिलाफ मतदाता सूची में नाम शामिल करने से जुड़े एक पुराने मामले में दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट में सरगर्मी तेज हो गई है। हालिया सुनवाई के दौरान, अदालत ने दोनों पक्षों को निर्देश दिया है कि वे एक सप्ताह के भीतर अपनी विस्तृत लिखित दलीलें पेश करें। इस मामले में शिकायतकर्ता के वरिष्ठ वकील ने अपनी जवाबी बहस पूरी कर ली है। इसके साथ ही, शिकायतकर्ता पक्ष ने अदालत से भारतीय चुनाव आयोग (ECI) की एक विशेष रिपोर्ट को रिकॉर्ड पर लाने की अनुमति भी मांगी है। दूसरी ओर, सोनिया गांधी के कानूनी दल ने भी कोर्ट को सूचित किया है कि वे इस मामले के तकनीकी पहलुओं पर कुछ महत्वपूर्ण दलीलें पेश करना चाहते हैं। कोर्ट ने इन सभी तथ्यों को ध्यान में रखते हुए अगली सुनवाई के लिए 16 मई की तारीख निर्धारित की है।
इस पूरे विवाद की जड़ें दशकों पुरानी हैं। दायर याचिका में एक गंभीर विसंगति की ओर इशारा किया गया है। याचिकाकर्ता का दावा है कि सोनिया गांधी ने आधिकारिक रूप से 30 अप्रैल, 1983 को भारतीय नागरिकता प्राप्त की थी। हालांकि, आरोप यह है कि उनका नाम इससे तीन साल पहले, यानी 1980 में ही नई दिल्ली की मतदाता सूची में दर्ज हो गया था। याचिका में तर्क दिया गया है कि एक विदेशी नागरिक का नाम भारतीय मतदाता सूची में शामिल किया जाना उस समय के चुनावी कानूनों और नियमों का स्पष्ट उल्लंघन था। इसी आधार पर उस दौरान मतदाता सूची में उनके नाम की प्रविष्टि की वैधता पर कानूनी सवाल उठाए गए हैं।
इन आरोपों का पुरजोर खंडन करते हुए सोनिया गांधी ने अदालत में अपना पक्ष रखा है। उन्होंने इस आवेदन को पूरी तरह से बेबुनियाद और राजनीति से प्रेरित करार दिया है। उनके अनुसार, यह याचिका केवल उनकी छवि धूमिल करने के उद्देश्य से दायर की गई है और यह कानूनी प्रक्रिया का दुरुपयोग है। सोनिया गांधी के वकीलों ने दलील दी है कि इस तरह के पुराने मामलों को उठाना कानून की स्थापित मर्यादाओं के खिलाफ है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि शिकायतकर्ता द्वारा लगाए गए आरोपों का कोई तथ्यात्मक आधार नहीं है और यह केवल अनुमानों पर आधारित है।
सोनिया गांधी की ओर से पेश किए गए जवाब में एक महत्वपूर्ण तकनीकी बिंदु ‘अधिकार क्षेत्र’ (Jurisdiction) का उठाया गया है। उनके पक्ष का तर्क है कि नागरिकता से जुड़े किसी भी प्रश्न या विवाद पर निर्णय लेने का विशेष अधिकार केवल केंद्र सरकार के पास है। इसी तरह, मतदाता सूचियों में नाम दर्ज करने या हटाने और चुनावी विवादों के निपटारे की जिम्मेदारी पूरी तरह से भारतीय चुनाव आयोग के अधिकार क्षेत्र में आती है। सोनिया गांधी ने कहा कि निचली अदालत ने भी पहले यह टिप्पणी की थी कि आपराधिक अदालतों के पास ऐसे नागरिक और प्रशासनिक मामलों में हस्तक्षेप करने की शक्ति नहीं है। उन्होंने इसे न्यायपालिका के अधिकार क्षेत्र का अतिक्रमण बताया है।
बचाव पक्ष ने शिकायतकर्ता की मंशा पर सवाल उठाते हुए कहा कि इन भारी-भरकम आरोपों को साबित करने के लिए अदालत के समक्ष कोई भी विश्वसनीय दस्तावेजी सबूत पेश नहीं किया गया है। सोनिया गांधी के अनुसार, शिकायत में केवल मौखिक आरोप लगाए गए हैं, जबकि कानूनन ऐसे मामलों में ठोस और पुख्ता दस्तावेजों की आवश्यकता होती है। उन्होंने अदालत से आग्रह किया कि चूंकि शिकायतकर्ता आरोपों के समर्थन में कोई विश्वसनीय साक्ष्य पेश करने में विफल रहा है, इसलिए इस याचिका को तत्काल खारिज कर दिया जाना चाहिए। अब 16 मई की सुनवाई में यह तय होगा कि चुनाव आयोग की रिपोर्ट और लिखित दलीलें इस मामले को किस दिशा में ले जाती हैं।
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