Navshad Siddiqui Remark : इंडियन सेक्युलर फ्रंट (ISF) के चेयरमैन और भांगर विधानसभा सीट से विधायक नवशाद सिद्दीकी ने हालिया राजनीतिक विवादों और भड़काऊ बयानों पर अपना रुख साफ करते हुए एक कड़ा बयान दिया है। सिद्दीकी ने कहा कि लोकतंत्र में किसी की गलती का विरोध करना हर नागरिक का अधिकार है, लेकिन यह सवाल उठाना लाजिमी है कि आखिर किसी एक व्यक्ति की व्यक्तिगत भूल के लिए पूरे मुस्लिम समुदाय को कटघरे में खड़ा कर विरोध करने के लिए क्यों उकसाया जाए। उन्होंने जोर देकर कहा कि उनकी सबसे बड़ी आपत्ति इसी ‘सामूहिक लेबलिंग’ पर है। सिद्दीकी ने स्पष्ट किया कि गलत बात करने वाले का समर्थन करना उनकी पार्टी या उनके संस्कारों में नहीं है।

छह साल का राजनीतिक सफर और सिद्धांतों पर अडिग रहने का दावा
अपने छह साल के राजनीतिक करियर का जिक्र करते हुए नवशाद सिद्दीकी ने दावा किया कि उन्होंने कभी भी ऐसे बयानों का सहारा नहीं लिया, जिनसे समाज में कटुता बढ़े। उन्होंने कहा कि उनकी पार्टी ISF किसी भी ऐसे व्यक्ति या विचारधारा का समर्थन नहीं करती जो इस तरह के आपत्तिजनक या भड़काऊ बयान देता हो। उनके अनुसार, राजनीति का उद्देश्य जनता की समस्याओं का समाधान करना है, न कि धर्म या समुदाय के नाम पर विभाजन पैदा करना। उन्होंने मुख्यमंत्री ममता बनर्जी द्वारा हाल ही में दिए गए बयान की भी सराहना की और कहा कि विवादास्पद भाषणों पर मुख्यमंत्री का रुख स्वागत योग्य है।

विधानसभा में बिल का विरोध और राजनीतिक सरगर्मी
एक अन्य महत्वपूर्ण बयान में नवशाद सिद्दीकी ने विधानसभा में हाल ही में पारित एक विधेयक पर अपनी स्थिति स्पष्ट की। उन्होंने बताया कि इस बिल के खिलाफ कुल 17 विधायकों ने मतदान किया था, जिसमें वह खुद शामिल थे। उन्होंने गर्व से कहा कि इस बिल का विरोध करने वालों में सबसे पहले उनका ही नाम था। इस प्रक्रिया में उनके साथ ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस (TMC) के कुछ विधायकों ने भी साथ दिया। कोलकाता में दिए गए उनके इस बयान के बाद पश्चिम बंगाल की राजनीति में अटकलों का बाजार गर्म हो गया है। राजनीतिक विश्लेषक इसे मौजूदा सरकार के प्रति उनके रुख और विपक्षी खेमे में बदलती समीकरणों के रूप में देख रहे हैं।
कौन हैं नवशाद सिद्दीकी? पश्चिम बंगाल का उभरता युवा राजनीतिक चेहरा
नवशाद सिद्दीकी पश्चिम बंगाल की समकालीन राजनीति में एक बेहद प्रभावशाली और चर्चित युवा चेहरे के रूप में उभरे हैं। 2 मई 1993 को जन्मे नवशाद, फुरफुरा शरीफ के अत्यंत प्रतिष्ठित और प्रभावशाली सिद्दीकी परिवार से ताल्लुक रखते हैं। उनके बड़े भाई अब्बास सिद्दीकी द्वारा साल 2021 में स्थापित इंडियन सेक्युलर फ्रंट (ISF) को नई दिशा देने में उनकी भूमिका अहम रही है। अपनी शिक्षा अलिया विश्वविद्यालय से पूरी करने वाले नवशाद, राजनीति में आने से पहले सामाजिक और धार्मिक कार्यों में गहराई से जुड़े रहे हैं।
वंचित समुदायों की आवाज और बढ़ती राजनीतिक सक्रियता
नवशाद सिद्दीकी की पहचान मुख्य रूप से मुस्लिम, दलित और समाज के सबसे वंचित वर्गों की आवाज बुलंद करने वाले एक मुखर युवा नेता की है। भांगर विधानसभा से विधायक बनने के बाद से ही उन्होंने अपनी विधानसभा क्षेत्र के साथ-साथ पूरे राज्य के जनहित के मुद्दों को जोर-शोर से विधानसभा में उठाया है। उनकी कार्यशैली और बयानों को अक्सर राज्य की जटिल राजनीतिक परिस्थितियों और हालिया विधानसभा घटनाक्रमों के चश्मे से देखा जाता है। वे लगातार अपनी एक ऐसी छवि बनाने में सफल रहे हैं, जो धर्मनिरपेक्षता और सामाजिक न्याय के सिद्धांतों पर टिकी हुई है।
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