Naxal Surrender
Naxal Surrender: छत्तीसगढ़ में नक्सल विरोधी अभियानों में सुरक्षाबलों को एक महत्वपूर्ण सफलता हाथ लगी है। नक्सल प्रभावित नारायणपुर जिले में, सुरक्षाबल के जवानों के समक्ष 18 नक्सलियों ने आत्मसमर्पण कर दिया है। यह कदम क्षेत्र में माओवादी गतिविधियों के लिए एक बड़ा झटका माना जा रहा है। सरेंडर करने वाले नक्सलियों में कई ऐसे नेता भी शामिल हैं जो लंबे समय से सक्रिय थे और संगठन में महत्वपूर्ण पदों पर थे। इन सभी नक्सलियों ने अपने हथियारों के साथ आत्मसमर्पण किया है, जो सुरक्षाबलों की रणनीति और सरकार की पुनर्वास नीति की सफलता को दर्शाता है।
यह आत्मसमर्पण नारायणपुर जिले के अबूझमाड़ क्षेत्र में हुआ है, जो बस्तर का एक दुर्गम और सघन नक्सल प्रभावित इलाका है। आत्मसमर्पण करने वाले 18 नक्सलियों में कई बड़े स्तर के सक्रिय नक्सली शामिल हैं। इन सभी ने बस्तर रेंज के पुलिस महानिरीक्षक (IG) सुंदरराज पी. और नारायणपुर जिले के पुलिस अधीक्षक (SP) के सामने अपने हथियार सौंपे। यह इलाका माओवादियों का गढ़ माना जाता रहा है, और इतनी बड़ी संख्या में, खासकर सक्रिय लीडरों का आत्मसमर्पण करना माओवादी संगठन की कमर तोड़ने जैसा है। अधिकारियों ने बताया कि यह समर्पण माओवादी संगठन के लिए एक गहरा आघात है। गौरतलब है कि इसी इलाके में इससे पहले भी 210 से अधिक नक्सली मुख्यधारा में लौट चुके हैं, जिससे यह स्पष्ट होता है कि नक्सल विरोधी अभियान और पुनर्वास योजनाएँ प्रभावी साबित हो रही हैं।
नारायणपुर से पहले, पड़ोसी सुकमा जिले में भी सुरक्षाबलों को बड़ी कामयाबी मिली थी। सोमवार को, सुकमा में 15 नक्सलियों ने आत्मसमर्पण किया था। आत्मसमर्पण करने वाले इन नक्सलियों में से नौ पर कुल मिलाकर 48 लाख रुपये का इनाम घोषित था, जो इनकी महत्ता और दुर्दांतता को दर्शाता है। समर्पण करने वाले ये नक्सली ‘पीपुल्स लिबरेशन गुरिल्ला आर्मी’ (पीएलजीए) बटालियन क्रमांक एक सहित विभिन्न माओवादी क्षेत्रों में सक्रिय थे। आत्मसमर्पण करने वालों में पाँच महिला नक्सली भी शामिल थीं, जो दर्शाता है कि महिला कैडरों में भी माओवादी विचारधारा से मोहभंग हो रहा है।
सुकमा में आत्मसमर्पण करने वाले मुख्य नक्सलियों में माड़वी सन्ना, सोड़ी हिड़मे, सूर्यम उर्फ रव्वा सोमा और मीना उर्फ माड़वी भीमे शामिल थे, जिन पर अकेले आठ-आठ लाख रुपये का इनाम था। इसके अलावा, सुनिता उर्फ कुहराम हुंगी और मड़कम पांडू पर पाँच-पाँच लाख रुपये का इनाम था, और तीन अन्य नक्सलियों पर भी एक से तीन लाख रुपये तक का इनाम घोषित था।
नक्सलियों के आत्मसमर्पण का मुख्य कारण ‘छत्तीसगढ़ नक्सलवादी आत्मसमर्पण एवं पुनर्वास नीति’ का आकर्षण माना जा रहा है। अधिकारियों के अनुसार, नक्सलियों ने माओवादी संगठन की ‘अमानवीय और आधारहीन विचारधारा’ के साथ-साथ संगठन के भीतर होने वाले शोषण एवं अत्याचार से तंग आकर आत्मसमर्पण करने का निर्णय लिया। यह लगातार हो रहे समर्पण यह संकेत देते हैं कि सुरक्षाबलों का दबाव, सरकारी विकास कार्य और आकर्षक पुनर्वास नीति मिलकर माओवादी कैडरों को मुख्यधारा में लौटने के लिए प्रेरित कर रही है, जिससे राज्य में शांति और विकास की उम्मीदें मजबूत हो रही हैं।
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