Naxal Surrender:
Naxal Surrender: छत्तीसगढ़ के नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में चलाए जा रहे एंटी नक्सल ऑपरेशन को एक बड़ी सफलता मिली है। सुरक्षाबलों की लगातार कार्रवाई, बढ़ते दबाव और राज्य शासन की प्रभावशाली पुनर्वास नीति से प्रेरित होकर, खैरागढ़ जिले में सक्रिय CCM (सेंट्रल कमेटी मेंबर) रामधेर मज्जी समेत 11 नक्सलियों ने हथियारों के साथ आत्मसमर्पण कर दिया है। समर्पण करने वालों में छह महिला नक्सली भी शामिल हैं, जो इस घटना की गंभीरता और अभियान की सफलता को दर्शाती है।
आत्मसमर्पण करने वाले नक्सलियों में सबसे प्रमुख नाम CCM रामधेर मज्जी का है, जिस पर 1 करोड़ रुपये का भारी इनाम घोषित था। रामधेर मज्जी लंबे समय से नक्सली संगठन के शीर्ष नेतृत्व में शामिल था और उसका नाम कई गंभीर नक्सली घटनाओं से जुड़ा रहा है। यह सामूहिक आत्मसमर्पण खैरागढ़ जिले के बकरकट्टा थाना क्षेत्र में 7-8 दिसंबर की दरम्यानी रात करीब 2 से 3 बजे के बीच हुआ। सभी नक्सलियों ने पुलिस और सुरक्षा बलों के सामने अपने-अपने हथियार सौंपे। जानकारी के मुताबिक, कुम्ही गांव में आज सुबह आत्मसमर्पण की औपचारिक प्रक्रिया पूरी की गई। इस महत्वपूर्ण घटना को लेकर आज आईजी स्तर के अधिकारी प्रेस वार्ता कर विस्तृत जानकारी साझा कर सकते हैं।
इस समूहिक समर्पण में CCM (सेंट्रल कमेटी मेंबर) के अलावा DVCM (डिविजनल कमेटी मेंबर), ACM (एरिया कमेटी मेंबर) और PM (प्लैटून मेंबर) स्तर के नक्सली भी शामिल हैं। CC मेंबर रामधेर मज्जी के आत्मसमर्पण के बाद यह माना जा रहा है कि नक्सलियों का MMC (महाराष्ट्र-मध्य प्रदेश-छत्तीसगढ़) जोन लगभग समाप्त हो गया है, जो इस क्षेत्र में नक्सली गतिविधियों के लिए एक बड़ा केंद्र था। सुरक्षा बलों के लिए यह एक रणनीतिक जीत है।
आत्मसमर्पण करने वाले प्रमुख नक्सलियों और उनके पद तथा बरामद हथियारों का विवरण इस प्रकार है, जो संगठन में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका को दर्शाता है:
| नाम | पद | बरामद हथियार |
| रामधेर मज्जी | CCM | AK47 |
| चंदू उसेंडी | DVCM | 30 कार्बन |
| ललिता | DVCM | कोई नहीं |
| जानकी | DVCM | इंसास |
| प्रेम | DVCM | AK47 |
| रामसिंह दादा | ACM | 303 |
| सुकेश पोट्टम | ACM | AK47 |
| लक्ष्मी | PM | इंसास |
| शीला | PM | इंसास |
| सागर | PM | SLR |
| कविता | PM | 303 |
| योगिता | PM | कोई नहीं |
साल 2025 सुरक्षा बलों के लिए अत्यंत सफल रहा है। इस वर्ष फोर्स के ऑपरेशन में कई शीर्ष नक्सल कमांडरों का सफाया हुआ, जिनमें बसवाराजू, मनोज उर्फ मॉडेम बालकृष्ण उर्फ, राजू दादा, कोसा दादा और नक्सली जयराम जैसे बड़े नाम शामिल हैं। इन लगातार झटकों से नक्सलियों पर भारी दबाव बढ़ा, जिसके कारण कई बड़े नक्सलियों ने मुख्यधारा में लौटने का फैसला किया। विशेष रूप से, 18 नवंबर को आंध्र प्रदेश और छत्तीसगढ़ की सीमा पर टॉप नक्सल कमांडर हिड़मा के मारे जाने के बाद, समर्पण करने वाले नक्सलियों की संख्या में तेजी आई है।
सुरक्षा बलों के लगातार ऑपरेशन और इस सामूहिक आत्मसमर्पण से नक्सली नेटवर्क को एक बड़ा आघात लगा है। सुरक्षा एजेंसियों का मानना है कि शासन की प्रभावी नीतियों और ऑपरेशन के बढ़ते दबाव के चलते आने वाले दिनों में और भी नक्सली हथियार छोड़कर मुख्यधारा में लौट सकते हैं, जिससे क्षेत्र में शांति और विकास की राह आसान होगी। यह समर्पण न केवल एक ऑपरेशनल सफलता है, बल्कि नक्सलवाद की समाप्ति की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
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