Naxals Surrender
Naxals Surrender: तेलंगाना के सुरक्षा परिदृश्य में शुक्रवार को एक ऐतिहासिक सफलता दर्ज की गई। राज्य में सक्रिय प्रतिबंधित संगठन ‘भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी)’ को एक बड़ा झटका लगा है, जब उसके 41 सदस्यों ने एक साथ पुलिस के सामने हथियार डाल दिए। हैदराबाद में आयोजित एक उच्च स्तरीय कार्यक्रम के दौरान, इन नक्सलियों ने समाज की मुख्यधारा में लौटने का संकल्प लिया। सुरक्षा बलों के लिए यह एक बड़ी उपलब्धि मानी जा रही है क्योंकि सरेंडर करने वालों में संगठन के कई महत्वपूर्ण चेहरे भी शामिल हैं।
आत्मसमर्पण करने वाले इन 41 नक्सलियों में 6 ऐसे सदस्य हैं जो संगठन के भीतर उच्च पदों पर आसीन थे। ये सदस्य कंपनी प्लाटून और डिविजनल कमेटी स्तर पर सक्रिय थे और रणनीतिक योजनाएँ बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते थे। तेलंगाना के पुलिस महानिदेशक (DGP) बी. शिवधर रेड्डी ने इस सफलता की पुष्टि करते हुए बताया कि इतने वरिष्ठ कैडर का एक साथ आना माओवादी विचारधारा के प्रति उनके घटते विश्वास को दर्शाता है। यह आत्मसमर्पण राज्य में नक्सलवाद के खात्मे की दिशा में एक निर्णायक मोड़ साबित हो सकता है।
इन नक्सलियों ने न केवल आत्मसमर्पण किया, बल्कि अपने साथ भारी मात्रा में अत्याधुनिक हथियार और गोला-बारूद भी पुलिस को सौंपे। सौंपे गए 24 हथियारों में भारतीय सेना और सुरक्षा बलों द्वारा उपयोग किए जाने वाले INSAS LMG (लाइट मशीन गन), AK-47 राइफलें और SLR (सेल्फ लोडिंग राइफल) शामिल हैं। इसके अतिरिक्त, नक्सलियों ने 733 कारतूस भी जमा कराए। आधुनिक हथियारों का इतनी बड़ी संख्या में पुलिस के पास आना यह सुनिश्चित करता है कि क्षेत्र में भविष्य में होने वाली हिंसक घटनाओं की क्षमता में भारी कमी आएगी।
आत्मसमर्पण करने वाले पूर्व नक्सलियों ने पूछताछ के दौरान अपने नेतृत्व के प्रति गहरी निराशा व्यक्त की। DGP शिवधर रेड्डी के अनुसार, ये सभी सदस्य अपने शीर्ष नेताओं के भेदभावपूर्ण व्यवहार और संगठन की आंतरिक राजनीति से तंग आ चुके थे। उन्होंने स्वीकार किया कि अब वे हिंसा और रक्तपात के रास्ते को छोड़कर शांतिपूर्ण जीवन जीना चाहते हैं। नक्सलियों ने सामूहिक रूप से ऐलान किया कि माओवादी विचारधारा अब अपने उद्देश्यों से भटक गई है और वे विकास की प्रक्रिया का हिस्सा बनना चाहते हैं।
तेलंगाना सरकार की ‘आत्मसमर्पण और पुनर्वास’ नीति के तहत इन सभी पूर्व नक्सलियों को समाज में फिर से स्थापित करने के लिए सहायता प्रदान की जाएगी। सरकार उन्हें आर्थिक मदद, कौशल विकास प्रशिक्षण और सुरक्षा मुहैया कराएगी ताकि वे सामान्य नागरिक के रूप में सम्मानजनक जीवन जी सकें। पुलिस महानिदेशक ने अन्य सक्रिय नक्सलियों से भी अपील की है कि वे हिंसा का रास्ता छोड़ें और सरकार की कल्याणकारी योजनाओं का लाभ उठाएं।
इतनी बड़ी संख्या में सरेंडर होने के बाद छत्तीसगढ़ और महाराष्ट्र से लगी तेलंगाना की सीमाओं पर सुरक्षा व्यवस्था और कड़ी कर दी गई है। खुफिया एजेंसियों का मानना है कि इस घटना के बाद संगठन के बचे हुए सदस्यों का मनोबल टूटेगा। पुलिस अब आत्मसमर्पण करने वालों से मिली जानकारी के आधार पर संगठन के छिपे हुए ठिकानों और नेटवर्क को ध्वस्त करने की योजना बना रही है। यह सामूहिक आत्मसमर्पण राज्य में शांति और स्थिरता की बहाली के लिए एक शुभ संकेत माना जा रहा है।
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