NCERT Book Controversy
NCERT Book Controversy: NCERT की आठवीं कक्षा की पाठ्यपुस्तक में न्यायपालिका पर की गई विवादास्पद टिप्पणियों को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गहरी नाराजगी व्यक्त की है। सूत्रों के मुताबिक, मंगलवार को अपनी इजरायल यात्रा पर रवाना होने से ठीक पहले आयोजित कैबिनेट की बैठक में पीएम मोदी ने इस विषय को उठाया। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि “बच्चों को क्या पढ़ाया जा रहा है, इसका विशेष ध्यान रखा जाना चाहिए।” प्रधानमंत्री की इस सख्त टिप्पणी के बाद शिक्षा विभाग में हड़कंप मच गया है। गुरुवार को इजरायल से लौटने के बाद उम्मीद जताई जा रही है कि इस लापरवाही के लिए जिम्मेदार उच्चाधिकारियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की जा सकती है।
यह पूरा विवाद एनसीईआरटी की आठवीं कक्षा की सामाजिक विज्ञान की किताब के एक अध्याय से शुरू हुआ, जिसमें न्यायपालिका में भ्रष्टाचार का उल्लेख किया गया था। इस मामले का स्वतः संज्ञान लेते हुए सुप्रीम कोर्ट ने इसे न्यायिक गरिमा को ठेस पहुँचाने वाला बताया। प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा कि यह न्यायिक संस्था को कमजोर करने का एक “सुनियोजित प्रयास” प्रतीत होता है। अदालत ने तत्काल प्रभाव से पुस्तक पर ‘पूर्ण प्रतिबंध’ लगाते हुए इसकी सभी प्रतियों को जब्त करने और इंटरनेट से डिजिटल संस्करण हटाने का आदेश दिया है।
केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने इस पूरे घटनाक्रम पर दुख व्यक्त करते हुए देश को आश्वस्त किया है कि सरकार न्यायपालिका का सर्वोच्च सम्मान करती है। उन्होंने कहा कि पाठ्यक्रम के विवादास्पद अंश तैयार करने वाले लोगों की पहचान कर उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। मंत्री ने जमशेदपुर में पत्रकारों से बात करते हुए साफ किया कि जैसे ही इस त्रुटि की जानकारी मिली, पुस्तकों का वितरण रोक दिया गया था। उन्होंने यह भी कहा कि सरकार का इरादा कभी भी न्यायपालिका का अनादर करना नहीं था और अदालत के हर निर्देश का अक्षरशः पालन किया जाएगा।
सुप्रीम कोर्ट की पीठ, जिसमें न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति विपुल एम. पंचोली भी शामिल हैं, ने इस मामले को “संस्था पर आघात” करार दिया है। अदालत ने एनसीईआरटी के निदेशक और स्कूल शिक्षा विभाग के सचिव को ‘कारण बताओ नोटिस’ जारी किया है। अदालत ने उनसे पूछा है कि क्यों न उनके खिलाफ अवमानना की कार्यवाही शुरू की जाए। हालांकि एनसीईआरटी ने अपनी गलती स्वीकार करते हुए माफी मांगी है और पाठ्यपुस्तक को अपनी वेबसाइट से हटा दिया है, लेकिन अदालत दोषियों को बख्शने के मूड में नहीं दिख रही है।
विवादास्पद अध्याय में दावा किया गया था कि भ्रष्टाचार, न्यायाधीशों की कमी और मुकदमों का लंबा इंतजार भारतीय न्याय प्रणाली की मुख्य चुनौतियां हैं। सरकार का मानना है कि इन विषयों को जिस संवेदनहीन तरीके से पेश किया गया, वह छात्रों के मन में लोकतंत्र के मुख्य स्तंभ के प्रति गलत धारणा पैदा कर सकता है। शिक्षा मंत्रालय अब विशेषज्ञों की एक नई समिति के माध्यम से इस अध्याय को फिर से लिखवाने की तैयारी कर रहा है, ताकि भविष्य में इस तरह की कूटनीतिक और संवैधानिक चूक न हो।
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