NEET Paper Leak: छत्तीसगढ़ के धमतरी जिले में NEET परीक्षा पेपर लीक मामले को लेकर विद्यार्थियों ने अपनी चिंता खुलकर व्यक्त की है। ग्राम लोहरसी स्थित विद्याकुंज स्कूल के छात्रों ने प्रतियोगी परीक्षाओं में पारदर्शिता बनाए रखने और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नाम ज्ञापन सौंपा। इससे पहले विद्यार्थियों ने हस्ताक्षर अभियान चलाकर अपनी मांगों के समर्थन में अन्य छात्रों का सहयोग भी प्राप्त किया। छात्रों का कहना है कि प्रतियोगी परीक्षाओं की विश्वसनीयता बनाए रखना लाखों युवाओं के भविष्य के लिए बेहद जरूरी है।

50 विद्यार्थियों ने हस्ताक्षर अभियान चलाकर जुटाया समर्थन
ज्ञापन सौंपने से पहले विद्यालय के करीब 50 छात्र-छात्राओं ने हस्ताक्षर अभियान आयोजित किया। इस अभियान का उद्देश्य NEET पेपर लीक मामले पर अपनी चिंता दर्ज कराना और अपनी मांगों को मजबूती देना था। छात्रों ने अभियान के माध्यम से यह संदेश देने का प्रयास किया कि प्रतियोगी परीक्षाओं की निष्पक्षता पर कोई भी सवाल उनके भविष्य और मेहनत पर सीधा प्रभाव डालता है। हस्ताक्षर अभियान पूरा होने के बाद 23 जुलाई को छात्र धमतरी कलेक्ट्रेट पहुंचे और प्रधानमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपा।

शिक्षा मंत्री को हटाने की मांग
ज्ञापन में विद्यार्थियों ने केंद्र सरकार से केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को मंत्री पद से हटाने की मांग की। उनका कहना है कि NEET पेपर लीक प्रकरण ने देशभर के छात्रों के बीच चिंता और असंतोष पैदा किया है। छात्रों ने मांग की कि मामले में शामिल सभी दोषियों की निष्पक्ष जांच कर उनके खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाए, ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।
डॉक्टर बनने का सपना, लेकिन भविष्य को लेकर चिंता
ज्ञापन में विद्यार्थियों ने बताया कि वे विद्याकुंज स्कूल, ग्राम लोहरसी, जिला धमतरी के कक्षा 10वीं, 11वीं और 12वीं के छात्र-छात्राएं हैं। उनका सपना डॉक्टर बनकर समाज और देश की सेवा करना है। हालांकि, हाल के पेपर लीक मामलों के बाद वे अपने भविष्य को लेकर चिंतित हैं। उनका कहना है कि यदि प्रतियोगी परीक्षाओं की पारदर्शिता पर सवाल उठते हैं, तो मेहनत करने वाले लाखों छात्रों का मनोबल कमजोर पड़ता है और उनका विश्वास परीक्षा प्रणाली से उठने लगता है।
प्रधानमंत्री से की निष्पक्ष कार्रवाई की अपील
विद्यार्थियों ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से आग्रह किया कि प्रतियोगी परीक्षाओं की विश्वसनीयता बनाए रखने के लिए प्रभावी कदम उठाए जाएं। उन्होंने कहा कि पेपर लीक जैसी घटनाओं पर कठोर कार्रवाई होने से छात्रों का विश्वास दोबारा मजबूत होगा। ज्ञापन में यह भी कहा गया कि मेहनत और योग्यता के आधार पर परीक्षा परिणाम सुनिश्चित करना देश के युवाओं के हित में आवश्यक है।
छात्र प्रतिनिधियों ने सौंपा ज्ञापन
प्रधानमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपने वाले छात्र प्रतिनिधियों में रुचि साहू, इशिता ध्रुव और गरिमा गंजीर सहित अन्य विद्यार्थी शामिल रहे। उन्होंने कहा कि उनका उद्देश्य किसी प्रकार का विवाद पैदा करना नहीं, बल्कि प्रतियोगी परीक्षाओं में पारदर्शिता और निष्पक्षता सुनिश्चित करने की मांग करना है। छात्रों ने उम्मीद जताई कि उनकी बात संबंधित स्तर तक पहुंचेगी और इस दिशा में आवश्यक कदम उठाए जाएंगे।
देशभर में शिक्षा व्यवस्था को लेकर जारी है विरोध
इन दिनों देश की राजधानी दिल्ली के जंतर-मंतर पर शिक्षा व्यवस्था में सुधार, प्रतियोगी परीक्षाओं की पारदर्शिता और पेपर लीक जैसे मुद्दों को लेकर विभिन्न संगठनों द्वारा विरोध प्रदर्शन किए जा रहे हैं। इन आंदोलनों में कई राज्यों से छात्र, युवा और सामाजिक कार्यकर्ता भाग ले रहे हैं। प्रदर्शनकारी समूहों का कहना है कि उनका उद्देश्य परीक्षा प्रणाली को अधिक पारदर्शी और भरोसेमंद बनाना है, ताकि मेहनत करने वाले विद्यार्थियों को न्याय मिल सके।
छत्तीसगढ़ के युवाओं की भी बताई जा रही भागीदारी
प्रदर्शनकारी संगठनों के अनुसार छत्तीसगढ़ के कई छात्र और युवा भी दिल्ली में चल रहे आंदोलन का हिस्सा बने हैं। हालांकि, जंतर-मंतर पर पहुंचे छत्तीसगढ़ के प्रतिभागियों की संख्या को लेकर अब तक कोई आधिकारिक या सरकारी आंकड़ा जारी नहीं किया गया है। विभिन्न संगठनों का दावा है कि देशभर से हजारों छात्र इस अभियान से जुड़े हुए हैं और प्रतियोगी परीक्षाओं में पारदर्शिता सुनिश्चित करने की मांग कर रहे हैं।
निष्पक्ष परीक्षा प्रणाली की मांग हुई मजबूत
धमतरी के विद्यार्थियों की यह पहल इस बात का संकेत है कि प्रतियोगी परीक्षाओं की निष्पक्षता का मुद्दा केवल बड़े शहरों तक सीमित नहीं है, बल्कि छोटे जिलों और ग्रामीण क्षेत्रों के छात्र भी इसे लेकर गंभीर हैं। उनका कहना है कि मेहनत करने वाले विद्यार्थियों का भविष्य सुरक्षित रखने के लिए परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता, जवाबदेही और कड़ी कानूनी व्यवस्था आवश्यक है। छात्रों को उम्मीद है कि उनकी मांगों पर संबंधित स्तर पर विचार किया जाएगा और भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए प्रभावी कदम उठाए जाएंगे।
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