Nepal Political Crisis: नेपाल इस समय इतिहास के सबसे संवेदनशील दौर से गुजर रहा है। प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली के इस्तीफे के बाद देश में राजनीतिक संकट और गहराता जा रहा है। सड़कों पर Gen-Z प्रदर्शनकारियों का कब्जा है, कई हिस्सों में हिंसा भड़क चुकी है और सोशल मीडिया पर बैन लगाने के बावजूद हालात काबू में नहीं आए। इस अस्थिरता के बीच सवाल उठ रहा है – क्या नेपाल में एक बार फिर राजतंत्र की वापसी हो सकती है?

“फिलहाल नहीं लौटेगा राजतंत्र” –प्रो. स्वर्ण सिंह
जेएनयू में इंटरनेशनल रिलेशन्स के प्रोफेसर स्वर्ण सिंह का मानना है कि अभी नेपाल में राजतंत्र की वापसी की संभावना बेहद कम है। उन्होंने कहा:”नेपाल अब एक गणराज्य है और वहां की लोकतांत्रिक व्यवस्था धीरे-धीरे मजबूत हुई है। संविधान के अनुसार चुनी गई सरकार और राष्ट्रपति प्रणाली अब वहां की राजनीति की मुख्यधारा बन चुकी है।” हालांकि उन्होंने यह भी जोड़ा कि कुछ छोटे राजनीतिक दल और समूह राजतंत्र की मांग कर रहे हैं, लेकिन उनका प्रभाव फिलहाल सीमित है।

सियासी दल तलाश रहे हैं मौका
प्रोफेसर सिंह के अनुसार, जब देश में अस्थिरता होती है तो हर दल अपने राजनीतिक फायदे की संभावनाएं तलाशने लगता है। उन्होंने नेपाल के उभरते राजनीतिक दल “राष्ट्रिय स्वतन्त्रता पार्टी” (RSP) का उदाहरण दिया, जो हाल के चुनाव में चौथी सबसे बड़ी पार्टी बनी और फिलहाल प्रदर्शनकारियों के समर्थन में है।
प्रदर्शनकारी बेकाबू, राष्ट्रपति भवन तक घुसे
ओली के इस्तीफे के बाद हिंसा और भीषण हो गई है। प्रदर्शनकारियों ने काठमांडू स्थित ओली की निजी संपत्ति को आग के हवाले कर दिया। यहां तक कि राष्ट्रपति भवन तक भीड़ पहुंच गई और वहां तोड़फोड़ के बाद आगजनी की घटना सामने आई। अब तक 24 लोगों की मौत हो चुकी है और DSP स्तर के अधिकारी की पीट-पीटकर हत्या कर दी गई।
सोशल मीडिया बैन हटाया, लेकिन उबाल जारी
सरकार ने पहले फेसबुक, यूट्यूब, इंस्टाग्राम और वॉट्सऐप समेत 26 ऐप्स पर रोक लगाई थी, लेकिन बवाल थमने की बजाय और बढ़ गया। मजबूरन सरकार को यह बैन हटाना पड़ा, लेकिन इससे कोई खास फर्क नहीं पड़ा।
नई सरकार को लेकर हलचल
ओली के इस्तीफे के बाद नई सरकार के गठन को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं। आंदोलन की अगुवाई कर रहे नेताओं बालेन शाह और रवि लामिछाने के बीच बातचीत हुई है, जिससे यह संकेत मिल रहा है कि अब देश को स्थिर करने के प्रयास हो सकते हैं।
नेपाल में वर्तमान संकट भले ही गंभीर हो, लेकिन विशेषज्ञों की मानें तो राजतंत्र की वापसी की संभावना बहुत कम है। मौजूदा हालात में प्राथमिकता राजनीतिक स्थिरता और शांति बहाली है। आने वाले दिनों में सरकार गठन और जनता के विश्वास को पुनर्स्थापित करना ही असली चुनौती होगी।










