Cyclone Bay of Bengal : बंगाल की खाड़ी में एक बार फिर चक्रवाती तूफान का खतरा बढ़ता दिखाई दे रहा है। चक्रवात अर्नब के प्रभाव से उबरने की कोशिश कर रहे आंध्र प्रदेश के तटीय इलाकों के सामने अब एक नए मौसमी सिस्टम की चुनौती खड़ी हो गई है। भारतीय मौसम विभाग (IMD) के ताजा पूर्वानुमान के अनुसार, दक्षिण-पूर्व बंगाल की खाड़ी में विकसित हुआ कम दबाव का क्षेत्र तेजी से मजबूत हो रहा है। इसके अगले कुछ समय में और शक्तिशाली होकर चक्रवाती तूफान का रूप लेने की आशंका है।

दक्षिण-पूर्व बंगाल की खाड़ी में बना दबाव
मौसम विभाग के मुताबिक, दक्षिण अंडमान सागर और आसपास के क्षेत्रों में बना कम दबाव का क्षेत्र पश्चिम-उत्तर-पश्चिम दिशा में आगे बढ़ा है। 31 अक्टूबर की सुबह तक यह दक्षिण-पूर्व बंगाल की खाड़ी और अंडमान-निकोबार क्षेत्र के आसपास वेल मार्क्ड लो प्रेशर एरिया में बदल गया था। इसके बाद IMD ने इसके डिप्रेशन में तब्दील होने की संभावना जताई। बाद के अपडेट में यह सिस्टम डिप्रेशन में बदल चुका था और इसके आगे गहरे दबाव तथा चक्रवाती तूफान में मजबूत होने का अनुमान जताया गया।

2 नवंबर की शाम आंध्र तट के पास पहुंचने का अनुमान
IMD के पूर्वानुमान के अनुसार, यह मौसमी सिस्टम पश्चिम-उत्तर-पश्चिम दिशा में आगे बढ़ते हुए पश्चिम-मध्य बंगाल की खाड़ी तक पहुंच सकता है। इसके 2 नवंबर 2026 की शाम तक आंध्र प्रदेश तट के पास पहुंचने की संभावना है। इस दौरान समुद्र की स्थिति खराब हो सकती है और तटीय क्षेत्रों में मौसम में बदलाव देखने को मिल सकता है। मौसम विभाग लगातार सिस्टम की दिशा, गति और तीव्रता पर नजर बनाए हुए है।
चक्रवात अर्नब के बाद बढ़ी प्रशासन की चिंता
इससे पहले चक्रवात अर्नब ने 28 अक्टूबर के आसपास आंध्र प्रदेश और आसपास के तटीय क्षेत्रों को प्रभावित किया था। तूफान के कारण कई इलाकों में जान-माल का नुकसान हुआ और सड़क, बिजली तथा कृषि से जुड़े बुनियादी ढांचे पर असर पड़ा। प्रभावित परिवारों तक राहत पहुंचाने और क्षतिग्रस्त क्षेत्रों में सामान्य स्थिति बहाल करने का काम जारी है। ऐसे समय में एक नए संभावित चक्रवात की आशंका ने प्रशासन और स्थानीय लोगों की चिंता बढ़ा दी है।
ओडिशा और आंध्र प्रदेश के तटीय इलाकों पर नजर
नए सिस्टम के असर को लेकर आंध्र प्रदेश के साथ ओडिशा के तटीय क्षेत्रों में भी मौसम की निगरानी की जा रही है। हालांकि, IMD के उपलब्ध पूर्वानुमान में सिस्टम के आंध्र प्रदेश तट के पास पहुंचने की बात कही गई है, लेकिन इससे यह तय नहीं होता कि तूफान किस स्थान पर और कब लैंडफॉल करेगा। ओडिशा में भी बारिश और समुद्री परिस्थितियों से जुड़े अपडेट पर नजर रखना जरूरी होगा।

लैंडफॉल और तूफान की ताकत पर अभी तस्वीर साफ नहीं
फिलहाल नए सिस्टम की अंतिम तीव्रता, संभावित लैंडफॉल का स्थान और उससे होने वाले नुकसान का आकलन स्पष्ट नहीं है। मौसम विभाग के अगले बुलेटिन में इन पहलुओं पर अधिक जानकारी मिल सकती है। तटीय क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को प्रशासन और IMD की आधिकारिक चेतावनियों पर ध्यान देना चाहिए। मछुआरों और समुद्र में जाने वाले लोगों के लिए जारी निर्देशों का पालन करना भी जरूरी है।
अगले 24 से 48 घंटे बेहद अहम
बंगाल की खाड़ी में बन रहा यह सिस्टम आने वाले 24 से 48 घंटों में किस दिशा में बढ़ता है और कितनी ताकत हासिल करता है, इस पर सभी की नजरें टिकी हैं। चक्रवात अर्नब के बाद लगातार दूसरे संभावित तूफान की स्थिति पूर्वी तट के लिए चुनौती बन सकती है। हालांकि, वास्तविक खतरे का स्तर मौसम विभाग के आगामी अपडेट और सिस्टम की आगे की स्थिति से ही स्पष्ट होगा।
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