Nikki Haley: अमेरिका में राष्ट्रपति चुनाव से पहले भारत को लेकर बयानबाजी तेज हो गई है। रिपब्लिकन पार्टी की प्रमुख नेता और संयुक्त राष्ट्र में अमेरिका की पूर्व राजदूत निक्की हेली ने मंगलवार को डोनाल्ड ट्रंप की भारत विरोधी टिप्पणियों पर नाराज़गी जताते हुए कहा कि अमेरिका को भारत जैसे मजबूत साझेदार के साथ अपने रिश्ते खराब नहीं करने चाहिए, जबकि चीन जैसे विरोधी को छूट नहीं दी जानी चाहिए।
हेली ने एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर पोस्ट करते हुए कहा कि, “भारत को रूस से तेल नहीं खरीदना चाहिए, लेकिन अमेरिका की विदेश नीति में चीन को टैरिफ से 90 दिनों की छूट देना और भारत पर प्रतिबंधों की बात करना एक गलत रणनीति है।” उन्होंने यह भी जोड़ा कि अमेरिका को अपने सहयोगियों के साथ मजबूती से खड़ा रहना चाहिए, न कि उन्हें निशाना बनाना चाहिए।
निक्की हेली की यह प्रतिक्रिया उस वक्त आई है जब अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने मंगलवार को एक इंटरव्यू में कहा कि भारत एक अच्छा व्यापारिक साझेदार नहीं रहा है और वह भारत से आयातित वस्तुओं पर टैरिफ को मौजूदा 25% से काफी अधिक बढ़ाएंगे। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि भारत रूस से तेल खरीदकर “युद्ध मशीन को ईंधन” दे रहा है, जिससे अमेरिका “खुश नहीं हो सकता”।
ट्रंप ने कहा कि भारत न केवल रूसी तेल बड़ी मात्रा में खरीद रहा है, बल्कि उसे मुनाफे पर फिर से बेच भी रहा है, जबकि यूक्रेन में चल रहे युद्ध के चलते हजारों लोग मारे जा रहे हैं। उन्होंने चेतावनी दी कि भारत पर नए टैरिफ और जुर्माने लगाए जा सकते हैं।
निक्की हेली ने चीन को टैरिफ में दी गई राहत पर सवाल उठाते हुए कहा कि, “चीन अमेरिका का विरोधी है, और वह रूसी व ईरानी तेल का सबसे बड़ा खरीदार है। फिर भी उसे टैरिफ पर 90 दिनों की छूट दी गई है। यह दोहरा मापदंड नहीं चलेगा।”
अल जजीरा की रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिका और चीन ने मई में 90 दिनों के टैरिफ विराम पर सहमति जताई थी, जिसमें अमेरिकी टैरिफ 145% से घटाकर 30% और चीनी शुल्क 125% से घटाकर 10% कर दिए गए थे।
अमेरिकी बयान के बाद भारत ने भी तीखी प्रतिक्रिया दी है। भारत के विदेश मंत्रालय ने एक बयान जारी कर कहा कि, “भारत को निशाना बनाना अनुचित है। सरकार अपने राष्ट्रीय हितों और आर्थिक सुरक्षा की रक्षा के लिए सभी आवश्यक कदम उठाएगी।”
निक्की हेली का यह बयान ना सिर्फ ट्रंप की भारत पर की गई आलोचना पर करारा जवाब है, बल्कि यह भी दर्शाता है कि अमेरिका के भीतर भी भारत के साथ मजबूत रिश्तों की जरूरत को लेकर मतभेद हैं। जहां ट्रंप की नीति भारत पर दबाव डालने की है, वहीं हेली जैसी नेता भारत को सहयोगी मानते हुए संतुलित दृष्टिकोण अपनाने की वकालत कर रही हैं।
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