Nirav Modi Extradition : पंजाब नेशनल बैंक (PNB) घोटाले के मुख्य आरोपी और भगोड़े हीरा कारोबारी नीरव मोदी की मुश्किलें अब अपने चरम पर हैं। उसके भारत प्रत्यर्पण का मार्ग पूरी तरह से प्रशस्त हो गया है। हाल ही में यूरोपीय मानवाधिकार न्यायालय (ECHR) ने उसकी याचिका को खारिज कर दिया है, जिससे उसे कोई राहत नहीं मिल सकी। इस अदालत के फैसले के बाद नीरव मोदी के पास कानूनी तौर पर बचने का कोई बड़ा विकल्प शेष नहीं बचा है। ब्रिटेन की कानूनी प्रक्रियाओं के खत्म होने के बाद अब केवल कुछ अंतिम प्रशासनिक औपचारिकताएं बची हैं, जिन्हें पूरा करने के बाद उसे भारत को सौंप दिया जाएगा।

कानूनी विकल्पों का खात्मा और अंतिम सुनवाई की असफलता
सूत्रों से प्राप्त जानकारी के अनुसार, नीरव मोदी ने ब्रिटेन की अदालतों में अपनी तमाम कानूनी लड़ाई हारने के बाद अप्रैल 2026 में अंतिम उम्मीद के तौर पर यूरोपीय मानवाधिकार न्यायालय का दरवाजा खटखटाया था। उससे पहले, मार्च 2026 में लंदन के हाई कोर्ट ऑफ जस्टिस (किंग्स बेंच डिवीजन) ने उसके प्रत्यर्पण आदेश को फिर से खोलने की याचिका को सिरे से खारिज कर दिया था। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अदालतों के इन फैसलों ने यह स्पष्ट कर दिया है कि ब्रिटेन में कानून की नजर में नीरव मोदी का मामला अब अंतिम चरण में है और उसे अब प्रत्यर्पण से कोई नहीं बचा सकता।

कूटनीतिक और प्रशासनिक प्रक्रिया का अंतिम चरण
अब जबकि कानूनी रास्ते पूरी तरह बंद हो चुके हैं, कूटनीतिक सूत्रों का मानना है कि ब्रिटेन सरकार ने नीरव मोदी को भारत सौंपने की औपचारिक प्रक्रिया का आरंभ कर दिया है। कानूनी बाधाओं के हट जाने के बाद अब केवल कागजी और प्रशासनिक औपचारिकताएं बाकी हैं, जो जल्द ही पूरी कर ली जाएंगी। सुरक्षा एजेंसियां और भारत सरकार इस प्रक्रिया पर बारीक नजर बनाए हुए हैं। उम्मीद है कि अगले कुछ दिनों या हफ्तों के भीतर नीरव मोदी को विशेष विमान के जरिए वापस भारत लाया जा सकता है।

मार्च 2019 से लंदन की जेल में कैद है भगोड़ा नीरव मोदी
नीरव मोदी को मार्च 2019 में लंदन पुलिस द्वारा गिरफ्तार किया गया था। तब से वह लंदन की जेल में अपनी कैद काट रहा है। भारत में उसके खिलाफ सीबीआई (CBI) और प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने 13,000 करोड़ रुपये के पीएनबी घोटाले और मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़े गंभीर मामले दर्ज किए हैं। उसके प्रत्यर्पण के लिए भारत सरकार पिछले कई वर्षों से लगातार प्रयास कर रही थी। ब्रिटेन की अदालतों में लंबी चली इस कानूनी जंग में अंततः भारत सरकार की जीत हुई है और मोदी के स्वदेश वापसी का समय निकट आ गया है।
क्या है 13,000 करोड़ का PNB घोटाला?
यह घोटाला वर्ष 2018 में सामने आया था, जिसने भारतीय बैंकिंग प्रणाली की नींव हिला दी थी। आरोप है कि नीरव मोदी ने फर्जी लेटर ऑफ अंडरटेकिंग (LoU) का उपयोग करके पीएनबी को करीब 13,000 करोड़ रुपये का चूना लगाया। घोटाले का खुलासा होते ही वह भारत छोड़कर विदेश भाग गया था। इस मामले में उसके प्रत्यर्पण का औपचारिक अनुरोध भारत ने ब्रिटेन को भेजा था। अब जबकि कानून अपना काम पूरा कर चुका है, तो देश को उसके प्रत्यर्पण का बेसब्री से इंतजार है ताकि वह कानून के कटघरे में खड़ा हो सके।
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