Ram Mandir Row : अयोध्या स्थित श्रीराम जन्मभूमि मंदिर में श्रद्धालुओं द्वारा अर्पित किए गए चढ़ावे की गणना के दौरान हुए कथित गबन और चोरी के मामले में विशेष जांच टीम (SIT) ने अपनी प्रारंभिक रिपोर्ट में चौंकाने वाले खुलासे किए हैं। 23 जून 2026 को उत्तर प्रदेश सरकार को सौंपी गई इस विस्तृत रिपोर्ट ने मंदिर के चढ़ावा प्रबंधन और निगरानी तंत्र की पोल खोलकर रख दी है। SIT के अनुसार, यह मामला मात्र कुछ कर्मचारियों की व्यक्तिगत चोरी तक सीमित नहीं है, बल्कि यह एक व्यवस्थित भ्रष्टाचार का हिस्सा प्रतीत होता है, जिसने मंदिर की सुरक्षा और वित्तीय पारदर्शिता पर बड़े प्रश्नचिह्न खड़े कर दिए हैं।

CCTV फुटेज में कैद हुई कर्मचारियों की संदिग्ध गतिविधियां
जांच का मुख्य आधार 27 अप्रैल से 6 मई 2026 के बीच के CCTV फुटेज रहे हैं। फुटेज के सूक्ष्म विश्लेषण से पता चलता है कि मंदिर के गिनती कक्ष में तैनात कर्मचारी लंबे समय से चोरी की वारदात को अंजाम दे रहे थे। रिपोर्ट में 70 से अधिक संदिग्ध घटनाओं का उल्लेख है, जिसमें कर्मचारी नोटों की गड्डियों से पैसे निकालकर अपने कपड़ों, जेबों और जूतों में छिपाते हुए साफ दिखाई दे रहे हैं। ये घटनाएं किसी आकस्मिक चूक का परिणाम नहीं, बल्कि एक सुनियोजित प्रक्रिया का हिस्सा थीं, जिसे कई दिनों तक बेखौफ होकर दोहराया गया।

छह कर्मचारियों की भूमिका पर एसआईटी का सख्त रुख
SIT ने अपनी जांच में छह कर्मचारियों—अविनाश शुक्ला, अनुकल्प मिश्रा, लवकुश मिश्रा, मनीष कुमार यादव, करुणेश पांडेय और रामाशंकर मिश्र—को प्रथम दृष्टया संदिग्ध माना है। इन लोगों के खिलाफ प्राप्त CCTV साक्ष्यों और प्रारंभिक बरामदगी के आधार पर यह निष्कर्ष निकाला गया है। हालांकि, SIT का मानना है कि इतनी बड़ी अनियमितता सिर्फ इन कर्मचारियों के बल पर संभव नहीं थी, बल्कि इसमें उच्च स्तरीय पर्यवेक्षण की विफलता भी शामिल है। संबंधित संदिग्धों के बैंक खातों की शुरुआती जांच में उनकी आय से अधिक राशि के लेन-देन मिले हैं, जो गबन की गंभीरता को दर्शाते हैं।

सुरक्षा मानकों और SOP की धज्जियां
जांच रिपोर्ट में स्पष्ट किया गया है कि चढ़ावे की गणना के लिए बनाए गए मानक संचालन प्रक्रियाओं (SOP) का कहीं भी पालन नहीं किया गया। ट्रस्ट और बैंक के बीच जो समझौता (MoU) हुआ था, उसके महत्वपूर्ण प्रावधानों को पूरी तरह नजरअंदाज किया गया। गिनती कक्ष में कर्मचारियों की तलाशी लेने, निजी सामानों पर नियंत्रण रखने और नकदी को व्यवस्थित रूप से रिकॉर्ड करने के नियमों को ताक पर रख दिया गया था। हंडियों की नकदी को एक साथ मिलाना और वजन का सही मिलान न करना ही चोरी का सबसे बड़ा कारण बना।
विस्तृत वित्तीय जांच और भविष्य की रणनीति
SIT ने अपनी सिफारिशों में स्पष्ट किया है कि केवल गिरफ्तारियां पर्याप्त नहीं हैं। मंदिर के चढ़ावा प्रबंधन से जुड़े सभी पर्यवेक्षकों और जिम्मेदार अधिकारियों की भूमिका की भी गहन जांच होनी चाहिए। SIT ने संदिग्धों की संपत्ति, वित्तीय लेनदेन और बैंक खातों की विस्तृत फॉरेंसिक ऑडिट की सिफारिश की है ताकि लूटी गई पूरी रकम का हिसाब लगाया जा सके। यह रिपोर्ट मंदिर प्रशासन के लिए एक बड़ी चेतावनी है कि सुरक्षा और निगरानी व्यवस्था को डिजिटल और पारदर्शी बनाने के लिए अब तकनीक का कड़ाई से पालन अनिवार्य है।











